सोमवार, 17 अक्तूबर 2016

निःशब्द

निःशब्द 

एल आर गाँधी 

स्वर्ग  की अप्सराएं या जन्नत की हूरें !!!!!!!!!

अनादि काल से हम स्वर्गाभिलाषी रहे हैं  ...... ऋषि -मुनियों ने वर्षों तपस्या की स्वर्ग की प्राप्ति के लिए।  वनों में भटके ,वट वृक्षों की छाओं में प्रभु भक्ति में लीन  ..... न खाने की सुध न सांसारिक जीवन का मोह  ..... पर्वत शिखिर , कंदराओं , गुफाओं , आकाश -पाताल एक कर दिया ! बस स्वर्ग मिल जाए ! महर्षि विश्वामित्र की घोर तपस्या से तो इंद्र भी घबरा गए  .... आखिर तपस्या भंग करने परम रूपसी अप्सरा मेनका को भेजा  ..... ऋषिवर धोका खा गए ! हमारे जैसे तुच्छ प्राणियों की तो भला औकात ही  क्या है !
 कहते हैं स्वर्ग के सिंहासन पर वर्षा के देवता इंद्र 'आरूढ़ 'हैं  ...सदैव मृगनयनी अप्सराओं से घिरे रहते हैं  .....  नयनो से छलकती मस्ती और सोम रस का सरूर ,मृदंग और वीणा के मधुर स्वरों पर थिरकती लावण्यमयी -मृगनयनी अप्सराएं  .... कौन नहीं चाहेगा ऐसे मादक सोम -सरोवर में डूब जाना। 
अपनी आँखों के समंदर में उतर जाने दो !
तेरा कातिल हूँ , मुझे डूब के मर जाने दो !!

हूरें तो जन्नत में भी हैं , मगर महज़ ७२ और साथ में २८ लौंडे भी  .... आबे हयात है जिसमें शराब बहती है  ..... मजे कितने ही लूटो , थकने का सवाल ही नहीं  .... कितना ही खाओ ! ग़ुस्ल की कोई हाज़त नहीं ! बस जेहाद करना होगा ! दारुल इस्लाम के लिए ! जेहाद में मारे जाओगे तो जन्नत का एयर टिकट पक्का ,नो बुकिंग ,नो वीज़ा 
हमको मालूम है ,जन्नत की हकीकत लेकिन !
दिल के बहलाने को ग़ालिब यह ख्याल अच्छा है !!

अरे भई ! कहाँ भटक रहे हो सदियों पुराने स्वर्ग और जन्नत के खावों ख्यालों में ! माडर्न ऋषि मुनि : आज के साइंसदानों ने आप की ख्वाब गाह बोले तो बैड -रूम में जन्नत और स्वर्ग मुहैया करवा दिया है  ...... गर्मी है तो ए सी चला लो  .... सर्दी तो ब्लोअर  .... स्काच विस्की  या फिर बीअर की बोतल खोलो ! टी वि ऑन करो  ...' मन पसंद ' चैंनल लगाएं।  इतनी सूंदर अप्सराएं कि हूरें उनके आगे पानी भरें !
जिसमें लाखों बरस की हूरें हों !
ऐसी जन्नत को क्या करे कोई !!

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

कज़री का सर्जिकल अप्रेसन

कज़री का सर्जिकल अप्रेसन

    एल आर गाँधी

नीम की दातुन से कड़वी हुई जीभ को राहत पहुंचाने के चक्कर में ,दातुन  दो फाड़ कर जीभ खुरच रहा था ,कि चोखी लामा की जानी पहचानी आवाज में 'राम -राम ' बाबू सुनाई दिया।
बाबू जीभ ही खुरचते रहोगे कि कभी आज की सुर्खी भी देखोगे ? हमने दातुन फेंक कर प्रश्नचिन्ह   ? नज़रों से चोखी को निहारा ! चोखी ने भी टीवी चेनल पर बतियाते 'मीम अफ़ज़ल ' की माफिक फ़रमाया   .... बाबू ! मेरे यार ने भी मोदी से पूछ ही लिया 'सर्जिकल ऑपरेशन ' का सबूत दो ! ..... आज तक मनमोहन जी ने भी तो हज़ारों सबूत दिए हैं  ...एक आप भी दे दो  .... हो   जाओ पाक -साफ़ !
कजरी को ' बाबू' हम बचपन से जानते हैं  ...... एक बार तो अपने 'अब्बू' से पूछ बैठे : अब्बू हमारा सर्जिकल फादर कौन है ? अब्बू भी ठहरे एक नंबर के मसखरे ! बोले बेटा ! .... इसका जवाब तो सिर्फ तुम्हारी 'अम्मी ' के पास है  .... तुम ही पूछ लो  .....  मेरी तो हिम्मत नहीं ! मैं तो सुहाग रात को  भी बाहर ही खड़ा  रहा ! सुई बालान के सभी लौंडे अंदर जा और आ रहे थे।  चांदनी दिवाली को तुम आ गए  .... तब भी मैं तो बाहर ही खड़ा था ,जब नर्स ने सर्जरी रूम से निकलते ही ऊंची आवाज़ में कहा  'मियां जी ' बधाई हो ! लफंगा हुआ है ! हमने नादान शौहर की मानिंद नर्स से शर्माते हुए पुछा  .... सिस्टर ! यह 'लफंगा '? नर्स ने तपाक से जवाब दिया ! मियां छमाही बच्चे को यहाँ यही कहते हैं  ..... न मालूम किसका है ?
और हाँ ! मेरी अंगूठी निगल गया  ... मूयां ! मैंने तो शहद चटाया ! इतनी लंबी ज़ुबान ? ...शहद के साथ 'अंगूठी ' भी निगल गया !नार्मल बच्चे तो पैदा होते ही रोते हैं और यह लफंगा 'खांस ' रहा था  ...लगता है पैदायशी 'राज यक्ष्मा ' का रोगी है और हाँ जीभ भी कुछ ज़्यादां ही लंबी है !

मंगलवार, 23 अगस्त 2016

श्री कृषण जन्माष्टमी पर आप सब को मंगलकामनाएं !
सेस गनेस महेस दिनेस , सुरेसहु जाहि निरंतर गान्वैं !
जाहि अनादि अनंत अखंड , अच्छेद अभेद सुवेद बतावें !!
नारद से सुक्व्यास रटे , पचिहारे तऊ पुनिपार न पावैं !...
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1. ॐ कृष्णाय नमः Om Krishna Namaha
2. ॐ कमलनाथाय नमः Om Kamalnatha Namaha
3. ॐ वासुदेवाय नमः Om Vasudeva Namaha
4. ॐ सनातनाय नमः Om Sanatan Namaha...
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रविवार, 7 अगस्त 2016

कुत्ते ..... तेरा खून ....... !

