सोमवार, 20 दिसंबर 2010

'मार् दिया दिल्ली की सर्दी '







                                                  'मार् दिया दिल्ली की सर्दी '                                                                                                                                
                                                                    एल..आर.गान्धी. 


मौसम के खबरीओं का अनुमान है -अबकी बार ठण्ड अपने सभी पिछ्ले रिकर्ड तोड देगी ! पिछली दिसबर की  कम्प्कम्पाती ठण्डी में शीला जी की नगर निगम के अफ्सरों  ने बेघर लोगो का रैनबसेरा गिरा दिया ताकी 
वहाँ पार्क बनाया जाए तो बेघर  लोग उसी स्थान पर ठण्ड से मरने लागे. एक सव्यम सेवी संस्था ने सर्वोच्च न्यायालय को लिखा तो न्यायाक्य ने इसका सख्त नोटिस लेते हुए दिल्ली सरकार को बेघर लोगों के लिए रैनबसेरे दुगने  करने का  आदेश जारी किया. इस बरस शिला जी के अफ्सर फिर दो रैनबसेरे तोड़ते हुए पाए गए तो सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए की यह निश्चित किया जाए की कोइ भी बेघर इन्सान मरने  न पाए . सारे देश में बेघर इन्सनों के लिए पर्याप्त रैन्बसेरों का प्रबन्ध किया जाए. भविष्य में किसी भी रैनबसेरे को तब तक न तोडा जाए जब तक उसके स्थान पर नए आवास का प्रबन्ध न हो जाए. इसके साथ् ही दिल्ली के सभी ६५ रैनबसेरों को एक सप्ताह के भीतर चालु करने के भी निर्देश दिए गए.
देश की राजधानी जहाँ आधुनिक भारत के सभी सैकुलर शासक बडी बडी आलिशान वातानुकुलित अट्टालिकाओं  में चैन की नींद सोते हैं , वंहीं एक लाख बदनसीब बेघर गरीब इतनी भीषण ठण्ड में भी खुले असमान के नीचे तिल तिल मरने  को मजबूर हैं. शीलाजी का दावा है कि सोनिया जी की सरकार ने सभी के लिए रैन्बसेरों का पक्का इन्तजाम किया है. जबकी मौजुदा रैनबसेरे मात्र ६००० इनसानो को आश्रय दे पाते हैं .एक अनुमान के अनुसार दिल्ली की सर्दी हर रोज १० इनसानों को लील जाति है. निज़ामुदीन क्षेत्र  का एक आदमी जो मृत्कों के शवों के अन्तिम संस्कार का कार्य कर्ता है का कहना है कि पिछ्ली सर्दी में उसने हर रोज ९ लोगो को शम्शान पहुन्चाया .   
देश में ऐसे बेघर जिनके पास सर छुपाने को झोपडी भी  नहीं ,  एक करोड तीस लाख हैं और इन् पर प्रति व्यक्ति ५-६ जीव  आश्रित भी हैं. भीषण सर्दी ही नहीं -मान्सून -भीषण गर्मी , बिमारिया, बच्चो  की पढाई , बेरोजगारी और सबसे बडी समस्या भूख के चलते ये लोग महानग्रों की सड्कों के किनारे प्रति दिन तिल तिल मरते हैं.    
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर  कर्नाटक और गुजरात सरकार तो कुछ हर्कत में आइ हैं  कर्नाटक सरकार ने राज्य के सभी ज़िलाधिशों को और २१४ लोकल बडिज़ को ४९ सूत्री कार्य क्रम के तहत बेघर गरिबों के लिए आवास और भोजन के समुचित प्रबन्धन पर ३ माह के भीतर कार्यान्वन के आदेश दिए हैं . वहीं गुजरात में अहमदाबाद नगर निगम ने बेघर लोगों के लिए ६ डौरमैटारी किसम के आवास 'रैनबसेरे'  बनाने की योजना बनाई है जहाँ बेघर  लोग रात्री के वक्त ठहर सकेंगे और इसके इलावा ऐसे लोगों को रात्री के वक्त रैन्बसेरों, कैमुनीटी केन्द्र , मंदिरों और दिस्पैन्सरिओन् में आश्रय दिया जाएगा.  
वहीं देश के सबसे बडे  प्रदेश उत्तर प्रदेश की  महारानी माया वती जी के पास 'माया' की कमी के चलते इस योजना पर कोइ भी कारवाई करने का न तो वक्त है और न ही पैसा. फिर भी प्यार की धरोहर ताजमहल के लिए मशहूर आगरा में एक श्री निशुल्क जल सेवा दल के बाँके लाल महेश्वरी द्वारा ५० बेघर इन्सानों के लिए एक रैनबसेरा ज़रुर बनाया गया है. माया जी के पास विशाल मूर्तियों ,स्मार्कों, पत्थर के भीमकाय हाथियों के लिए तो करोदों रुपये  हैं मगर इन्सानों के लिए ...........
दिल्ली पुलिस के रेकर्ड के अनुसार २००५ से २००९  तक ऐसे बेघर बेसहारा मरने  वालों की संख्या ३१०३ रही. इस के अतिरिक्त जिन बेसहारा लोगों को पास पड़ोस के लोग खुद ही अन्तिम संस्कार कर देते हैं कि गिन्ती प्रति दिन १० मृत्कों की है. पुलिस की माने तो बेसहारा लोग भीषण गर्मी का शिकार अधिक संख्या में होते हैं.ऐसे मृत्कों में ९४% लोग औस्तान ४२ वर्ष के मजदुरी करने वाले पुरुष होते हैं. मात्र ८% लोग दुर्घटना या हत्या का शिकार होते हैं जबकी ९२% लोग भूख, प्यास ,गर्मी, ठण्ड, बिमारी और निर्धनता के कारण बिना उपचार रोगों जैसे टी.बी. मलेरिया या नशा जन्य रोगों के शिकार हो  जाते हैं .
लौह  पुरुष वल्लभ भाई पटेल ने रियासतों को समाप्त कर देश में लोक तंत्र की नींव इस लिए मज़बूत की कि लोगों द्वारा चुनी गई सरकारें गरीबों और बेसहारा मजलूमों को रोटी कपडा और मकान की मूल भूत सुविधाएँ उपलब्ध करवाएंगी . मगर आज़ादी के ६३ वर्ष बाद भी गरीब और गरीब होता गया और आज हम विश्व के भ्रष्टतम  देशों के सिरमौर हैं. अरे इन सेकुलर शैतानों से तो बेहतर  रियासती रजवाड़े ही थे . रियासती दौर में शहर के सभी साहूकारों को महाराज की विशेष हिदायत थी कि शर्दी के मौसम में वे अपनी हवेली के अहाते में 'अलाव' जलाएं ताकि बेघर -गरीब लोग और जानवर ठण्ड से राहत पा सकें . इसके इलावा सभी सम्प्रदायों की अपनी अपनी धर्म शालाये और रियासत के रैनबसेरे बेघर लोगों को ठण्ड व् गर्मी से राहत के लिए खोल दिए जाते थे जहाँ भोजन और जलपान की व्यवस्था के अतिरिक्त धर्मार्थ संस्थाएं कम्बल-रजाई निशुल्क उपलब्ध करवातीं थी . पशुओं को  गौशाला में आश्रय  और आहार मिल जाता था. अब इंसानों का यह हाल है- पशुओं का तो बस भगवान ही मालिक है.   
दिल्ली के रईसजादों के लिए तो सर्दी का मौसम उस फिल्मी गीत की माफीक है....'प्यार तेरा दिल्ली की सर्दी' ... और बेघर गरिबों के लिए 'मार् दिया दिल्ली की सर्दी....        

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

मूर्ख- नपुंसक या बौधिक-किन्नर

 मूर्ख- नपुंसक या बौधिक-किन्नर 
एल.आर.गाँधी. 

हमारे सेकुलर शैतानों को विश्व भर में नए नए ' अलंकारों ' से नवाज़ा जा रहा है. सिंगापूर के एक वृष्ट अधिकारी ने अमेरिकियों के साथ एक बैठक में भारत को 'मूर्ख दोस्त' कहा . इसका खुलासा विक्किलीक्स में हुआ . हमारे विदेशी और देसी राजनेताओं को इस का कोई मलाल भी नहीं. अमेरिकन अधिकारिओं के गुप्त सन्देश नित नए नए रहस्योदघाटन कर रहा है विकिलीक्स . २६/११ के आतंकी हमले के बारे में अमेरिका को पूर्व सूचना थी फिर भी उसने हमारे साथ उस महत्तवपूर्ण जानकारी को 'साँझा ' करने की जेहमत  नहीं उठाई. और हम हर आतंकी हमले की शिकायत अमेरिका से ऐसे किये जाते हैं जैसे कोई लाचार- बेबस बार बार मार खा कर आपने भगवान् को याद करता है. अमेरिका को हम विश्व आतंक वाद के खिलाफ अपना चिर सहयोगी मान बैठे हैं और यह भूल गए की अमेरिका के हित पाक के साथ जुड़े हुए है . फिर मूर्ख और नपुंसक का साथ देता भी कौन है ? 
वर्षों से हमारे गृह मंत्री जी  चिल्ला चिल्ला कर आसमान सर पर उठाए हुए हैं कि पाक को २६/११ के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाही के लिए कहा जाए . पाक के यहाँ पनाह लिए आतंकियों  को हमारे सपुर्द किया जाए. अरे भाई जिन आतंकियों को हमारे उच्चतम न्यायालय ने फांसी पर लटकाने की सजा सुना रखी है , पहले उनको तो निपट लो पाक में बैठे आतंकियों को mangwa कर क्या aachaar daloge उनका ? .  एक दशक बीत गया मगर  अफज़ल मियां लाईन में लगे हैं ,कभी शीला जी के पास फाईल अटक जाती है और अब चिदम्बरम  जी के यहाँ पड़ी है. १३ दिसंबर को देश की संसद और सांसदों  की हिफाजत में शहीद हुए जवानों को श्रधांजलि  दी गई और हमले के एक मात्र सजायाफ्ता 'अफज़ल' मियां की फांसी में हो रही देरी के बारे में जब हमारे ग्रह मंत्री 'धोती-धारी' श्री श्री पल्निअप्पम चिदम्बरम से बी.जे.पी नेता सुषमा स्वराज ने पूछा  तो वे बिफर गए , बोले  ' ये लोग मूर्ख हैं या बहरे होने का नाटक कर रहे हैं ,कितनी बार हमने समझाया है इस विषय में .  उन्होंने सरकार की मजबूरी का विस्तार से खुलासा किया. फांसी के सभी केस पंक्ति वार राष्ट्रपति जी को भेजे जाते है . महामहिम ने ५-६ केसों पर हुकम पास भी कर दिया है. एन.डी.ए.काल में जीरो ,उनसे पूर्व शिवराज पाटिल के साढ़े चार साल में २  और उनके २ साल के कार्यकाल में ५-६ . वाह क्या उपलब्धि है ? इस प्रकार अफज़ल का नंबर आते आते तो तीन दशक और गुज़र जाएंगे . जब बड़े भाई का नंबर १५ साल बाद आयेगा तो छोटे मियां  'कसाब' तो जेल में ही बिरियानी  खाते खाते 'अल्लाह' को प्यारे हो जाएंगे.! हाँ यह बात दीगर है कि कोई जहाज़ अगवा हो जाए और हमारे मंत्री जी की रोज़ रोज़ के विपक्षी उलाहनों से जान छूटे.       
नूरा कुश्ती जारी है. गृह मंत्रालय राष्ट्रपति भवन को 'फांसी' के केसों पर हुकम पारित करने के लिए आधा दर्ज़न 'रिमाईडर' भेज चूका है उधर महामहिम के पास और भी बहुत से काम है ,फिर कोई समय सीमा भी नहीं ! जब तक पिछले केस नहीं निपट जाते तब तक और केस भेजने का कोई   ' तुक ' भी नहीं बनता.  . जब दिल्ली की मुख्य मंत्री 'अफज़ल की फ़ाइल ४-५ साल रख सकती है फिर प्रतिभाजी तो महामहिम हैं उनके पास तो असीम शक्तियां है और वह तो फांसी की सजा मुआफ  करने को भी सक्षम है भले ही 'लोक तंत्र के मंदिर संसद ' को उड़ने का अपराधी ही क्यों न हो. अभी 'अफज़ल मियां' की फ़ाइल तो 'धोती-धारी' चिदम्बरम के पास पुराने पापियों कि लम्बी कतार के आगे खिसकने के इंतजार में पड़ी है.
 कितनी बहादुरी के साथ लड़ रहे है 'आतकवाद' के खिलाफ हमारे यह सेकुलर शैतान फिर भी ये दुनिया वाले न मालुम क्यों इनको 'मूर्ख- नपुंसक या बौधिक किन्नर ' के संबोधनों से नवाजे जा रहे हैं ? अभी तो भगवा आतंक इन्हें अंदर से खाए जा रहा है. 