कुत्ते  ..... तेरा खून  ....... !

    एल आर गाँधी

कुक्कुर को 'इंसान ' का सबसे विश्वसनीय और बफादार मित्र जानवर के रूप में जाना जाता है। युधिष्टर जब अपने श्वान के साथ सदेह वैकुण्ठ के द्वार पर पहुंचे , तो धर्मराज स्वयं उनके स्वागत के लिए स्वर्गद्वार पर उपस्थित थे  ..... युधिष्टर का भव्य स्वागत किया गया ,किन्तु जब श्वान के प्रवेश की बात आयी तो धर्मराज ने उसके प्रवेश पर ऐतराज़ ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक पशु को वैकुण्ठ धाम में प्रवेश की आज्ञा कदापि नहीं दी  जा सकती !  ..... युधिष्टर ने धर्मराज की इस सोच का घोर प्रतिकार करते हुए स्वयं भी वैकुण्ठ धाम में न जाने का निर्णय लिया ! धर्मराज को युधिष्टर के 'श्वान ' को प्रवेश की अनुमति देनी पड़ी !
ऐसे ही जब अमेरिका  के राष्ट्रपति बुश भारत आये तो उनके साथ उनके अंगरक्षक 'डॉग सक़्वेड ' भी थे  .... पांच सितारा होटलज़ में कुत्तों के प्रवेश पर रोक है। ...   तब अमेरिकन सुरक्षा अधिकारियों ने इन्हें 'कुत्ता ' कहने पर भी ऐतराज़ किया  और कहा कि इनका रैंक सुरक्षा अधिकारियों के बराबर है !  उन्हें बाकायदा  होटल के विशेष कमरों में ठहराया गया।
विश्व के अधिकाँश देशों में श्वान को कानूनन संरक्षण प्राप्त है  ..... मगर हमारे पडोसी देश 'पाकिस्तान 'में कुते तो क्या इंसानों को भी यह नहीं प्राप्त ! पाक में गत दिनों ७०० कुत्ते ज़हर की गोलियां खिला कर बेमौत मार दिए गए ! चंद पशु प्रेमी संस्थाओं ने इस 'क्रूरता ' के विरुद्ध रोष जताया  ....... ये पशु प्रेमी न जाने उस वक्त कहाँ दुम दबा कर छुप जाते हैं   , जब बकर ईद को सारे देश में 'घर -घर ' बकरों और अनगिनत अन्य जानवरों को मज़हबी 'हलाल ' के नाम पर तड़पा -तड़पा कर मारा जाता है   ..... शैतानों को भला 'इंसानियत ' से क्या मतलब ?

मंगलवार, 5 जुलाई 2016

इंसानियत का मसीहा ' फ़राज़ '

इंसानियत का  मसीहा ' फ़राज़ '

    एल आर गांधी 

शैतानी  किताब को मानने वालों ने बांग्ला देश के ढाका शहर में 'पवित्र रमदान ' महीने की विदाई २० काफिरों के  सर कलम करके मनाई  ...... काफिरों से 'पवित्र -कुरआन ' की आयते सुनाने को कहा गया  .... जो नहीं सुना पाये उनके सर कलम कर दिए गए  ..... सभी कातिल खूब पढ़े -लिखे और खाते -पीते घरों से थे।  और 'कुरआन ' को भी खूब समझते थे  .....'.हराम  महीने के ख़त्म होते ही घात लगा कर बैठ जाओ और मौका मिलते ही  'काफिरों ' को मार डालो ! कुरआन के इस फरमान को महज़ पूरा किया इन खुदा के बन्दों ने  .... मरने वाले विदेशी थे और उनमें भारत की हिन्दू  कन्या ताऋषि जैन और बांग्ला देशी युवक फ़राज़ अयाज़ हुसैन था। 
फ़राज़ को जेहादिओं ने भाग जाने को कहा , मगर उसने अपने साथी -मित्रों को मरने के  लिए छोड़ जाने से साफ़ इंकार कर दिया  .... ज़ाहिर है इस्लाम में काफिरों का साथ देना भी 'कुफ्र ' है और कुफ्र की सज़ा मौत !  फ़राज़ को भी मार दिया गया  ..... फ़राज़ ने इंसानियत , विश्व-बन्धुत्व और मित्रता की बेमिसाल इबारत लिख दी जिसे विश्व इतिहास में  अविस्मरणीय स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाइएगा !
इंसानियत  के पैरोकारों ने फ़राज़ की कुर्बानी को भरपूर श्रद्धांजलि दी  ..... मगर हमारे यहाँ  वोट बैंक के भेड़िये सैकुलर शैतान मुंह में मज़हबी सुपारी दबाए मौन बैठे हैं  ..... मुंह खोले तो ' सैकुलर सियासी लाल पीक से उनके अपने ही गिरेबां दागदार ' हो जाएंगे ! ताऋषि का अंतिम संस्कार दिल्ली की बगल -गुरुग्राम में किया गया , मगर अपनी दिल्ली का ' दल्ला' जो हर मौलवी को करोड़ -करोड़ बांटने में माहिर है  ...... नदारद रहा ! फ़राज़ की  कुर्बानी पर भी सांप सूंघ गया !
जिन देशों से शैतानी किताब को मानने वालों ने 'काफिरों ' का  पूर्ण सफाया कर दिया , वहां अब 'अपनों के सफाये में मशगूल हैं  .... यु ऐ ई में मुहम्मद की मज़ार पर   बनी मसीत पर बम ब्लास्ट और वह भी कट्टर पंथी सुन्निओं द्वारा  ..... तलवार के ज़ोर पर फैला मज़हब  ...... ज़बर के ज़हर से ही निपट जाएगा !