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

क्या इमानदारी क़ी परिभाषा भी बदल गई है ?

चोरों का सरदार ! फिर भी सिंह इमानदार ?
उन्हें हम आज भी लुटेरा कह कर याद करते हैं. गज़नी-नादिर शाह -दुर्रानी- कम्पनी बहादुर और न जाने क्या क्या ? वे तो लूटने आए थे और लूट कर चल दिए ! मगर ये तो अपने हैं और हमीं ने इन्हें चुना है अपना रहनुमां - भला ये कहाँ जाएंगे ?
चोर सिपाही का खेल जारी है. चोरों का सरदार अपनी सरपरस्ती में पहले तो चोरी और सेंध मारी को सरंजाम तक पहुंचता है और जब कुछ सतर्क श्वान अपनी घ्राण शक्ति का मुज़ाहेरा कर चोर-चोर का शोर मचाते हैं तो 'सरदार साहेब' बड़ी मासूमियत से चंद 'उच्चक्कों'  को पकड़ कर 'सख्त कार्रवाही' की ठंडी तफ्शीश की सी.बी.आई. दौड़ा देते हैं - चोर की  दिल्ली की बदनाम  गलियों में तलाश  जारी है और चोरों का राजा चीन के मैदानों में खेल रहा है. चंद खबरी खूब चिल्लाते हैं 'मेरा  मुंसिफ ही मेरा कातिल है -क्या मेरे हक़ में फैसला देगा.'  बाकी के बड़े बड़े 'खबरी' चोरों के राजा के टुकड़े खा कर अपना  श्वान धर्म निभा रहे हैं -'दुम' हिला कर.
बापू के भारत में लूट की परिभाषाएं ही बदल गईं हैं - सेंधमारी अब चोरी हो गई है और डाका महज़ घोटाले का कम्बल ओढ़े सरे बाज़ार इठला रहा है !   लुटेरे अब   'सफ़ेद पोश लीडर ' के रूप में   हमारे भारत भाग्य विधाता बने दिल्ली के मयूर सिंहासन पर शोभाएमान हैं.
चोरों का सरदार ! सिंह फिर भी अमानदार ?
क्या इमानदारी क़ी परिभाषा भी बदल गई है ?

रविवार, 21 नवंबर 2010

तोहमतें आंएगी नादिरशाह पर , आप दिल्ली रोज ही लूटा करें !!





तोहमतें आंएगी नादिरशाह  पर , 
आप दिल्ली रोज ही लूटा करें  !!
          एल.आर.गान्धी 

लुटना हमारा 'राष्ट्रिय व्यसन' है - हम लुट्ने को तैयार  बैठे हैं बस लूटने वाला चाहिए -इतिहास गवाह है ?
मुहम्मद गज्नी ने हमें १९ बार लूटा -नादिर शाह ने  दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह रंगिला से हिन्दुस्तान से लूटी  हुइ दौलत में से २५ लाख रुपये की मांग की और एवज़ में हीरे-मोति जडित मायूर सिंहासन और कोहेनूर हीरा  ले उडा . अह्मद्शाह दुरानी उर्फ अहमद शाह अब्दाली ने भी ८ हमले किए ...इन्सानियत का खून बहाया और लूटा भी. अब हमारे मिडिया के महारथी इस गलत फहमी में न रहें कि उस जमाने में 'खबरी 'कहाँ थे ? सिर्फ वे ही आज के 'राजा' के बिचौलिए हैं. उस वक्त की लूट में शोलापुरी बेगम और मुग्लानी बेगम ने शाह की दिल्ली लूट में 'खबरी' की भूमिका ब्खूबी निभाई और इनाम भी पाया. इन् खाब्रियों की निशान्देही पर शाह ने अमिर खान और कम्रुदीन खान की औरन्ग्ज़ेब के समय से हिन्दुस्तानियों से लूटी गइ ७० साल की कमाइ पर हाथ साफ कर दिया.शाह ने ३० करोड की लूट की जिसे २८००० हाथी, ऊँट , बैल गाड़ियो-छकड़ों आदि पर लाद अफगानिस्तान  ले गया.२०० ऊंटों पर तो दिल्ली दरबार से निकाह कर लाइ गइ बेगमात का ही समान था. मज़हब के नाम पर ७वि सदि से हिन्दुस्तान को लूटा गया और इस्लाम के नाम पर अनगिनत  काफिरों  (हिन्दुओ) की हत्या कर दी गइ और यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारि है. लूटा तो अन्ग्रेज़ों ने भी मगर आधुनिक भारत में वैज्ञानिक प्रगती में उनकी रेल ,डाकघर और शिक्षा की देन भी है,जिस से देश एक जुट हो कर आजादी के संघर्ष में कूद गया. 
आजादी के बाद भी लुट्ने का यह राष्ट्रिय 'व्यसन'  पूर्वतय जारी है.  पाक ने हमारे कश्मीर की  ३५% भूमि पर कब्जा कर लिया और सरकार ने पाक को देय ५० करोड रुपये पर रोक  लगा दी.  हमारे या फिर पाक के 'बापू'  की जिद के आगे सरकार हार गइ और ५० करोड पाक को दे कर हमने एक स्थाई  शत्रु पाल लिया( आज यह रकम १२ अरब ५० करोड़ बनती है)..... .आजाद भारत के पहले 'लुटेरे' होने का गौरव मिला- कृष्ण मेनन को जब जीप घोटाले में ८० लाख की लूट हुइ आज यह रकम २ अरब रुपये बनती है. और इसे अब तक देश का सबसे बड़ा घोटाला होने का श्रेय प्राप्त है. . तब भी संसद में हंगामा हुआ . मगर विपक्ष की आवाज में उतना दम नहीं था. नेहरु जी देश को अपने बाप दादा की जागीर मानते थे- कृष्ण मेनन को सजा तो क्या उल्टा देश का रक्षा मन्त्री बन डाला. नतिजा ? चीन से हमे शर्मनाक हार झेलनी पडी और हजारों मील हमारी भूमि आज भी चीन के कब्ज़े में है.एक भ्रष्ट मित्र की ब्दौलत नेहरु त्रासद अंत को प्राप्त हुए.
पिछ्ले ५ दशक से हमारे सत्ताधारी 'धृत राष्ट्र ' नेहरु जी की 'लुटो-लुटाओ' राष्ट्रिय नीति का अनुसरण करते आ रहे हैं . इन्दिरा जी ने पाक को दो फाड तो किया मगर उसकी कीमत आज की पीढी को अदा करनी पड रही है. देश की अर्थव्यवस्था तो चौपट हुइ सो हुइ मगर करोड़ों बंगला देशी भारत में घुस आए सो अलग . एक नया दुश्मन हमारे जी का जन्जाल और बन गया है. नेहरु जी के 'राज्दौत्र' राजीव जी को आखिर ज्ञान प्राप्त हुआ कि केन्द्र से 'पाँच वर्षीय योजनाओ के लिए भेजा गया रुपया आम आदमी तक पहुंचते  पहुंचते  मात्र १०-१५ पैसे ही रह जाता है.बाकी के पैसे तो 'भ्रष्ट तन्त्र' की जेब में ही पहुँच जाते हैं. बोफ़र काण्ड पर राजीव को हार का मुंह देखना पडा, मगर बोफ़र का दलाल कत्रोची आज भी कानून के लम्बे पर बंधे हाथों से दूर है. सुख राम के संचार घोटाले पर पर्देदारी का ही परिणाम है की आज ' राजा' का संचार घोटाला १,७६,६४५ करोड की उचाईयाँ  छू रहा है और नेहरु की पादुकाओं  में विराजमान मनमोहन जी - गान्धी जैसा मौन व्रत धारण किए बैठे हैं. देखो !  सर्वोच् न्यायालय सिंह साहेब का मौन व्रत तुड्वा पाता है या .......                
 देश का ६६००० अरब रुपया स्विस बैंकों में पहुँच गया. घोटालों की माँ २ जी  स्पेक्ट्रम १,७६,६४५ करोड गटक गइ. घोटालों का बाप योजना कार्यान्वन असफलता से अतिरिक्त खर्च १,१६,७२४ करोड की उचाईया छू रहा है और जवाब देही किसी की भी नहीं  ? खेल 

खेल में कल्माड़ी जी ७०० करोड के खेल को ७६ हजार करोड तक खेल गए . जांच जारि है मगर जनता को पूरा विश्वास है की आंच किसी पर नहीं अयेगी. आदर्श भ्रष्टाचार के प्रतीक अशोक चवन मुम्बई के सिंहासन से उतरे हैं तो दिल्ली के सिंहासन पर आरूढ़ हो जायेंगे. उनके अनुभव का फायदा अब केन्द्र सरकार उठाएगी .
जब तक कोइ नया घोटाला नहीं होता तब तक मिडिया इन् पुराने घोटालों पर लिपा पोती से अपनी टी. आर.पी  चमकायेगा और मिडिया के 'बिचौलिए' श्रीमान -सूश्रियाँ खाएंगी भी और बतियाएँगी  भी .. इसे कहते हैं बगुला भक्ति !!!!!!     

सोमवार, 15 नवंबर 2010

दोस्ती जब किसी से की जाए 
दुश्मनों की भी राय ली जाए
                       ............. उतिष्ठकौन्तेय

वहाँ 50 हज़ार बेरोज़गार,यहाँ 50 करोड़ निराहार ओबामा चिंताग्रस्त - मगर सिंह साहेब मस्त !!!



वहाँ 50 हज़ार बेरोज़गार,यहाँ 50 करोड़ निराहार
ओबामा चिंताग्रस्त - मगर सिंह साहेब मस्त !!!
एल. आर गान्धी

दुनिया के सबसे समृद्ध राष्ट्र का सबसे शक्ति सम्प्पन राष्ट्रपति दिवाली के अग्ले दिन जब इन्डिया की व्यापारिक राजधानी मुम्बई पहुँचे तो ' आम आदमी ' भी खास पशोपेश में पड गया कि भारत भी दुनिया की दूसरी बड़ी शक्ति के रुप में उभरते देशों की कतार में लग गया है. 'आम आदमी' और भी अचम्भित और हतप्रभ रह गया जब ओबामा ने अपनी भारत फेरी का मंतव्य व्यक्त करते हुए घोषणा की कि वे यहाँ मंदी के दौर से दो चार अमेरिकनों के लिए ५०,००० नौकरियां पैदा करने के उदेश्य से आए हैं. ओबामा अपने साथ अमेरिकन व्यवसाइयों की पूरी फौज ले कर आए थे ताकि भारतीय सरकार और बिग बिजनस हाउसिस से बात चीत कर अमेरिका के लिए इण्डिया में बिग बाज़ार की संभावनाओं को मूर्तरूप दिया जा सके.
बराक ओबामा को विश्व के सबसे अमीर अमेरिकनों की १०% बेरोज़गारी पर इतनी चिंता देख कर -अमेरिका के विश्व का सबसे बड़ा राष्ट्र होने का आधार समझ में आ गया. वह था वहां के राजनेताओं का अपने देश और जनता के प्रति इमानदार होना . उन्हें अपनी १०% बेरोजगार जनता की फ़िक्र है और हमारे नेताओं को देश की ५० करोड़ जनता जिसे दो जून की रोटी भी नहीं मुयस्सर,हर रोज़ १४,६०० बच्चे भूख से अकाल मृत्यु के आगोश में समा जाते हैं. १८.३ लाख बच्चे अपना ५व जन्म दिन नहीं मना पाते. विश्व के ९२.५ करोड़ भूख से बेहाल लोगों में भारत के ४५.६ करोड़ लोग हैं.
२००८ में आर्थिक संकट के बाद अंतर्राष्ट्रीय नेत्रित्व ने अमीरों और उद्योगपतियों को संकट से उबारने के लिए १० अरब डालर से अधिक राशी झोंक दी जबकि गरीबी मिटाने के लिए केवल एक अरब डालर
मुंबई में ओबामा ने ताज होटल में 'ठहर ' कर अपने मित्र पाक को एक सन्देश दिया कि वे इण्डिया के 'ताज में शहीद हुए ' हुए लोगों के साथ पूरी पूरी सहानुभूति व्यक्त करते है. मगर भारत में पाक प्रायोजित आतंक के चलते लाखों भारतीय और सुरक्षा कर्मी जो शहीद हुए उनसे उन्हें कोई सरोकार नहीं- पाक को आतक के खिलाफ लड़ाई में भी उन्होंने अपना 'साथी' घोषित कर दिया. जाहिर है ओबामा हो या बुश सभी अमेरिकियों को केवल और केवल अपने हित ही सर्वोपरि हैं.
मुंबई आगमन पर ओबामा के भारी भरकम जहाज़ को मेन रनवे के स्थान पर स्मालर रनवे पर उतरा गया ताकि वापसी उड़ान पर जहाज़ ऐअर पोर्ट की दिवार के साथ मीलों में फैली झुगी झोंपड- पट्टिओं के ऊपर से हो कर न गुज़रे, और भारत की दुर्दशा पर ओबामा की नज़र न पड़ जाए.इस के साथ् ही स्मलर रनवे के निकट हेलिकप्टर करियर सेवा उपलब्ध थी और ओबामा को मुम्बई भ्रमण के दौरान सडक मार्ग से दूर रखा जा सकता था- सडक मार्ग के दोनो ओर मुम्बई की बद्न्सीबी पसरी पडी है ऊंची अटालिकाओं के बीच जानवरों से भी बद्तर जीवन जी रहे झोपड पट्टि वासियों को देख दुनिया का सर्व सुख सम्म्प्पन 'महाराजा' क्या सोचता कि किन भिखारिओं से कुछ पाने की आस लगा बैठा.
वही मुंबई है जो देश को कुल इनकम टैक्स का ५०% देती है अर्थात यहाँ देश के 'धनकुबेर ' अपनी ऊंची ऊंची अत्ताल्लिकाओं में ऐश करते है. मुंबई की दूसरी सच्चाई यह भी है कि यहाँ की ६० % जनता झुग्गी झोपड़ियों में जानवरों से भी बदतर नारकीय जीवन जीने पर बाध्य है.
दिल्ली आगमन पर हमारे भारत भाग्य विधाताओं को ''अतिथि देवो भव् ' में मुम्बई जैसी दिक्कत नही आइ - क्योंकी कामन वेल्थ ने दिल्ली को पहले ही चका-चक किया हुआ था . खेलों से पहले करीब करीब ३ लाख झुगी वासी निर्वासित कर दिए गए थे और बाकि को बडे बडे साइन बोर्ड़ो के पीछे छुप दिया गया था. ६०००० भिखारिओं में से ५०००० को दिल्ली की गलियों से खदेड दिया गया था. दिल्ली को देख कर कोइ भी 'भारत' को दुनिया की उभर्ती महान्शक्ति का भ्रम आराम से पाल सकता है. इस लिए ओबामा को सडक मार्ग ही नहीं हुमयुं का मकबरा दिखा कर 'सच्चे लोक तन्त्र ' से भी रुबरू करवाया गया . ओबामा को इन्डिया की ऊंची- भव्य -विशाल और 'आदर्श भ्रष्ट तन्त्र की प्रतीक' अत्ताल्लिकाओं के दर्शन खूब करवाए गए मगर असली और बदनसीब भारत के पास भी फट्कने नहीं दिया.
वाह रे गालिब तेरी फाका मस्तियाँ
वो खाना सूखे टुकड भिगो कर शराब में

शनिवार, 30 अक्तूबर 2010

भारतीय लोकतंत्र अब ८७ वां आदर्श- भ्रष्ट तंत्र

भारतीय लोकतंत्र अब ८७ वां आदर्श- भ्रष्ट तंत्र
एल. आर. गाँधी

कलमाड़ी जी की असीम कृपा से - खेल खेल में कम से कम एक क्षेत्र में तो हमने अपने पडोसी चीन को पीछे छोड़ ही दिया- कठोर स्पर्धा के बाद 'भ्रष्टाचार की ऊंची कूद' में हमने यह सफलता अर्जित की. अब हम भ्रष्ट देशों की सूची में ८७ वी पायदान पर पहुँच गए हैं और हमारा प्रतिद्वान्धी चीन हमारे से ८ अंक पिछड़ कर ७९वे अंक पर लुढ़क गया . इस सफलता का एकांकी श्रेय हमारे खिलाडियों के खिलाडी कलमाड़ी जी को जाता है. विश्व के चोर-उच्चक्के देशों में देश का नाम रौशन करने के इस महान उपलब्धि के लिए कलमाड़ी जी को 'भारत रत्न' के साथ साथ आगामी ओलम्पिक खेलों का ठेका भी अभी से दे देना चाहिए ताकि शीघ्र से शीघ्र हम अपने चिर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान से आगे निकल सकें . कितनी शर्म की बात है कि हमारे से महज़ २४ घंटे पेहले पैदा हुआ दो कौड़ी का मुलुक भ्रष्टाचार के क्षेत्र में हम से मीलों आगे १४३ वे पायदान पर जा पहुंचा है. यह बात दीगर है कि पाकिस्तान को इस मुकाम तक पहुँचाने में अमेरिका से मिली भीख का बहुत बड़ा योग दान है. यदि हमें इतनी अमेरिकी मदद मिली होती तो हम आज अफगानिस्तान को प्राप्त श्रेष्ठ स्थान पर होते.
देश में भ्रष्टाचार एक रिले -रेस कि माफिक कभी न ख़त्म होने वाली दौड़ का रूप ले गया है. दिल्ली का खेल अभी ख़त्म नहीं हुआ कि 'रेस' देश कि आर्थिक राजधानी मुंबई में चालू हो गई. मुंबई में तो भ्रष्टाचार को 'आदर्श' सोसाईटी का नाम दिया गया और सीमां पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के नाम पर करोड़ों के फ़्लैट औने पौने दामों पर सफेदपोश नेता और उच्चाधिकारी हड़प गए. कल्मादिजी ने राहत की साँस ली -उनके पीछे पड़ा मिडिया अब 'आदर्श सोसाईटी' घोटाले पर पिल पड़ा है. मिडिया का भी इन घोटालों को उजागर कर और बीच में ही छोड़ नए घोटालों के पीछे पड़- इनके महत्त्व को न्गंन्य करने में विशेष योगदान रहा है. मिडिया भी व्यवसाए हो कर रह गया - सब कुछ महज़ टी.आर.पी की खातिर ?
१९९१ से २००९ के डेढ़ दशक में लगभग ७३ लाख करोड़ के बड़े घोटालों का अनुमान है. जिनमें स्विस बैंकों में देश का ७१ लाख करोड़ रूपया सबसे बड़ा घोटाला है. उसके बाद है २-जी स्पेक्ट्रम में ६० हजार करोड़ का घोटाला जिसे केंद्रीय मंत्री ए.राजा डी.एम्.के के दलित सांसद ने सरंजाम दिया. प्रधान मंत्री का इन्हें वरद हस्त प्राप्त है- हो भी क्यों न ...राजा की कृपा के बिना सरकार दो दिन की महमान है. सी. बी. आई को लगा रखा है केस को कछवा चाल पर लटकाए रखने को. यह बात अलग है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सी.बी.आई को लताड़ लगाई है- साल भर से केस लटकाने पर और राजा को अभी तक मंत्री पद पर बनाए रखने पर ! अब देखो क्या होगा तेरा 'राजा' ? तीसरा घोटाला है - ५० हजार करोड़ - कर चोरी का, पूने के अरब पति हसन अली खान के नाम !!! अब इस से कम तो हम घोटाले को घोटाला ही नहीं मानते
भ्रष्टाचार का वटवृक्ष आज ८७ मीटर ऊंचा बरगद सा फ़ैल गया है यह जितना ऊंचा है उतनी ही इसकी जडें पाताल तक फैली हैं. इस बरगद का बीजारोपण भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु जी के करकमलो से ही हुआ था. उनका राज परिवार तो बस इसे आँखें मूँद पानी दिए चला जा रहा है. नेरुजी ने ५ वर्षीया योजनाओं की नीव रखी -बिना सोचे समझे योजनाओं पर केंद्र से धन लुटाया गया - यह किसी ने नहीं देखा कि जिन लोगों के लाभार्थ ये योजनायें बनी गई हैं उन तक इसका लाभ पहुंचा भी है. नेहरु जी के राज पौत्र 'राजीव गाँधी' ने भी माना की इन योजनाओं का महज़ १०-१५ % ही आम आदमी तक पहुँच पाता है.बाकि पैसा तो रास्ते में भ्रष्ट तंत्र ही हड़प जाता है. ६० साल से यह योजना - बध लूट बदस्तूर जारी है.
देश के प्रथम बड़े घोटाले का श्रेय भी हमारे नेहरु जी को ही जाता है. १९४८ का जीप घोटाला जिसमें भारतीय सेनाओं के लिए ८० लाख रूपए की जीपें खरीदी जानी थी . ब्रिटेन में भारतीय हाई कमिश्नर वी. के. कृष्ण मेनन पर जीप सप्लाई में घोटाले का दोष लगा . मेनन साहेब नेहरु जी के खासमखास थे. सज़ा तो क्या मेनन को देश का रक्षा मंत्री पद से नवाज़ा गया. हमारी सेनाएं चीन के हाथो परस्त हुईं और हजारों मील भूमि पर दुश्मन का कब्ज़ा हो गया. जिन लोगों के हाथ में देश को इमानदार प्रजातंत्र के रूप में विकसित करने की जिमेदारी थी उन्होंने ही उनकी नाक के नीचे फलफूल रहे भ्रष्ट - तंत्र से आँखें मूँद लीं और आज हम विश्व के सबसे बड़े भ्रष्ट तंत्र की दौड़ में नई नई बुलंदिओं को छूते जा रहे हैं. वह दिन दूर नहीं जब हम अफगानिस्तान को पछाड़ कर भ्रष्ट राष्ट्र तालिका के शिखर पर होंगे.