शुक्रवार, 1 जुलाई 2016

पर कटे परिंदे -पंजाब विजीलैंस

पर कटे परिंदे -पंजाब विजीलैंस 


    एल आर गांधी 

पर कटे परिंदे - कुछ ऐसा ही हाल है  ....... पंजाब के विजीलैंस विभाग का !
अरसा पहले जब कांग्रेस की सरकार थी और कैप्टन साहेब मुख्य मंत्री के सिंहासन पर आरूढ़ थे , तब यका -यक बाबूओं पर मेहरबान हो  गए  .... अफसरों की भांति बाबूओं पर कार्यवाही से पूर्व विजीलैंस के लिए सम्बंधित विभाग की  सहमति अनिवार्य कर दी  .... चोर -चोर चचेरे भाई ! अकालियों ने भी यह बंदिश जारी रखी। 
एक ओर मोदी जी ने ' न खाऊंगा , न खाने दूंगा ' का नारा दिया , मगर अकालियों ने कांग्रेसिओं के ' खूब खाओ और खाने दो ' की निति को अपनाया। 
हमारा वास्ता बदकिस्मती से करप्ट कार्पोरेशन आफ पटियाला शाही से पड़ गया  .... एक बाबू से काम पड़ा तो जनाब ने ' न्यौछावर ' मांग ली  . हमने  समझाया भई हमने तो ३५ साल की सेवा में इस मुई न्यौछावर का नाम भी नहीं लिया ! बाबू बोले - यहाँ का तो यही चलन है  और वह भी नीचे से ऊपर तक  ..... हमारे भीतर का वाच -डॉग मचल गया  ..... बाबू को विजीलैंस को पकड़वा दिया और वह भी रंगे हाथों ! हैरानगी तो तब हुई जब कार्पोरेशन  के सारे कर्मचारी अपने भ्रष्ट भाई को पुलिस से छुड़ाने बाहर आ गए और विजीलैंस की जीप को घेर लिया   ... हम तो किसी भांति दुम दबा कर भागे। 
भ्रष्ट बाबू का  चालान कोर्ट में पेश करने से पहले विजीलैंस ने कमिश्नर कार्पोरेशन से सहमति मांगी तो 'यूनियन 'के दबाव में कोर्ट की बजाये कार्पोरेशन की 'कमेटी ' से न्याय करवाने  फैसला किया गया। बेचारे पर -कटे विजीलैंस वाले ताकते रह गए !
सोचने की बात तो यह है  ...... क्या करप्ट कार्पोरेशन के पास कमेटी गठित करने के लिए महज़ चार 'बेदाग़ ' अफसर हैं ?

शनिवार, 4 जून 2016

वाह मियां .... वाह

वाह   मियां  .... वाह

एल आर गांधी

क्वेटा ,पकिस्तान के मियां जी  ..... ४६ वर्षीय  सरदार जान मोहम्मद खिलजी तीन बीवियों से ३५ बच्चे पैदा कर अपने उद्देश्य की ओर अग्रसर हैं।  उनका उदेश्य १०० बच्चे बनाने का है।  शीघ्र ही मियां जी चौथी बीवी लाने जा रहे हैं ताकि अल्लाह के हुकम की तामील एक सच्चे मुसलमान की मानिंद पूरी हो सके !
अल्लाह का शुक्र है कि उसने अपने 'बन्दों ' को ९ माह में महज़ एक बच्चा पैदा करने की कूवत बख्शी है ! वर्ना एक 'शूकर' डेज़ी ने तो ९ माह में २७ शूकरों को जन्म दे डाला  ..... देखें ! मियांजी चार बीवियों और अल्लाह के फज़ल से कब अपने १०० के अहद को पूरा कर पाते हैं।  जैसे डेज़ी अपने सभी  नन्हें शूकरों को दूध नहीं पिला पाती वैसे ही मियां जी भी अपनी भारी भरकम 'अल्लाह की सौगात ' के भरण पोषण में खुद को लाचार पाते हैं  .... मियां जी ने पकिस्तान की इस्लामिक सरकार से मदद की गुहार भी लगाई है।  जो सरकार पहले ही अमेरिका के रहमो-करम पर जी रही है , वह मियां जी की क्या मदद करेगी ?
मियां जी ने २०१३ में एक प्रांतीय चुनाव भी लड़ा था ,और चुनाव चिन्ह था उनका मस्तुरात क्रीड़ा स्थल आसन ,
'डबल बैड ' महज़ ९८० वोट मिले और हार गए  ..... ३५ का आंकड़ा सौ को पार करने दो  ... देखें कौन माई का लाल चुनाव में उनके आगे 'टिकता ' है।
मियां जी हैं ही पाक जैसे मुफलिस और नापाक मुल्क में  ... हमारे यहाँ होते ! मियां मुलायम ने  कभी का मोहम्मद को 'मालामाल' कर दिया होता !

बुधवार, 18 मई 2016

जो है सो है

जो है सो है

एल आर गांधी

सुबह की सैर को तैयार हुए थे  !  ... यका यक जिंदगी की शाम ने दस्तक दे दी ! ज़ुबान ने दिमाग़ का साथ छोड़ दिया  ..... दिमाग ने दूध बोलने को कहा  .... मगर जुबां ने बगावत कर दी  ..... मस्ता सी गयी और 'ढूढ ' बोलने लगी दूध को ! जब से जिंदगी को जीने का सलीका आया है  .... तभी से मौत की उंगली पकड़ कर चलने की ज़िद दिलो -दिमाग़ पर तारी है  .... जो है सो है में जीवन के  परमानन्द की अनुभूति होने लगी है।  कबीर जी ने ठीक ही तो कहा था  ...जिस मरने से जग डरे , मेरे चित्त आनंद ! मरने से ही पाइए , पूर्ण परमानन्द !
फ़ौरन टैक्सी की और पी जी आई के ट्रामा सेंटर पहुँच गए , अपनों के यत्नो के आगे मौत को अपनी  ऊँगली छुड़ा कर मेरी ऊँगली पकड़ने का विचार छोड़ना पड़ा  .... ट्रामा सेंटर में सभी लोग शायद मौत जैसी सच्चाई के इतने निकट नहीं थे  .... अधिकाँश मरीज़ मौत से भी बदतर जीने को जीवन मान बैठे थे  ... जमीन पर लेटे  स्ट्रेचर की जदोजहद में थे  .... स्ट्रेचर वाले पूरे जतन से उसे वार्ड तक कब्जाए रखने में मशगूल थे  ... सबसे दयनीय स्थिति ईश्वर तुल्य जूनियर डाकटरों की थी  .... सभी उन्हें अपने और अंतिम क्षण के बीच का फरिश्ता मान बैठे थे।
टेस्टों से एक सच्चाई खुल कर सामने आ खड़ी हुई।  सभी के दिमाग में घमंड की माफिक रक्त प्रवाहित हो रहा है  .... सभी की नसों में खून के थक्के जमते हैं और पिंघल जाते हैं  .... कभी कभी यह थक्का बस पिंघलता नहीं   ... घम्मंडी हो जाता है  .... जब फूटता है तो 'स्ट्रोक ' बन कर सुबह की सैर को  शाम का स्ट्रेचर बना डालता है।
मौत की उंगली पकड़ कर चलने वाले, ' जो है सो है ' के शाश्वत सत्य के साथ मर कर भी  जीते हैं !