गुरुवार, 14 अक्तूबर 2010

निर-आहार गरीब को ..विलक्षण पहचान अंक -आधार

निराहार गरीब को ...

विलक्षण पहचान अंक -आधार
एल.आर.गाँधी.

आखिर ढूंढ ही लिया राज वधु ने गरीबी उन्मूलन का आधार - अब कोई भी जालसाज़ अपनी पहचान छुपा कर गरीब का राशन नहीं हड़प पायेगा !
पहला विलक्षण पहचान अंक महाराष्ट्र के गाँव तेम्भ्ली की सौभाग्यवती रंजना सोनावाने के ६ वर्षीय पुत्र हितेश को सोनिया जी ने अपने कर कमलों से प्रदान किया . मनमोहन जी इस महान पर्व के गवाह थे. इस विलक्षण पहचान अंक को नाम दिया गया है 'आधार' . सौभाग्यवती रंजना सोनवाने 'आधार' का उपहार और वह भी 'राज वधु' के हाथों पा कर भी खुश नहीं . जब पत्रकारों ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में सोनवाने से पूछा 'यह सन्मान पा कर आपको कैसा लग रहा है. तो वह झल्ला कर बोली 'कैसा सन्मान ' हमारे पास खाने को तो कुछ है नहीं. मिटटी के चूल्हे में आग जलाते हुए वह बुदबुदा रही थी 'पिछले एक महीने से सरकारी अफसरों ने जीना मुहाल कर रखा है. हमें काम पर भी नहीं जाने दिया -हर रोज नया प्रमाण मांगते . हौसला नहीं जुटा पाई वरना सोनिया से पूछती - दे सकती हो तो हमें सन्मान जनक जिंदगी दे दो- हर दूसरी रात मेरे बच्चे भूख के कारन सो नहीं पाते ! १४०० की आबादी वाले इस गाँव में लोग समझ नहीं पाए कि 'आधार' से उनकी जिंदगी कैसे संवर जाएगी जबकि 'आहार ' दो जून की रोटी के लिए तो सभी वयस्कों को कटाई के मौसम में सौरास्टर पलायन करना पड़ता है. जलसे में सोनिया जी ने लोगों को समझाया कि इस पहचान कार्ड से उन्हें एक नई पहचान मिलेगी जिससे उनकी ज़िन्दगी संवर जाएगी मगर 'कैसे' यह कोई नहीं बता पाया.
६ वर्षीय हितेश के हाथ में 'कार्ड' थमा कर सोनिया जी ने मानो पूरे देश को सन्देश दे डाला 'कि अब कोई बच्चा भूखा नहीं सोएगा' ! सन्देश भी दिया उस देश को जहाँ 'कुपोषित बच्चों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है. यू.एन.के अनुसार भारत में ५ वर्ष से कम आयु के २.१ मिलियन बच्चे प्रति वर्ष अकाल मृत्यु के आगोश में समा जाते है. ऐसे कुपोषित बच्चों की संख्या चीन में ७% है, सब सहारा अफ्रीका में २८ % और भारत में ४३% . प्रति दिन १००० बच्चे तो उलटी-दस्त का शिकार हो जाते हैं. यह बात अलग है कि देश की सेकुलर छवि बरकरार रखने की खातिर या फिर वोट की खातिर हमारी सेकुलर सरकार हर साल 'हज यात्रियों ' को ही ८२६ करोड़ की सब्सिडी दे देती है.
रही बात हमारे 'आट्टा मंत्री' श्री श्री शरद पंवार जी के प्रदेश महाराष्ट्र की - विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो प्रदेश में कुपोषित बच्चों की संख्या ३.१५ लाख है. मुंबई में तो यह संख्या ६० गुना बढ़ गई- मई में ३९७ थी और जुलाई में २४२५१ हो गई , क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुपोषण के नए मापदंड निर्धारित कर दिए हैं .
एक ओर हम कामन वेल्थ खेलों के सफल आयोजन पर इतरा रहे हैं .कलमाड़ी जी तो खेलों पर एक लाख करोड़ खर्च कर अभी से 'ओलम्पिक' की तैयारी में लग गए हैं. विदेशी विनियोग का आंकड़ा एक लाख करोड़ होने पर बंगाली बाबू फूले नहीं समा रहे. ऐसे में भारत को विश्व के ८४ 'भूखे -नंगे' देशों में ६७ वी पायदान पर खड़ा देख कर कामन वेल्थ के सोने -चाँदी- कांस्य के मैडल और विदेशी विनियोग के ऊँचे ऊँचे दावे 'टाट में पैबंद' की मानिद दिखाई देते हैं.

शनिवार, 9 अक्तूबर 2010

आरामदेह जीवन-मृत्यु




आरामदेह जीवन-मृत्यु दिवस.

एल.आर.गाँधी.

९ अक्तूबर , आज विश्व रुग्नाश्र्य व् आरामदेह मृत्यु दिवस है. दुखी- रोग पीड़ित मानवता को सहज व् आरामदेह जीवन देने के प्रयासों को नई दिशा देने पर विचार करने के
लिए वर्ल्ड वाईड पालिएटिव केअर एलायंस द्वारा इस कार्य के लिए यह दिन चुना
गया है. विश्व में १०० मिलियन रोगियों को पेलीएटिव केयर की दरकार है मगर
हम यह सुविधा मात्र ८ % तक ही पहुँचाने में सक्षम हो पाए हैं . गंभीर रोगों
से पीड़ित ,निराश्रय व् निर्धन एकांकी लोगों के जीवन को सहज व् आरामदेह
बनाने के लिए पूरे समाज व् राजतंत्र के सहयोग की आवश्यकता है. इस कार्य के
लिए ८० देशों में उक्त संस्था द्वारा १००० के करीब जागरूकता समारोह आयोजित
किये जा रहे हैं.
जहाँ आरामदेह जीवन कि सुविधा नहीं, वहां सहज मृत्यु की आशा कैसे की जा
सकती है. सहज व् आरामदेह जीवन-मृत्यु का मूलाधार समाजिक सम्पन्नता है.जिस
देश की आधी से अधिक जनता को दो जून की रोटी के लाले पड़े हों वहां पर यह
सुविधा बेमानी सी लगती है. बेशक हमारे संविधान में सम्मानजनक मृत्यु
प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है फिर भी मृत्यु की गुणवत्ता में हमारा
विश्व में ४० वां स्थान है.हम युगांडा जैसे देश से भी पीछे हैं जिसका जी डी
पी में ९० वां स्थान है जबकि भारत का ४था . जो देश अपने नागरिकों के लिए
स्वस्थ सेवाओं पर मात्र १% खर्च करता हो उससे कोई अपेक्षा भी कैसे की जा
सकती है. आज हमारे ६५ से ऊपर के वृष्ट नागरिको कि संख्या ५ वर्ष से कम
जनसँख्या से अधिक हो गई है और २०३० आते आते यह एक बिलियन का आंकड़ा पार कर
जाएगी. विश्व के १/८ बड़े बूढों के लिए स्वस्थ्य सुविधाओं के साथ साथ
आरामदेह जीवन -सहज मृत्यु का प्रबंध करना हमारा सामाजिक व् मानवीय दायित्व
बनता है.
जनसँख्या नियंत्रण, गरीबी उन्मूलन, स्वस्थ्य सुविधाएं , वृधाश्रम जैसी
जनकल्याण योजनाओं से पीठ मोड़े हमारे भ्रष्ट लोकतंत्र के राजनेता किसी
न्रंकुश रजवाड़ों से कम नहीं दिखाई पड़ते. बहुत जल्द ही ये अपने आप को
विश्व की दूसरी महान्शक्ति कहलाने की फिराक में बड़े बड़े खेल-तमाशे कर
हवा में खुद भी उड़ रहे हैं और गरीब जनता की खून पसीने की कमाई को भी उड़ा
रहे हैं.
खाद्य सुरक्षा कानून जैसी बड़ी बड़ी डींगे हांकने वाली सरकार देश के
किसानों द्वारा अपने खून पसीने से पैदा की गई 'बम्पर' पैदावार को तो संभाल
नहीं पाती .डाक्टर एम्.एस स्वामीनाथन -' यह शर्मनाक है. यदि यह सरकार जरूरत
मंद भूखी जनता के लिए अपने खाद्यान को तो बचा नहीं पाती तो यह किस मूंह से
खाद्य सुरक्षा क़ानून लागु करने की बात कर सकती है. जो गरीब को रोटी का
निवाला तक नहीं दे सकते वे रोगी को दवा क्या देंगे ?