गुरुवार, 5 मई 2016

बाबा की ललाट कान्ति क्रीम

बाबा की ललाट कान्ति क्रीम 

एल आर गांधी 


दन्त कान्ति दन्त मंजन पर शोध के बाद ,बाबा अब ललाट कांति की शोध की ओर अग्रसर हैं  ... इस शोध के लिए उन्हें एक ऐसे ललाट की दरकार थी जिसे 'देश' का सबसे काला मुखारविंद होने का सौभाग्य प्राप्त हो  ... ऐसा मुख् जो अपने कुकर्मों से भी अंदर तक कलुषित हो  .....
पुराने मित्र का उद्द्घोष पढ़ा  .... यदि सोनिया बेईमान है तो देश में कोई ईमानदार नहीं ! बाबा शीघ्र से पेशतर दिल्ली  पहुँच गए  .... पुराने मित्र लालू जी की शान में खूब कसीदे पढ़े  और पोटली में से अपना नया प्रॉडक्ट पतंजलि ललाट निखार क्रीम अपने कर कमलों से मर्दन की  .... और साथ ही उद्द्घोष किया कि मुख कितना ही काला हो कर्मों से या दुष्कर्मों से !   एक दम पाक -साफ़ हो जाएगा  ... मोदी जी के 'शरीफ ' की माफिक !
बाबा जी पक्के इवेंट मैनेजर बन गए हैं  .... बहुत देख लिया  !  काला - धन , काला -धन का प्रलाप करके  .... चारों ओर काले चेहरे बढ़ते ही जा रहे हैं  ... काली -केतली की माफिक  .... और सभी काले चेहरे उजले होने की फिराक में हैं  ... बाबा भी निकल पड़े काले -धन से कलियाए  काले चेहरों को चमकाने  .... काली भैंसों के चारे से अपना मुंह काला किये घूम रहे लालू से बेहतर 'रोल- मॉडल ' और  कहाँ  मिलेगा !
बाबा की क्रीम से ताजा ताजा मुंह चमकाए  ...लालू जी ने भी मोदी जी को सलाह दे डाली  ..... करनी है तो बाबाओं के काले धन की जांच करो  .... बेकार में सोनिया जी की सफ़ेद साड़ी दाग-दार करने पर तुले हैं।  

मंगलवार, 3 मई 2016

चारा -बेचारा

चारा -बेचारा

एल आर गांधी

स्व : खुशवंत सिंह जी ने भी क्या खूब कहा था  ..... यह सफेद  राबड़ी भी उन्हीं काली भैंसों के दूध से बनी है ,जिनका चारा लालू जी खा गए ! ९०० करोड़ का चारा गटक गए  ..... अंदर गए ! मगर क़ानून के लम्बे हाथ बौने पड़ गए।  आज बिहार के सिकुलर समाज की खूब हजामत बना रहे हैं।
बिहार की न्याय व्यवस्था के भविष्य  .... ला कालेज के दीक्षांत समारोह के में जनाब 'मुख्यातिथि ' थे। लगे हाथों सिंगोरा गांधी को ईमानदारी का 'भारत रत्न ' भी दे डाला ! बोले ! सोनिया बेईमान तो देश में नहीं कोई ईमानदार ! सिंगोरा जी की चका -चक सफेद साडी और लालू जी की ' राबड़ी ' में दाग़ ?  .... नो वे ! केजरी की खांसी और कन्हैया की आज़ादी : गवाह हैं।
ईमानदारी -आज़ादी -देश द्रोह - राष्ट्र ध्वज  पर एक नई इबारत लिखी जा रही है  ..... ईमानदार वह जो भिखारी वोटरों के वोट बटोर ले  ....   बैगरज हैज़ नो चॉइस ! देश की बर्बादी का नारा बुद्धि जीवियों की आज़ादी हो गया। सुरक्षा में सेंध मारी अब देश द्रोह नहीं ! देश द्रोही अगस्ता  चॉपर की ऊंचाइयां   माप रहे हैं।
भिखारियों को लुभाने के लिए एक्सपर्ट नीतिकारों की सेवाएं खरीदी जा रही हैं। ... लोक तंत्र बाज़ारू रंडी की माफिक सज -धज कर सत्ता के दलालों में घिरा है  .... सफेद साड़ी का ज़माना है  .... बापू की धोती से बू आती है  .... महात्मा गांधी   .... सँगोरा गांधी हो गया है  ..... ऊंची उड़ान को अगस्ता चॉपर खड़ा है !

बुधवार, 27 अप्रैल 2016

सँगोरा गांधी

सँगोरा  गांधी 

एल आर गांधी 


भई  हाज़मा हो तो ऐसा  ..... यह सब हाजमोला का कमाल है ,जो इटली में नहीं मिलता ! तभी तो !अगस्ता उड़नखटोलों की खरीद में , खिलाने वाले इटली की वातानुकूलित जेल की ठंडी हवा खा रहे हैं  ...... और हमारे यहाँ खाने वाले 'डकार ' तक नहीं ले रहे।  एक -दो नहीं पूरे पांच नाम उजागर हो गए  ....  न खाएंगे और न खाने देंगे का सिंघनाद करने वाले 'सो ' रहे।  जाग कर भी क्या कहेंगे  .... यहाँ तो जेल का फाटक सत्ता के गलियारों में खुलता है  .... देख लिया लालू जी का अंजाम  ... बिहारिओं ने किंग मेकर बना डाला।  
इंदिरा जी को भी जेल की हवा इसी मानिंद माफिक आई थी  ..... इन्डियन वोटर उस भिकारी के समान है जिसकी अपनी कोई च्वाइस नहीं होती  ...सब बिकता है !
पांच नामों में राजमाता का भी नाम है  .... इतने सालों में यह इतालवयन भारतीय राजनीती के सभी हथकंडों में खूब माहिर हो गईं हैं  .... कांग्रेसी इसे एक स्वर्णिम अवसर की भांति देख रहे हैं  .... 
कल टकसाली कांग्रेसी 'चोखी लामा' से जब हमने  पूछा  ...लामा जी अब तो इटली ने भी आपकी मैडम को घूस -खोर साबित कर दिया ! लामा तपाक से बोले  ..... मियां अखबार ज़रा गौर से पढ़ो !   सँगोरा गांधी लिखा है। 

शनिवार, 23 अप्रैल 2016

सैकुलर शैतान -वोट बैंक प्रधान



सैकुलर शैतान बिहारी बाबू के निज़ाम का एक विचित्र रूप यह भी है   .... आरा नगर निगम ने हनुमान जयंती के पवित्र पर्व पर ४. ३३ लाख की  वसूली का  कानूनी नोटिस ' हनुमान कुमार वल्द पवन कुमार हाल मुकाम आरा ' जारी कर दिया  ...... नोटिस में साफ़  किया गया कि १५ दिन में कर अदा न किया गया तो कर वंचना की होर्डिंग लगा दी जाएगी।  मुगलई टोपी पहिन कर सियासी जलसों में खुद को 'सेकुलरिज़्म '  का  अलम्बरदार दर्शाने वाले मियां नतीश का नकाबपोश चेहरा बेनकाब हो गया।
दूसरी ओर  सबको चोर और खुद को सत्यवादी हरिश्चन्द्र जी का साला कहने वाले दिल्ली के नवाब मियां केजरीवाल जी का 'चोर चोर चचेरे भाई ' का रूप देखिये। यूँ तो दिल्ली का बिजली विभाग बिल आदयगी की कोताही पर किसी भी 'मुफलिस' का कनेक्शन काट देता है।  मगर मुगलिया टोपी धारी वोट बैंक की बात आती है तो जनाब की खांसी को लकवा मार जाता है !
बरसों से ज़ामा मस्जिद के इमाम साहेब ने बिजली का बिल नहीं भरा।  बकाया ४ करोड़ का आंकड़ा पार कर गया  .... है किसी में हिम्मत कि कोई नोटिस चस्पा कर दे  ....  ....... के नाम की  होर्डिंग लगा दें  ! दंगे हो जाएंगे ?
वक्फ बोर्ड और इमाम मस्जिद की मलकीयत पर 'भिड़े' हैं  .... इधर इम्माम जो की रिकार्ड में वक्फ बोर्ड के वैतनिक कर्मचारी हैं , अड़े हैं  ...मलकीयत दो तो बिल भरूंगा ! दूसरी ओर वक्फ बोर्ड अड़ा है , कब्ज़ा छोड़ो , बिल तो हम दे देंगे।  मज़े की बात यह है कि वक्फ बोर्ड पर भी चंद मस्जिदों का २ करोड़ का बिजली बिल बकाया है !

गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

बेचारी मुफलिस राजकुमारी

 बेचारी मुफलिस राजकुमारी

       एल  आर  गांधी

राज परिवार की एक मात्र राजकुमारी  किराए के सरकारी मकान में मुफलिसी की जिंदगी गुज़ारने को मज़बूर है , हो भी क्यों न ! एक गरीब देश के हाकिम देश की गरीबी मिटाने  में मशगूल रहे , अपने बच्चों के लिए कहाँ वक्त था उन्हें 'बापू' की माफिक ! प्योर गांधी वादी जो ठहरे।
सरकार ने परिवार की कुर्बनिओं को 'गौर ' से देखते हुए 'राजकुमारी को राजधानी के  लुटियन जोन में एक सरकारी बांग्ला महज़ २,७६५ स्क्वेअर मीटर में सिमटा अलाट कर दिया और किराया ५३,४२१ रुपैया। मगर मुफलिस राजकुमारी मात्र  ८८८८ रूपए ही दे पाई।
आखिर बेचारी राजकुमारी ने उस वक्त के  पी एम अटल बिहारी वाजपाई को 'गुहार ' लगाई की इतनी भारी भरकम किराए की रकम अदायगी उसके 'बूते' की नहीं है।  वाजपई जी ने 'परिवार ' की कुर्बानियों पर गौर फ़रमाया और ज़िंदा शहीद बिट्टा जी ,पंजाब में आतंकवाद से लोहा लेने वाले गिल साहेब और कांग्रेस भक्त अश्वनी की भांति राजकुमारी जी का किराया भी उनकी मांग और हैसियत के अनुसार कम  कर दिया। वाजपेई जी ने भी नेहरू परिवार की 'कुर्बानियों ' के आगे 'नेताजी सुभाष चन्द्र बॉस बोस  और आज़ाद हिन्द फौज को कोई तवज़्ज़ो नहीं दी !
वैसे आज राजकुमारी के सरकारी बंगले का   मार्किट रेट  ८१,८६५ /- प्रति माह  है।
जिस प्रकार अंग्रेज़ों की समर राजधानी हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला थी उसी प्रकार नेहरू परिवार की राजकुमारी ने भी अपने लिए शिमला के निकट समर हॉलिडे 'आशियाना ' निर्माण के लिए २००७ में महज़ ४७ लाख रूपए में १ एकड़ (4.२५ बीघा ) का प्लाट ख़रीदा , जिसकी कीमत ५ साल पूर्व सवा चार करोड़ थी।  मगर राजकुमारी अपने इस समर आशियाने से संतुष्ट नहीं  .... उनको इसका डिज़ाइन पसंद ही नहीं आ रहा।  इसे बार -बार बनाया और गिराया जा रहा है  ....... अल्लाह करे जल्द ही राजकुमारी के सपनो का समर महल  बन कर तैयार हो जाए और नेहरू परिवार की 'लाड़ली' किराए के कलंक से गर्मियों में ही सही निज़ात पा सकें !

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

कांग्रेस का हाथ 'ददुआ ' के साथ !

कांग्रेस का हाथ 'ददुआ ' के  साथ  !

          एल आर गांधी

इंदिरा जी किसी स्कूल -कालेज में नहीं जा पाईं ,शायद नेहरू जी के पास अपनी प्रियदर्शनी को  किसी विद्यालय में दाखिला करवाने का 'वक्त ' ही नहीं था - देश की भारी भरकम पञ्च वर्षीय योजनाओं से फुर्सत ही कहाँ थी ?
अपने इस अधूरे सपने को इंदिरा जी ने पूरा करने की ठानी  .... साल १९७६ में  अपने कर्म क्षेत्र रायबरेली में एक कालेज , अपनी माँ कमला नेहरू जी के नाम पर खुलवाने की 'घोषणा' कर के  .... लखनऊ -इलाहाबाद हाइवे -सिविल लाइन के चौराहे पर।  कमला नेहरू एजुकेशन सोसाइटी  को ५ बीघा भूमि कॉलेज के नाम पर अलाट कर दी गई !
इंदिरा जी गए ! राजीवजी आए। ...  और चले गए  अब सोनिया जी का जमाना है  ..... सोनिया जी को भी यह कसक रही कि वह भी किसी स्कूल-कालेज का दीदार नहीं कर पाई  .... २००४ में रायबरेली की एक चुनाव सभा में कांग्रेसी 'हाथ' उठा कर 'सिंह-नाद ' किया  ' गांधी परिवार' के सपनों को पूरा किया जाएगा !
 वैसे तो वह वायदा ही क्या  ... जो वफ़ा हो जाए  .... मगर राजमाता के खासमखास  कमला नेहरू सोसाइटी के सचिव सुनील देव हवाई घोषणाओं को सीरियसली ले बैठे  ... आनन-फानन में अरबों की नेहरू सम्पति को बीच चौराहे नीलाम कर दिया और वह भी 'कुख्यात डाकू ' ददुआ की भौजाई के हाथों , महज़ ९. ३०  करोड़ के औने -पौने दामों में।
इसे कहते हैं 'कांग्रेस का हाथ 'ददुआ 'के साथ  !