बुधवार, 6 अक्तूबर 2010

अब गरीबी छुपाओ ..कलमाड़ी का कमाल



अब 'गरीबी छुपाओ'
कलमाड़ी का कमाल ...
एल. आर. गाँधी.
कलमाड़ी का कमाल ; जी हाँ इसे हम कलमाड़ी जी का कमाल ही कहेंगे ! जिस दक्ष प्रशन का उत्तर पिछले ४० साल से 'राज परिवार ' नहीं ढूंढ पाया ,कलमाड़ी ने पलक झपकते
ही 'प्राब्लम साल्व' कर डाली !
दक्ष प्रशन था - कामन वेल्थ खेलों में विदेशी महमानों से 'दिल्ली की
बदनसीबी -झुग्गी झोपड़ बस्तियों ' को कैसे छुपाया जाए ? सोनिया जी से ले
कर शीला जी तक सभी हैरान परेशान थे ! शीला जी ने पहले तो अपनी खाकी वर्दी
का खौफ अजमाया और खेल मार्ग पर रहने वाले 'गरीब -गुरबों ' को पुलसिया
अंदाज़ में समझाया कि भई दिल्ली कि इज़त का सवाल है ,कम से कम ३ से १४
अक्तूबर तक कहीं चले जाओ और अपनी यह मनहूस शक्ल किसी विदेश मेहमान को मत
दिखाना . बहुत से बेचारे अपनी सारी जमा पूँजी समेट कर 'ममता की रेक का टिकट
कटा भाग खड़े हुए ! मगर जितने भागे थे उससे भी कई गुना ज्यादा 'यमुना की
मार ' से तरबतर और आ गए. शीला जी हैरान परेशान -सभी हथकंडे आजमाए 'मर्ज़
बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की' . अब आधी दिल्ली तो झोपड़ पट्टिओं में पसरी
है ... इतने जन सैलाब को कोई कैसे भगाए ?
थक हार कर शीला जी 'अनुभवी और समझदार' कलमाड़ी जी की शरण में पहुंची . दक्ष
प्रश्न का हल पूछा ! कलमाड़ी जी ने अपनी अनुभवी दाढ़ी के काले-सफ़ेद बालों
में हाथ कंघी की और मुस्करा कर बोले . यह भी कोई समस्या है ? हमने इतने
बड़े खेल में किसी को कुछ पता नहीं चलने दिया . सात सौ करोड़ का खेल सत्तर
हज़ार तक पहुंचा दिया और किसी को भनक तक नहीं लगी. कलमाड़ी जी ने अपना बीजिंग
अनुभव सुनाया ! हवाई अड्डे से हम ओलम्पिक गाँव जा रहे थे तो रास्ते में
सड़क के दोनों ओर 'होर्डिंग्ज़ ही होर्डिंग्ज़ ' देख हमारा माथा ठनका ! हमने
अपनी गाडी रुकवाई तो 'मेज़बान मैडम' ने पूछा क्या हुआ कलमाड़ी जी . हमने
गाडी से उतरते उतरते बाएँ हाथ की तर्जनी उठाई और बोले ''सु-सु" और पलक
झपकते ही पहुँच गए होर्डिंग की ओट में. चमचमाते होर्डिंग्स के पीछे देखा
तो 'बीजिंग की बदनसीब झोपड़ पट्टी' अन्धकार में डूबी थी. कलमाड़ी जी का
अनुभव इस आड़े वक्त में काम आया.
बस फिर क्या था ' बाई ऐअर ' मिजोरम से बांबू' मंगवाए गए और कारीगिर भी. और
दिल्ली की मनहूसियत को 'बाम्बू होर्डिंग्स' के पीछे छुपा दिया गया. शीला जी
भी कलमाड़ी जी का लोहा मान गईं. अरे भई हम पिछले ४० साल से गरीबी मिटाने के
'भागीरथ ' कार्य में लगे हैं. पहले इंदिरा जी ने गरीबी हटाने का अहद किया
. गरीबी तो नहीं हटी मगर महंगाई डायन न मालूम कहाँ से आ टपकी. फिर राजीव
जी ने सोचा हटाने से तो यह फिर फिर आ जाती है . इस लिए गरीबी मिटाने की कसम
खाई. इस बार गरीबी के साथ उसका सौतेला भाई 'भ्रष्टाचार ' आ खड़ा हुआ . फिर
अब राज परिवार की बहु रानी ने मनमोहन जी के साथ सीरियस डिस्कशन के बाद
डिसाईड किया कि 'गरीबी को भगा' दिया जाए ! गरीबी तो नहीं भगा पाए- पर अपनी
गरीबी दूर कर 'चाचा कत्रोची ' को जरूर भगा दिया. चलो आधी अधूरी ही सही
'गरीबी भगाने ' की मुहीम में सफलता तो हाथ लगी. अब परिवार के राज कुमार जब
यू पी. के दलितों की झोंपड़ियों में जा कर इक्कीसवीं सदी का 'गाँधी' बनने
के जुगाड़ में लगे हैं - गरीबी छुपाने और देश को विश्व की दूसरी सबसे बड़ी
शक्ति दिखाने के 'पारिवारिक आन्दोलन' में कलमाड़ी जी के योगदान को स्वर्ण
अक्षरों में लिखा जायेगा. अंग्रेजी में कहावत भी है ' आउट आफ साईट इस आउट

शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

गोडसे हाज़िर हो.. खामोश आदालत जारी है...

शिमला का एतिहासिक पीटरहोफ होटल जहाँ
गाँधी जी के हत्यारे 'गोडसे' पर मुकदमा चला.......
खामोश अदालत जारी है ..गोडसे हाज़िर हो......
एल.आर.गाँधी.

मोहन दास करम चाँद गाँधी उर्फ़ महात्मा गाँधी बनाम राम चंदर उर्फ़ नाथू राम गोडसे वल्द विनायक वामनराव गोडसे .....हाज़िर हो.......
जी हाँ ..फिर से अदालत लगेगी ..और लगेगी भी वहीँ ..जहाँ पहले लगी थी. स्थान है शिमला का पीटर हाफ होटल . दरअसल पीटर हाफ में हिमाचल सरकार एक म्यूजियम बनाने जा रही है. आजादी के बाद १९४७ से १९५५ तक पीटर हाफ पंजाब सरकार का हाई कोर्ट रहा जहाँ गाँधी जी के कातिल गोडसे पर २७ मई १९४८ से मुक़दमा चला, नवम्बर १९४९ को उसे सजाए- मौत का फरमान सुनाया गया और १५ नवम्बर १९४९ को अम्बाला जेल में फंदे पर झुला दिया गया.
पर्यटक निगम के निदेशक सुभाष पंडा कि माने तो म्यूजियम में गोडसे के मुकदमे से सम्बंधित वस्तुओं व् सबूतों को प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि लोगों को मुकदमे कि सचाई से रु--रु करवाया जा सके.
अबकी सुनवाई में आम ख़ास सभी शिरकत के पूरे हकदार होंगे. छूट गए कानूनी पहलुओं पर फिर से सेकुलर तौर तरीकों से गौर किया जाएगा .गोडसे फिर से बतलायेंगे, पर.... अबकी बार..., एक अदद वकील कि मार्फ़त.. कि उसने 'महात्मा' को क्यों मारा.! कैसे पाकिस्तानियों के हाथों उनके भाई बंधू मारे गए, कैसे उनकी बहु बेटीओं कि इज्ज़त लूटी गई. एक दो नहीं , लाख बेगुनाह मारे गए ५० लाख बेघर हो गए.कैसे जिन्ना की जिद के आगे बापू बेबस हो गए और अपनी कसम ' पाक मेरी लाश पे बनेगा...भुला दी.और कैसे खुद को दुनियां का सब से महां - सेकुलर सिद्ध करने के लिए फिर से 'अनशन ' के कोप भवन में जा बैठे ! नेहरु-पटेल के उस निर्णय के विरोध में जो उन्होंने कबिनेट में लिया था -पाक को ५५ करोड़रुपये देने का.
पाक ने कश्मीर का बहुत बड़ा भूभाग हथिया लिया कबाईलियों के वेश में फौजी हमला कर ! हमारी सेनाएं अपना क्षेत्र खाली करवा रहीं थी कि नेहरु ने इकतरफा युद्ध विराम कर कश्मीर मसला यू.एन.ओ के पाले में डाल दिया. १३ जनवरी को पटेल की पहल पर केबिनेट ने फैसला किया कि पाक की ५५ करोड़ की देनदारी रोक ली जाये तांकि उसे कश्मीर से हट जाने को मजबूर किया जा सके. मगर गाँधी जी के 'अनशन' धमकी के आगे केबिनेट बेबस हो गई और फैसला उसी दिन वापिस ले लिया. पाक से उज़ड़ कर आए हिन्दू शर्णार्थियो में गाँधी जी के इस पाक प्रेम पर भारी क्षोभ के साथ साथ असहनीय आक्रोश भी था जिसकी अभिव्यक्ति गोडसे के १४ जनवरी को छपे 'मक्र्सक्रांति' सम्पादकीय में साफ़ झलकती है. १३ जनवरी को ही ३० जनवरी का इतिहास 'गोडसे' के मर्माहत वक्षस्थल पर लिखा गया था. ५५ करोड़ कोई मामूली राशी न थी और( आज यह राशि १२५०० करोड़ होती). भारत का रक्षा बज़ट मात्र ९३ करोड़ था . इन्ही तथ्यों को गोडसे ने अपनी पैरवी में पेश किया.
कहते हैं ! जब गोडसे ने अपनी पैरवी खुद करते हुए ,तफसील से उन तथ्यों को बयां किया जिन्होंने उसे 'महात्मा' का मर्डर करने को मजबूर किया, तब पीटर हाफ के कोर्ट रूम में बैठे वे चुनिन्दा लोग सुबक रहे थे..सभी के हाथ में रुमाल थे और अपने आंसू पोंछ रहे थे.बकौल जज साहेब 'मैं अपनी कानूनी बंदिशों से मजबूर था ..यदि मौजूदा दर्शकों पर फैंसला छोड़ दिया जाता ..तो गोडसे 'बरी' हो जाता.
यह भी कोई बात हुई बिना 'अब्बास काज़मी' के जिरह, बहस, महज़ एक साल पांच महीने और १३ दिन में केस निपटा डाला और फैसला भी सुना दिया. और तो और हफ्ते भर में फांसी पर भी लटका दिया. दरअसल सेकुलर सरकार अभी नई नई और ना समझ थी......वाकील मुहय्या ही नहीं करवाया और अपनी पारी से पहले ही लटका दिया सूली पर.समझदार सेकुलर सरकार तो अब है...अफज़ल मिआं बैठे हैं लाइन में..सलीके से जब बारी आयेगी लटका देंगे !!!!!

शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

शीलाजी के कुत्ते- कलमाड़ी का खेल -और बुरा मान गए फेनेल

शीलाजी के कुत्ते ने बिगाड़ा कलमाड़ी का खेल..
एल.आर.गाँधी.

खिलाडी तो अभी पहुंचे भी न थे - कलमाड़ी जी के खेल गाँव में कि शीलाजी के कुत्ते खेल भी गए. यह देख कर फेनेल साहेब बुरा मान गए और पूरे के पूरे खेल गाँव को गन्दा और वास-अयोग्य करार दे दिया. शहरी आवास मंत्री जैपाल रेड्डी जी ने लाख तर्क दिए कि यह कोई ख़ास बात नहीं. कामन वेल्थ के अधिकारिओं ने तो यहाँ तक कह डाला कि हमारे और उनके सफाई मापदंडों में जमीन असमान का फर्क है. अब हम तो इस बफादार जीव का मुंह चूम लेते हैं -यकीं नहीं तो देवदास में 'दलीप' को दिखा दें . यह तो एक शीला जी का 'सरकारी पालतू' यूँही अपने ही गाँव में सरे राह चलते चलते खिलाडिओं के कमरे में दाखिल हो गया और कलमाड़ी जी के कीमती-मुलायम-आरामदेह-सफेदपोश गद्दों को देख बस जी मचल गया और विदेशी महमान से पहले जांच बैठा कि ' आल इज वैल' . उसे क्या मालूम था कि मुई बरसात का कीचड उसके पैरों में लगा है और पैरों के निशान छप गए गद्दे पर. अब मेहमान की शिकायत पर 'कबिनेट' बैठी और दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट तलब हुई तो दोषी निकला एम् सी डी का कोई 'भूरू' . बस फिर क्या था खेलगांव के सभी ' कालू-भूरू' उठा लिए गए - ५० में से अब एक 'भूरू' के पद चिन्हों के निशाँ की पहचान की जा रही है - दोषी के स्केच भी कल्माडी जी के कलाकारों को बनाने के कांट्रेक्ट जारी हो गए हैं.आशा है खेल ख़त्म होने से पहले 'दोषी पहचान लिया जाएगा बाकी ' ला विल टेक इट्ज़ ऑन कोर्स ' .
'भूरू' काण्ड ने जामा मस्जिद फाईरिंग और दो विदेशिओं के घावो पर से मिडिया का ध्यान हटा दिया और यहाँ तक कि 'कोर्ट का फैसला' भी मिडिया में 'भूरू ' टी आर पी से पिछड़ गया. अब हर टी वी चैनल ने 'भूरू' की तलाश में अपने 'खोजी पत्रकार' दौड़ा दिए हैं -इसके लिए श्वान-घ्राण-शक्ति से लबरेज़ 'वाच-डाग' लगाए गए हैं भई देश के साथ साथ 'शीलाजी' की नाक का भी सवाल जो ठेहरा !अभी वास्तविक महां खेले में तो नौं दिन बाकी हैं और शीला जी की दिल्ली में ऐसे ४ लाख 'कालू-भूरू' बेखौफ दुम उठाए दनदना रहे हैं और उन सब पर 'मेनका जी' का वरद-हस्त सन १९९३ से विद्दमान है. जानवरों पर अत्याचार रोको क़ानून का संरक्षण इन्हें प्राप्त है. कुतों को अब कुत्ते की मौत कोई नहीं मार सकता -हाँ परिवार निओजन नसबंदी से इनकी जनसँख्या पर अंकुश जरूर लगाया जा सकता है. एम् सी डी ने इन्हें मारना तो तुरंत बंद कर दिया पर नसबंदी भूल गई . अब हम दो हमारे छै के हिसाब से बढ़ने वाले इस श्वान समाज में प्रति वर्ष १०००० हजार नए महमान आ जुड़ते हैं. एम् सी डी प्रति वर्ष मात्र ६००० नसबंदी कर पाती है और रेबीज़ रोधक टीकों की कोई कारगर योजना नहीं . एक अनुमान है कि हर साल ३५००० दिल्ली वासी इनका शिकार होते हैं और २-३ दर्जन लोग रेबीज़ की मौत मारे जाते हैं. मेनका जी के क़ानून में पागल कुत्ते को सहज मृत्यु का प्रावधान तो है मगर आज़ाद मियां के क़ानून में रेबीज़ ग्रस्त इंसान के लिए यह सहज मृत्यु नदारद है.
आगामी ९ दिनों में या खेलों के दौरान इन शीला जी के 'सरकारी पालतुओं' में से कोई 'फेंनेल' के खिलाडिओं के साथ खेल गया तो....... और हाँ हमारे पलनिअप्पन चिदम्बरम जी के सुरक्षा घेरे में ये घर के भेदी शीलाजी के बफादार बिलकुल नहीं आते.

बुधवार, 22 सितंबर 2010

म्वालिओं की ज़न्नत कराची

म्वालिओं की ज़न्नत-कराची
एल .आर .गाँधी

पाक का सबसे बड़ा शहर कराची बेशक दुनिया में इस्लाम को मानने वालों का सबसे विशाल नगर है मगर भाई लोगों ने अपने माफिया का ऐसा जाल बुना है कि लोग अब इसे 'म्वालिओं की ज़न्नत' बुलाने लगे हैं. लगभग १८ मिलियन अल्लाह के बन्दों ने इस शहर को विश्व के सबसे बड़े नगरों में शुमार तो कर दिया किन्तु नागरिक सुविधाओं का जहाँ तक सवाल है लोग-बाग़ ' भाई लोगों ' के रहमोकरम पर जीते हैं.७१२ ऐ . डी . में सबसे पहले मुहम्मद बिन कासिम ने यहीं से इस्लाम का कारवाँ आगे बढ़ाया था. पाक के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना का यह पसंदीदा शहर था - जिन्ना यहीं पैदा हुए और स्पुर्दे ख़ाक भी. कराची को इसी लिए 'सिटी आफ कायद भी कहा जाता है. पाक इसे व्यापार के केंद्र मुंबई के समकक्ष मानता है. एन.जी.ओ.स्वयंसेवक रोनाल्ड डिसूज़ा की माने तो कराची पर लैंड माफिया का प्रभुत्व है. लैंड माफिया सभी नियमों को ताक़ पर रख कर जहाँ जी चाहे बड़े बड़े माल खड़े कर लेता है. शहर के लोग पानी के लिए भी इन म्वालिओं का मुंह ताकते हैं. टैंकर माफिया टैंकरों से महंगे दाम पानी की सप्लाई करता है और नकली किल्लत खड़ी करने के लिए ये लोग शहर की पाईप लाईन ही काट देते हैं. ऐसे ही परिवहन की सुविधा भी इन भाई लोगों के हाथ में है. खटारा मिनी बसों में लोगों को भेड बक्रिओं की माफिक भर कर ढ़ोया जाता है और इनके मालिक हैं मुख्यत पुलिस वाले. हर काम में पुलिस की सेवाएं 'हर समस्या का हल है' क्योंकि कराची पर पुलिस राज है. फिर भी सब ठीक ठाक चल रहा है क्योंकि 'पैसे से' सब काम आसानी से हो जाता है.

रविवार, 19 सितंबर 2010

आतंक के सेकुलर रंग .......

सेकुलर आतंक के रंग
एल.आर.गाँधी

आजाद भारत के लिए जब राष्ट्र ध्वज में तीन रंगों का चयन किया गया तो भगवा रंग को शीर्ष पर और मध्य में श्वेत और फिर हरा अर्थात हरा-भरा धरातल को मान्यता मिली. . डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने राष्ट्रध्वज के तीनो रंगों और अशोक चक्र की प्रतीकात्मक व्याख्या की है . महामहिम विश्व के प्रख्यात दार्शनिकों में से एक थे . उन्होंने राष्ट्रध्वज के 'भगवा' रंग को भारतीय संस्कृति में सदियों से रचे बसे आत्मत्याग और वैराग्य का प्रतीक मानते हुए ,हमारे राजनेताओं से भौतिक लाभ का लोभ त्याग कर पूरी निष्ठां और वैराग्य से देश की सेवा करने की आशा जताई . इसी प्रकार श्वेत रंग को सच्चाई और हरे रंग को हरियाली का प्रतीक माना और आशा व्यक्त की कि देश के नेता अपने आचरण में श्वेत रंग सी पारदर्शिता और सच्चाई आत्मसात कर लोक भलाई के लिए भारत भूमि को उपजाऊ बना कर प्रगति का बीजारोपण करेंगे . अशोक चक्र को उन्होंने क़ानून का राज्य और निरंतर प्रगति का प्रतीक माना.
राष्ट्र ध्वज में निहित तीनो रंगों की भावना को हमारे 'सेकुलर राजनेताओं ' ने पिछले छै दशकों में किस कदर साम्प्रदायिक जामा पहना दिया कि तिरंगे की राष्ट्रीय अवधारणा ही ओछी राजनीति के छल प्रपंचों में कहीं तिरोहित सी हो गई. हमारे ग्रहमंत्री श्री श्री पल्निअप्पम चिदंबरम जी को तो अनायास ही भगवे रंग में 'आतंक' लगा दिखाई देने और झट से छोड़ दिया 'भगवे आतंक' का एक नया शगूफा. आतंकी गतिविधियों में निरंतर अल्पसंख्यक मुस्लिम वर्ग की संलिप्तता और विश्व पटल पर 'जेहादी' आतंकियों की कारगुज़ारिओं से सेकुलर सरकार कि स्थिति सांप के मुंह में कोहड़किरली की सी हो गई.ग्रह मंत्री जी ने आने वाले बिहार-बंगाल के चुनावों में कांग्रेस की नैया पार लगाने और अल्पसंख्यक वोट बैंक को भुनाने के जुगाड़ में 'भगवे रंग को ही साम्प्रदायिक रंग में रंग कर एक नए आतंक का जिन्न ला खड़ा किया ताकि देश का अल्पसंख्यक इस भगवे आतंक से खौफज़दा हो कर 'कांग्रेस के राजकुमार' के पीछे हो लें.
भगवा रंग वैदिक काल से भारतियों का परम पूजनीय प्रतीक रहा है - अन्याय के विरुद्ध लड़ने को तत्पर आर्य लोग भगवा ध्वज और केसरी परिधान धारण कर युद्ध भूमि में राक्षसों पर टूट पड़ते थे. हिन्दू समाज में जीवन के अंतिम प्रहर में जब मनुष्य मोह माया का त्याग कर संन्यास आश्रम में प्रवेश करता है तो 'भगवे वस्त्र' इस नश्वर संसार से विरक्ति के शाश्वत प्रमाण बन जाते हैं . किसी एक आध अधर्मी के कुकर्मो की आड़ में
भगवे रंग को ही 'आतंक' का पर्याय घोषत करना, क्या कुष्ठ-मानसिकता की अभिव्यक्ति नहीं है. रावन ने भी सीता हरण भगवा वेश में ही किया था. क्या भारतवंशियों ने भगवे को राक्षक-रूप दे दिया था.
अब शान्ति और पारदर्शिता के प्रतीक श्वेत रंग को ही लें .गत छै दशकों में हमारे इन सफेद पोश सेकुलर शैतान काली भेड़ों ने इस श्वेत परिधान की आड़ में इस देश को किस कदर लूटा, किस कदर गरीब जनता का लहू पिया ,किस कदर देश को विभिन्न सम्प्रदायों ,जातियों, वर्गों में बाँट कर अपना उल्लू सीधा किया -यह किससे छिपा है. क्या इन सफ़ेद पोश लुटेरों की काली करतूतों से शांति का प्रतीक 'श्वेत' रंग बदरंग कहलायेगा.
कल को हरियाली, प्रगति और प्रकृति के प्रतीक हरे रंग को कोई पागल 'जेहाद' से जोड़ कर ज़ुल्मो सितम का प्रतीक बना दे तो क्या भारत वर्ष की वसुंधरा 'हरित क्रांति' से अपने जन जन की भूख मिटाने का संकल्प त्याग देगी.

गुरुवार, 16 सितंबर 2010

कश्मीर का नासूर- बिरियानी उपचार

कश्मीर का नासूर - बिरियानी उपचार ?
एल.आर.गाँधी

पिछले छै दशक में चाचा नेहरु का दिया नासूर ' कश्मीर' -कैंसर बन चूका है.होमिओपेथी की मीठी गोलिओं से उपचार बदस्तूर जारी है. नेहरूजी के मीठे मीठे वादे, धारा ३७० ,शेख अब्दुला-सदर-ए-रियासत ,१% आबादी पर केंद्र का ११% अनुदान, ९४००० करोड़ की पैकेज-बिरियानी, मुस्लिम मुख्यमंत्री ,केंद्र में दो-दो मुस्लिम मंत्री कश्मीर से ....मर्ज़ बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की ! नतीजा -साढे चार लाख कश्मीरी पंडित भगा दिए, १०००० हिन्दुओं का क़त्ल, १०७ मंदिर तो डाले , राष्ट्र के विरुद्ध जेहाद, राष्ट्र ध्वज का अपमान ,लाल चौक पर पाक परचम ,सैनिको पर हमले ,सरकारी इमारतें आग के हवाले,पाक के हक़ में और भारत के विरुद्ध नारेबाजी, फिर भी सेकुलर सी सी एस अफ्स्पा हटाने की तैयारी में ? उन्हें आज़ादी- निज़ामे- मुस्तफा - की है दरकार और आप बिरियानी खिला रहे हो यार !

शनिवार, 11 सितंबर 2010

क्या ९/११ त्रासदी ज़ेहादिओं की एक शैतान को सलामी थी.

एक सेकुलर शैतान को श्रधांजलि थी- क्या ९/११ की त्रासदी ?
एल.आर .गाँधी

जेहादिओं ने ९/११ का ही दिन क्यों चुना अमेरीका के वर्चस्व प्रतीक वर्ल्ड ट्रेड सेंटर्स पर आतंकी हमले के लिए. इस्लामिक जेहादीओं के लिए इस दिन का अपना एक महत्व है . यह वही दिन था जब पाकिस्तान के संस्थापक मुहमद अली जिन्ना का इन्तेकाल हुआ था. जिन्ना का मानना था कि पश्चिमी लोकतंत्र प्रणाली मुसलामानों के हित में नहीं ! गांधीजी जिन्ना को बड़े प्यार से कायद-ए-आज़म बुलाते थे क्योंकि उनमें गज़ब की तर्कशक्ति थी. ११ अगस्त १९४७ के संविधानसभा के भाषण के आधार पर कुछ लोग आज भी जिन्ना को सेकुलर माने बैठे हैं. जिन्ना के जीवन का केवल और केवल एक ही उद्देश्य था और वह था मुसलमानों के लिए अलग देश और अपने जीवन काल में उस इस्लामिक लोकतंत्र का सदर बनना . अपने इसी उद्देश्य की पूर्ती के लिए जिन्ना ने भारत के टुकड़े ही नहीं किये बल्कि लाखों लोगों को मौत के घाट उतारने में भी कोई गुरेज़ नहीं किया -लाखों लोग घर से बेघर हुए सो अलग. जिन्ना से जब पूछा गया कि इतने नरसंहार से क्या हासिल तो उन्होंने सारा दोष सेनाओं पर मढ़ दिया और साथ ही तर्क दिया ' हमारा धर्म हमें सिखाता है कि हमें मौत के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए... एक धार्मिक कारन के लिए शहीद की मौत से अधिक बेहतर एक मुस्लमान के लिए कुछ नहीं है.
पाक के लोगों ने इस सेकुलर शैतान- पाखंडी को अपना भाग्यविधाता मान लिया जिसने अपने जीवन में कभी भी सच्चे मुसलमान की किसी भी रिवायत का पालन नहीं किया. कभी नमाज नहीं अत्ता की और न ही कभी रोज़े रखे. रमजान के पवित्र माह में नई दिल्ली विधान सभा के बाहर आते सिगरेट पी रहे थे, किसी ने टोका तो जवाब था मैं पाखंडी नहीं हूँ. मुसलमान होते हुए भी सूअर का मांस बड़े शौक से खाते थे. अंग्रेजी लिबास और अंग्रेजी शराब के तो वे बेहद रसिया थे. पाक का अनपढ़ अवाम इस फ्र्राटे दार अंग्रेजी बोलने वाले वाले 'वकील' पर फ़िदा था और उन्होंने अपना भविष्य आँखे मूँद कर इसके हवाले कर दिया था. जिन्ना तो विदा हो गए और अवाम आज भी आँखे मूंदे क़यामत का इंतज़ार कर रहा है. एक असफल राष्ट्र और आतंकिओं की पनाहगाह पाक- गाँधी के कायदे आज़म जिन्ना की ही देन है.
जिन्ना के अंतिम संस्कार पर मौलाना उस्मानी पाक के लोगों को यह याद करवाना नहीं भूले कि 'औरंगजेब के बाद वे सबसे महान मुस्लमान थे. अपनी महत्वकांक्षा की पूर्ती के लिए जिन्ना ने मुस्लिम भारत आन्दोलन के बीज बोए . धार्मिक कट्टरवाद ने पाकिस्तान को एक असहिष्णु देश में बदल दिया , जिसकी कि बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी पाक में रह रहे अल्पसंख्यकों को. बंटवारे के बाद पाक में २२% अल्पसंख्यक जिनमें मुख्यत हिन्दू थे ,रह गए . आज मात्र २% ही बचे हैं. बाकी सब मज़हबी उन्माद की भेंट चढ़ गए- जेहादियों ने इन्हें मार दिया या भगा दिया और जो बच गए उन्हें धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल लेने पर बख्श दिया गया. जिन्ना द्वारा नफरत का बोया बीज -मौलवियों द्वारा निरंतर कट्टरपंथी खाद से सींचा गया और आज विशाल बबूल का पेड़ बन गया है. जेहादी आतंक से आज इतने लोग इराक और अफगानिस्तान में भी नहीं मारे जाते जितने कि पाक में. पाक के २०% सुन्नी देओबंदी और बहावी बाकी के मुसलमानों को 'काफ़िर' मानते हैं . ६०% सुन्नी बरेलवी और १५% शिया जो दरगाहों पर सजदा करते है और अल्लाह कि इबादत संगीत,कलाम और रक्स से करते हैं .क्योंकि कुरआन में संगीत हराम है इस लिए काफिरों कि श्रेणी में आते हैं. .रहे बाकी के बेचारे क्रिश्चन, इस्मईली, हिन्दू, सिख, पारसी, अहमदी ५% ,वे तो काफिर हैं ही. इस प्रकार जिन्ना के पवित्र पाक में ८०% काफ़िर हैं जिन्हें मौत के घाट उतारना सच्चे मुस्लमान मोमिन का ईमान है.
पाक के कट्टर पंथी आतंकिओं को पहले अमेरिका ने अफगानिस्तान में रूस के विरुद्ध इस्तेमाल किया और धीरे धीरे
पाक के इस असहनशीलता के तर्क ने पूरे विश्व को अपने आगोश में ले लिया.ओसामाबिन लादेन ने इस्लामिक 'उम्माह' के नाम पर जेहाद को अमेरिका की ओर मोड़ दिया. सच्चाई तो यह है कि जिन्ना के मुस्लिम भारत आन्दोलन ने विश्व को मध्यकालीन अवधारणा की अमानवीय विचारधारा की गर्त में धकेल दिया. आज का मुस्लिम जगत विश्व की २१ वी सदी के विश्व बंधुत्व के सन्देश को सविकारने से निरंतर कतरा रहा है और प्वाइंट जीरो पर मस्जिद निर्माण की अपनी मद्यकालीन सोच पर अड़ा है.
जब तक इस सेकुलर शैतान के अनुयायी अपनी मध्य कालीन संकुचित सोच की कुंठा का परित्याग कर २१वि सदी के विश्व-बंधुत्व के महाभियान के साथ खुद को नहीं जोड़ते तब तक मानवता के अस्तित्व पर ९/११ का यह दानव इसी प्रकार फन फैलाये फुंकारता रहेगा. औरंगजेब को महान ..... मानने वाले ये मौलाना मज़हब के नाम पर जेहादियों को ज़न्नत के ख्वाब दिखा कर 'वर्ल्ड ट्रेड सेंटर' और 'ताज' पर निशाना मुसलसल साधते रहेंगे.

गुरुवार, 2 सितंबर 2010

स्वास्तिक प्रतीक कि अवमानना

स्वास्तिक प्रतीक कि अवमानना
सेकुलर शैतानों की कुष्ठ- मानसिकता...
एल.आर .गाँधी.