मंगलवार, 15 मार्च 2016

माँ भी काफिर .....

माँ  भी काफिर  .....

एल आर गांधी


पाक कप्तान  अफरीदी  ने भारत की मेहमान -नवाज़ी की तारीफ क्या कर दी   .... पाक में तूफ़ान बरपा हो गया।  कुछ लोगों ने तो अफरीदी को 'देशद्रोही ' तक कह दिया।  पूर्व कप्तान  जावेद मियांदाद ने भी अफरीदी की खूब खबर ली  .... चलो मियां मियांदाद की तकलीफ तो समझ में आती है , भारत के दुश्मन नम्बर एक दाऊद के समधी जो ठहरे  ...जिसके कारण उनका भारत में प्रवेश निषेध है।
गले पर छुरी रख दो , फिर भी भारत माता की जय नहीं बोलूंगा  ... इस्लाम के 'सच्चे ' पैरोकार असदुद्दीन ओबीसी,  भारत में रहते हुए भारत माँ से 'नफरत ' ! इनके भाई अकबरुदीन को पाकिस्तानियों की तरह सभी हिन्दुओं से 'नफरत ' है  ... कहते हैं १५ मिनट के लिए फ़ौज़ हटा दो सारे हिन्दुओं को 'निपटा ' देंगे। अब इनको देश द्रोही न कहें तो और क्या ?
हमारे राष्ट्रीय दल कांग्रेस के दत्तकपुत्र गुलाम नबी आज़ाद आर एस एस को विश्व  के शीर्ष आतंकी संगठन आई इस के समान मानते हैं  .... और इसकी पुष्टि दल की महारानी ने सन्देश पर  'उर्दू में दस्तक ' करके कर दी।
इसके पीछे इस्लाम की वही सोच है जिस में सभी गैर मुस्लिमों को 'काफिर' माना  जाता है और काफिरों को मारना 'शबाब' का काम ! इनके नबी एक अर्से के बाद अपनी माँ की 'समाधि ' पर गए तो एक शिष्य ने पूछा ! माँ को जन्नत नसीब हो ! क्या अल्लाह से फरयाद नहीं करेंगे ? तो उन्होंने फ़रमाया ! नहीं वह काफिर थी !
ओबीसी साहेब के लिए भी भारत माँ काफिर है  .... हलाल हो जाएंगे पर 'जय ' नहीं बोलेंगे !

शनिवार, 12 मार्च 2016

उर्दू में दस्तखत ......

उर्दू में दस्तखत  ......
इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह

एल आर गांधी

भई कमाल हो गया - कमाल  ! यह वो कमाल नहीं जिसे कभी गुनगुनाते हुए हमारे 'कंठ ' सूख जाते थे ,  मगर हम फिर भी गुनगुनाते  थे  .....साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल !  ले दी हमें आज़ादी !  .... बिना  ...... यह है आज़ादी का असली तराना जिसे जे इन यु ने इज़ाद किया है  .....
Edvige Antonia Albina maino  toone  kar diya kamaal ......उर्दू में करके दस्तखत !
राष्ट्रीय एकता पर जमीयत उलेमा ए हिन्द के इज़लास में 'आज़ाद' भाई ने अपनी इकलौती नेता सोनिया जी का सन्देश पढ़ कर सुनाया और यह बताना नहीं भूले कि 'सन्देश' पर मादाम के दस्तखत 'उर्दू ' में किये हैं  .... अब सन्देश किसने लिखा या किससे लिखवाया गया ! किस भाषा में !
 ज़ाहिर है ! मल्लेछ भाषा में ही होगा ! क्योकि मैडम हिंदी में तो लिख नहीं सकती  और  लिखेंगी भी क्यों ? एक बार मैडम से एक विदेशी पत्रकार ने 'राष्ट्र भाषा हिंदी ' के बारे में उनके 'विचार पूछे तो उन्होंने झट से ज़वाब दिया  ' hindi is a language spoken by servants ' अब महारानी भला नौकरों की भाषा का  इस्तेमाल काहे  को करेंगीं '
इज़लास में मोदी जी को जी भर के बुरा भला कहा गया  ... आई एस आई  और आर एस एस दोनों एक जैसे हैं  ... इज़लास में कांग्रेस ,एस पी , कौमनष्टो और मुस्लिम दलों के मुल्लों के इलावा  , पाकिस्तान में नवाज़ शरीफ से मोदी को हटाने में मदद की गुहार लगाने वाले मणि शंकर अय्यर साहेब थे  .... राउल विन्ची के आने की उम्मीद लगाई जा रही थी  ....
इंदिरा गांधी स्टेडियम में इन सेकुलर - जम्हूरियत पसंद राजनेताओं ने 'आज़ादी  के परवाने ' ! ....अफज़ल प्रेमी   जे एन यू के छात्र  उमर - अनिर्बान की रिहाई की मांग की  .... जिन्होंने देश की बर्बादी , पाक  के समर्थन और कश्मीर की आज़ादी के  नारे लगाए थे।
मैडम उर्दू सीखने के लिए किसी मदरसे में तो जाएंगी नहीं क्योंकि इनके यहाँ स्कूल जाने का तो रिवाज़ ही नहीं ! हाँ ! ज़मीयत उलमा ए हिन्द के अध्यक्ष मियां अरशद मदनी मैडम को उर्दू सीखाने  उनके दौलत खाने पर हाज़िर हो जाएंगे  .... इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह 

सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

मत कर अड़ियाँ साकी ....

मत कर अड़ियाँ साकी  ......