सेकुलर मिडिया की एक और शैतानियत - - -आउट लुक पत्रिका के १९ जुलाई २०१० के अंक
के मुख्या पृष्ट पर हिन्दुओं के आस्था प्रतीक स्वास्तिक को विकृत रूप में
छाप कर विनोद महता ने अपनी कुष्ठ-मानसिकता का ही परिचय दिया है. हिन्दू
टेरर नामक अपने लेख पर स्वास्तिक के निशाँ को चार पिस्तौलों से बना कर
हिन्दुओं के पवित्र आराधना चिन्ह की पवित्रता को जानबूझ कर दूषित करने का
दुस्साहस किया है.
संस्कृत में स्वस्तिक का अर्थ है सु=अच्छा , अस्ति=हो , इक= जो अस्तित्व
में है अर्थात उज्जवल भविष्य . या अच्छाई की विजय अर्थात समस्त मानवता के
लिए आशीर्वाद. बौध साहित्यकार इसे बुध के चरण-कमल मानते हुए अपनी कृति से
पूर्व स्वास्तिक का चिन्ह अंकित करना शुभ्यंकर मानते हैं. वैदिक दर्शन में
इसे ४ वेदों रिग्वेदा, सामवेद, यजुर्वेद और अर्थव वेद का प्रतीक माना जाता
है. भारतीय संस्कृति में स्वास्तिक को मानव के चार आश्रमों -ब्रह्मचर्य,
गृहस्थ वानप्रस्थ और संन्यास का प्रतीक चिन्ह माना जाता है. हिन्दू इसे
मानव के ४ जीवन लक्ष्यों -धरम, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रतीक भी मानते हैं.
उक्त साक्ष्यों से स्पष्ट है की स्वास्तिक हिन्दू धरम में पवित्र,
शुभ्यंकर, भाग्यवर्धक और शान्ति का प्रतीक है.
स्वास्तिक को विकृत रूप में प्रदशित करना घोर पाप के साथ साथ अमंगल कारी भी
माना जाता है. नाज़ियों ने स्वास्तिक को विकृत रूप में अपनाते हुए इसे ४५
डिग्री पर टेढ़ा कर लाल पृष्ट भूमि में अंकित किया. एसा करने से स्वास्तिक
का प्रभाव विनाशकारी हो जाता है. इतिहास इस विशवास का साक्षी है - जो
हश्र नाज़ीओं का हुआ वह सबके सामने है. आतंकियों का साथ देने वाले इन
सेकुलर शैतानों का अंत भी अन्ततोगत्वा निश्चित ही है.

पाक के फिक्सर -भारत का रोल माडल

पाक के फिक्सर -भारत का रोल माडल !
एल.आर.गाँधी.


पाक के बेचारे क्रिकेटर कैमरे पर कुछ पैसे लेते क्या पकडे गए हिन्दुस्तानी मिडिया हाथ-पैर-मुंह धो कर इन खिलाडिओं की धुनाई करने में लगा हुआ है. सी एन एन आइ बी एन के एडिटर इन चीफ राजदीप सरदेसाई ने तो इमरान खान से गुफ्तगू करते हुए यहाँ तक कह दिया की पाक खिलाडिओं का कोई रोल -माडल नहीं और न ही भारतीय खिलाडिओं की माफिक उन्हें कमाई है -इस लिए यह सब हो रहा है. क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान ने अपनी खीझ पाक राष्ट्रपति ज़रदारी पर निकाली यथा राजा तथा क्रिकेटर ,जब एक स्टेट का राजा ही भ्रष्ट है तो और लोगों से क्या तवक्को की जा सकती है. मिडिया के रोल माडल और क्रिकेट के रोल माडल इन महानुभावों की वार्ता सुन कर एक कहावत याद आ गई ' पकडे गए तो चोर ,न पकड़ में आए तो साधू.'.
फिक्सिंग का यह गोरखधंधा हवाला के ज़रिये होता है और हवाला की कारगुजारी को न्याय के तराजू पर तोल पाना संभव ही नहीं .पहला फिक्सिंग काण्ड भारतीय क्रिकेट की ही देन है , जब सन २००० में साऊथ अफ्रीका के कप्तान हेंसी क्रोने पकड़ में आए - क्रोने भी पाक साफ़ निकल जाते अगर हिन्दुस्तानी या पाकिस्तानी होते. बेचारे झूठ बोलना नहीं जानते थे -साफ़ साफ़ मान गए की उनसे गलती हो गई. हेंसी क्रोने ने यह भी साफ़ साफ़ बतला दिया की उनकी ' बुकीज़ ' से जान पहचान भारतीय कप्तान अजहरुदीन ने करवाई थी. अजहर ही फिक्सिंग के इस गोरखधंधे के चैंपियन हैं . क्रोने मगर यह भूल गए की अजहर उन जैसे मूर्ख नहीं जो सच बोलेंगे और फंस जाएंगे. यह भी रहस्योद्घाटन हुआ की अजहर को तो अंडरवर्ल्ड से भी उनके लिए मैच फिक्स करने की आफर आई थी.अजहर पर वन दे मैच फिक्स करने का दोष लगा . मिडिया ने शोर डाला और अजहर पर बैन लगा दिया गया. मगर सर से पाओं तक झूठ बोलने वाले एक शातिर खिलाडी पर हवाला के लेन देन कोर्ट में कहाँ साबित होते हैं. अजहर ने अपने बचाव में देश के सबसे बड़े वकील ' झूठ्मैलानी' की सेवाएँ लीं और मिल मिला कर कोर्ट से साफ़ पाक निकल आए -अपने अल्प्संखियक होने की भी दुहाई दी कि उन्हें मुसलमान होने के कारन फसाया गया , मगर बाद में माफ़ी मांग कर पीछा भी छुड़ा लिया. हेंसी क्रोने का यह सच तो सब ने मान लिया की वह फिक्सेर है, मगर हेंसी ने यह भी तो कहा की फिक्सिंग के चेम्पिय अजहर हैं - यह सच हमारे देश के रहनुमाओं को कहा हज़म होता , कि बेचारा एक अल्पसंख्यक भी पैसे के लिए देश की इज़त्त दाव पर लगा सकता है. खैर हमारे ' इमानदार 'बी सी सी आई के साफ़ पाक अधिकारिओं ने अजहर को भी अपने जैसा 'इमानदार 'मान कर २००६ में 'दूध का धोया' घोषित कर प्रतिबंध्मुक्त ही नहीं किया बकली पुरस्कृत भी कर दिया.
अब पाक के इन नए नए फिक्सिंग के गोरख धंधे में फंसे क्रिकेटर्स का तो रोल माडल 'अजहर मियां ' ही रहा होगा. फिक्सिंग की' नो बाल्स' पर सिक्सर्ज - पे- सिक्सर्स जमाये और पकडे जाने का तो सवाल ही नहीं. फिर २ बच्चों की माँ ,अपनी पहली बीवी नौरीन को दिया तलाक और रचा ली दूसरी शादी संगीता बिजलानी से. अब कहते हैं उससे भी जी भर गया और बेडमिन्टन खिलाडी ज्वाला दत्ता पर लट्टू हैं. एक तो करेला दूजा नीम चढ़ा - कांग्रेस को भला इससे ' योग्य ' उम्मीदवार मिलना था भला !
उतार दिया मुरादाबाद के चुनाव मैदान में और जीत भी गए -अल्पसंख्यक वोट के दम पर और जा मिले अपने ही जैसे ............कों.. में . अब राजदीप जी से कोई पूछे जब पाक खिलाडिओं को हमारे 'अजहर मियां' जैसे बने बनाए रोल माडल मिले ही हुए हैं तो फिर वे पाक के भूखे नंगे रोल माडल्स का क्या आचार डालेंगे ? पाक खिलाडिओं की कम कमाई के तर्क में भी कोई दम नज़र नहीं आता ,जिसके कारन वे फिक्सिंग के थंधे की ओर आकृष्ट हुए. उनके रोल माडल 'अजहर मियां' पर तो यह तर्क उल्टा पड़ता है , क्योंकि एक भारतीय कप्तान को तो पाक खिलाडी से हजार गुने कमाई होती है फिर भी 'फिक्सिंग' ? पत्रकार भाई आम तौर पर कहते हैं की जनता की याददाश्त कमजोर होती है . फिर इन चेनल वालों की मति को क्या हो गया भई !

बुधवार, 1 सितंबर 2010

जन्माष्टमी -मंगलकामनाएं


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1. ॐ कृष्णाय नमः Om Krishna Namaha
2. ॐ कमलनाथाय नमः Om Kamalnatha Namaha
3. ॐ वासुदेवाय नमः Om Vasudeva Namaha
4. ॐ सनातनाय नमः Om Sanatan Namaha...
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This kanhaiya "Saarthi", his first love is his Nannu. Happy Janamashtmi Nannu n nani....
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हमारे हिन्दूस्तानी शेर ‪#‎मोदी‬ जी को एक और शेर का साथ मिल गया। रुस के राष्टृपति पुतिन ने भारत को भरोसा दिलाया है कि भारत आगे बढे वो हमारे साथ खडे है।
पाकिस्तान कि पतलून तो हमारे भारतीय शेर कि दहाड से हि गीली हो गई थी। अब चीन कि हेकडी भी निकल रही है। चीन भी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खडे से इंकार कर रहा है।
अब तो पाकिस्तान के टुकडे होने से उसे कोई नहीं बचा सकता। 1971 में बाग्लादेश अलग हुआ और अब बलुचिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर। पाकिस्तान कौ अपनी दावेदारी छोडनी पडेगी।
अभी तो पाकिस्तान को समझाया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर आराम से खाली कर दो वरना हमें खाली कराना भी आता है।
नई दिल्ली। एनएसजी मेंबरशिप पर भारत को एक बड़ी उपलब्धी मिली है। पिछले कई वर्षों से भारत न्युक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानी एनएसजी की मेंबरशिप पाने की कोशिश कर था। इस कोशिश के…
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मिस्त्र के पिरामिडों से भी पुराना है, 3500 साल पहले बना था..
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Kamboj Mintgumria JAI SHREE RAM JI KI
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Nanu Kamboj Jai shri ram jai shri hanuman ji
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हमारे हिन्दूस्तानी शेर ‪#‎मोदी‬ जी को एक और शेर का साथ मिल गया। रुस के राष्टृपति पुतिन ने भारत को भरोसा दिलाया है कि भारत आगे बढे वो हमारे साथ खडे है।
पाकिस्तान कि पतलून तो हमारे भारतीय शेर कि दहाड से हि गीली हो गई थी। अब चीन कि हेकडी भी निकल रही है। चीन भी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खडे से इंकार कर रहा है।
अब तो पाकिस्तान के टुकडे होने से उसे कोई नहीं बचा सकता। 1971 में बाग्लादेश अलग हुआ और अब बलुचिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर। पाकिस्तान कौ अपनी दावेदारी छोडनी पडेगी।
अभी तो पाकिस्तान को समझाया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर आराम से खाली कर दो वरना हमें खाली कराना भी आता है।
नई दिल्ली। एनएसजी मेंबरशिप पर भारत को एक बड़ी उपलब्धी मिली है। पिछले कई वर्षों से भारत न्युक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानी एनएसजी की मेंबरशिप पाने की कोशिश कर था। इस कोशिश के…
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पाकिस्तान कि पतलून तो हमारे भारतीय शेर कि दहाड से हि गीली हो गई थी। अब चीन कि हेकडी भी निकल रही है। चीन भी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खडे से इंकार कर रहा है।
अब तो पाकिस्तान के टुकडे होने से उसे कोई नहीं बचा सकता। 1971 में बाग्लादेश अलग हुआ और अब बलुचिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर। पाकिस्तान कौ अपनी दावेदारी छोडनी पडेगी।
अभी तो पाकिस्तान को समझाया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर आराम से खाली कर दो वरना हमें खाली कराना भी आता है।
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