 एल आर गांधी

नशों में डूबा पंजाब अब पाकिस्तान को 'दूध' पिलाएगा  ....    हम पंजाबी किसी का क़र्ज़ या उधार अपने सर बकाया नहीं रखते  .... हुआ यूँ कि हमारे यहाँ प्रति पंजाबी प्रति दिन ९९३ ग्राम दूध का उत्पादन होने लगा है   ... अब हमारे 'गबरू 'तो दूध पीने के आदि नहीं रहे ! भला हो हमारे पडोसी का जिसने उन्हें 'हीरोइन ' जैसे खूबसूरत नशों की लत लगा दी  ... लत भी इस कदर कि पंजाब के ७५% 'मुंडे  नशेड़ी हो गए  .... ५५३ की :मी : बार्डर से रात दिन ड्रग्ज़ की सप्लाई जारी है  ... रही सही कसर हमारे कैमिस्ट वीर पूरी कर देंदे नें !
सांप को दूध पिलाने की हमारी बहुत पुरानी रिवायत है  .... रिवायत भी युगों पुरानी ! हमारे पूर्वज़ सोम रस के रसिया थे  .... अफगानिस्तान में सोम लता की खेती बहुत थी और वे बड़े बड़े कलशों में सोम रस लाते और यहाँ से 'गो-धन ' हाँक ले जाते  .... किसी ने सोम लता की खेती करने की नहीं सोची  .... अब खैर हमारे राजनेता बहुत व्यवहारिक और चतुर हो गए हैं  ... उनकी कृपा से पंजाबी ' सोम -स्पिरिट 'गटकने में नंबर एक पर हैं  ....हमारी सरकार ही इस मुई स्पिरिट के सहारे  चल रही है - भले ही लड़खड़ा कर ! २०१४ में सरकार ने अपने पंजाबी गबरुओं को ३३. ६३ करोड़ बोतलें पिलाने का 'टिच्चा ' निश्चित किया था  ..... और हमारे नशेड़ी भाई चंडीगढ़ की भी गटक गए और बेचारे आंकड़ेबाज़ इस का श्रेय चण्डीगढ़ीओं के माथे मढ़ रहे हैं कि बाबू लोग औसतन पउआ रोज़ गटक जाते हैं - साथ में महिलाएं भी ! पंजाबीओं के मदिरा प्रेम को देखते हुए , हमने शराब को पंजाब का छटा दरिया का नाम दिया था  .... अब ड्रग्ज़ को क्या 'नाम' दें  .... ५ में से ३ दरिया तो पाक ले गया और हमारे २ सूखने के कगार पर हैं।
हमारे राजनैतिक आकाओं की कृपा और सहयोग से लगभग ६००० करोड़ का ड्रग रैकेट पूरी मुश्तैदी से चल रहा है  ... और इस पर भी हम पाक बार्डर पर धरना देते हैं !
मेरा मुंसिफ ही मेरा कातिल है
क्या मेरे हक़ में फैसला देगा !!!!!

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016


एल आर गांधी 


बापू ने पाकिस्तान को पाला !....... - कहते थे ! जब मेरा काम यहां ' ख़त्म' हो जाएगा , मैं पाकिस्तान चला जाऊंगा ! पाक को ज़िद्द करके ५५ करोड़ दिलवाए और जिन्ना की एक और मांग भी पूरी करने को तत्पर थे .... वह मांग थी वेस्ट और ईस्ट पाकिस्तान को जोड़ने के लिए ,भारत के बीचो बीच एक कॉरिडोर बनाने की .... यदि यह मांग पूरी हो जाती तो आज समस्त 'भारत ' अनगिनत टुकड़ों में बंट चूका होता ..... शुक्र है इससे पहले ही एक भारत माता के सपूत ने जिन्ना की हसरतों को 'ख़त्म' कर दिया।
चाचा को कौमनष्ट बहुत प्रिय थे .... एक घोर कौमनष्ट कृष्णा मेनन को देश की सुरक्षा का भार सौंप दिया .... यह वह शख्स था जिसने सबसे पहला 'जीप घोटाला' किया , इंग्लैण्ड के अपने एक मित्र को ८० लाख रूपए एडवांस दे दिए और फ़ौज़ के लिए जीपें पहुंची ही नहीं ..... देश कौमनिस्ट चीन से हार गया .... हज़ारों भारतीय फौजी शहीद हुए और हम हज़ारों मील मातृ भूमि गँवा बैठे।
गांधी -नेहरू के वंशजों ने भारत के अधिकाँश संस्थानों में बापू -चाचा के मुल्ले और कौमनष्ट बैठा दिए ,जो आज पूरे देश को बांटने में जुटे हैं ...... इन देश द्रोहियों से मातृ भूमि को मुक्त करवाने के लिए देश वासियों को एकजुट हो कर संघर्ष अपेक्षित है .... जय हिन्द 

रविवार, 14 फ़रवरी 2016

राष्ट्र विरोधी कुष्टमानसिकता

राष्ट्र विरोधी कुष्टमानसिकता

एल आर गांधी

गांधी -नेहरू का बोया बबूल का बूटा 'वट वृक्ष ' बन चूका है  ..... पिछले साठ बरस में इसकी 'कुष्ट मानसिक जड़ें ' सारे देश में इस कदर फ़ैल चुकी हैं कि बाहरी  शत्रु इनके आगे बौने पड गए हैं  ..... इसका साक्षात प्रमाण जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी प्रांगण में वाप पंथी ,कांग्रेस समर्थक छात्र संगठनो द्वारा राष्ट्र विरोधी प्रदर्शन है ,जिसमें भारत के खिलाफ और पाकिस्तान और आतंकवादियों के समर्थन में नारे लगाए गए और प्रदर्शन किया गया।  सबसे शर्मनाक बात तो यह है की अधिकाँश टीवी चैंनल और विपक्ष के नेताओं ने इन राष्ट्र विरोधी छात्रों का समर्थन किया।
नेहरू -गांधी ने ऐसा राष्ट्र द्रोह का बीजारोपण किया कि यह रोग देश को सही मार्ग दिखलाने वाले शिक्षा संस्थानों में भी फ़ैल गया - नेहरू के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय इसका जीता जगता दृष्टांत है  .... देश द्रोह की नींव बापू 'ढोंगी -बूढा '(नेहरू ही के अनुसार) ने रखी।  १३ जनवरी १९४८ को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पटेल की पहल पर एक  बिल पास  जिसमें पाकिस्तान को देय ५५ करोड़ की देनदारी पर रोक  लगा दी गई  ... क्योंकि पाकिस्तान ने एक तिहाई कश्मीर पर अवैध कब्ज़ा कर लिया था ताकि पाक पर दवाब बनाया जा सके  .... बापू को मंत्रिमंडल का यह निर्णय नागवार गुज़रा और वे कोप भवन में जा बैठे  ...उसी शाम को मंत्रिमंडल को  बापू के दबाव में अपना फैसला वापिस लेना पड़ा। ..पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति दिवालिया जैसी थी। .. ५५ करोड़ मिलते ही ब्रिटेन से हथियार खरीद लिए  ...भारत का रक्षा बजट उस वक्त महज़ ८३ करोड़ था।
हमारी सेनाएं पाक से कश्मीर खाली करवा रहीं थी ,मगर नेहरू ने १ जनवरी को युद्ध बंदी की घोषणा कर दी  और कश्मीर मसला यु एन ओ में ले गया  .... कश्मीर  के मुल्लो को खुश करने के चक्कर में धारा ३७० के तहत कश्मीर को विशेष दर्ज़ा दे डाला  ..... शेख अब्दुल्ला के झांसे में आ कर कश्मीर के लाल चौक से कश्मीरिओं को खुदमुख्तारी का हक़ देने की घोषणा तक कर डाली  ..... अब जे इन यु के वाम पंथी छात्रों के 'आज़ादी ' के नारों में और नेहरू की घोषणाओं में क्या अंतर है  ...
चीन को तिब्बत तश्तरी में सजा कर दिया  .... देश का रक्षामंत्री एक वाम पंथी कृष्णमेनन को बना दिया ,जिसने फ़ौज़ के लिए जीपों की खरीद में ८० हज़ार का घोटाला किया  ..... हम चीन से युद्ध में हज़ारो मील भूमि गवा बैठे  ... सारी संसद कृष्णमेनन का इस्तीफा मांग रही थी ,मगर नेहरू अपने चहेते के साथ खड़े थे ! मेनन नेहरू के पुराने खैरख्वाह थे ,जो इंदिरा और फ़िरोज़ खान को घेर कर तीन मूर्ती भवन लाए ,जब उन्होंने ब्रिटेन की
एक मस्जिद  में मेमुना बेगम बन कर निकाह कर लिया था , गांधी ने दोनों का वैदिक रीती से पूण: विवाह किया और 'गांधी ' नाम दिया  .....
गांधी -नेहरू ने भारत को अपने बाप की जागीर समझ रखा था  ... अपने निजी लाभ और नाम  के लिए देश में
राष्ट्र विरोधी ताकतों को पालने -पोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी !




सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

बापू का पाक प्रेम

बापू का पाक प्रेम

एल आर गांधी


जब मेरा काम यहाँ ख़त्म हो जाएगा ,मैं पाकिस्तान चला जाऊंगा ! बापू पाकिस्तान से बहुत प्यार करते थे  ..... इसी बेहद प्यार के चलते उनसे रहा न गया  ......  जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पटेल के आग्रह पर पाकिस्तान को दिए जाने वाले ५५ करोड़  बकाए पर रोक लगाने का प्रस्ताव पास किया  ,कारण था पाक द्वारा भारत के कश्मीर के एक बड़े भू भाग को हथिया लिया  ..... सरकार के इस फैसले से 'बड़ी सरकार ' खफा हो गई और जा बैठे कैकई के कोप भवन में  ..... शाम को सरकार फिर बैठी और अपना फैसला वापिस ले लिया  .... बापू खुश हुआ।
बापू सपने बहुत देखते थे  ...वैसे तो हमारे 'चाचा ' जी भी बहुत सपने देखते थे  .... कश्मीरियत ,चीन को तिब्बत दान , यू इन ओ की सुरक्षा सीट , नेता जी को देश से दूर रखने का सपना  .... सिर्फ अपना और अपने परिवार का नाम ' चारों ओर ' बाकी सब चरखे !
यदि गोडसे भाई ने बापू का वध न किया होता तो बापू अपना एक और सपना भी सच करके ही मानते ! बापू के प्रिय कायदे आज़म मुहम्मद अली जिन्नाह चाहते थे कि हिन्दुस्तान के बीचो बीच एक कॉरिडोर बनाया जाए  ... यह कॉरिडोर पश्चमी   पाक से  पूर्वी पाकिस्तान तक जाए  .... बापू को भी अपने दोनों बिछड़े भाईओं से मिलने में आसानी होगी ! बापू लोक सेवा संघ बना कर बाकी जीवन पाकिस्तानियों की सेवा में समर्पित करना चाहते थे  जिन्ना भी बापू से सहमत से प्रतीत होते थे  .... एक बार जब नेहरू ने जिन्ना के बम्बई निवास के बारे में पूछा तो उसने झट से जवाब दिया , मैं तो उस घर में आ कर रहूँगा ! बच्चों के चाचा 'मान' गए ! २६/११ को वे जिन्ना के भूत ही तो थे जिन्होंने मुंबई में बापू की लोक सेवा का सपना पूरा कर दिखाया !
पाक और बांग्ला देश से 'शान्ति दूतों' का जन सैलाब सँभालने में हमारी सुरक्षा एजेंसियां खून-पसीने से तर-ब-तर हैं  .... यदि बापू का कॉरिडोर बन जाता तो आज चाचू की काश्मीर समस्या बहुत बौनी प्रतीत होती  .... बापू के दिलहराज़ीज़ 'शांतिदूत ' पूरे हिन्दुस्तान में जन्नत-जेहाद ,हूरें -लौंडे  ..... आबे -हयात में डुबकियां लगा रहे होते  .... चाचा- बापू जन्नत या जहन्नुम से हूरों के साथ नीरा पीते हुए अपनी सहिषुणता और ब्रह्मचर्य सयम  की परीक्षा में लगे सब देख रहे होते !


शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

सैंडिल और जूते

सैंडिल और जूते

एल आर गांधी


सैंडिल के साथ साथ यदि खद्दर का गमछा भी पहन लिया होता , तो हम मान जाते कि बापू के पदचिन्हों पर चलने वाला कोई तो जिन्दा है ...आज भी !मफलर मैन  सैंडिल पहन कर भारत के 'महामना ' के भवन में फ्रांस के राष्ट्रपति के भोज में क्या चले गए  .... चर्चिल की माफिक एक अग्रवाल मॉडर्न गांधी से खफा हो गए।  यही नहीं जूतों की 'ढंग' की जोड़ी खरीदने के लिए ३६४ रूपए भेज दिए और वह भी देश की राजधानी के 'मालिक ' को। नसीहत भी दे डाली  .... अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में कुछ मानक होते हैं जिनका सम्मान करना चाहिए ,बापू के चेले को  ... अरे !  गोरे  अँगरेज़ तो बापू की बकरी की मैं -मैं भी सह गए थे मगर काले अँगरेज़ 'सैंडिल ' पर सटक  गए।
अब मफलर मैन भी तूँ डाल -डाल  मैं पात पात रायता फैला रहे है  .... केतली जी ने भरी कचहरी में क्या कह दिया कि केज़डी की न तो कोई इज्जत है और न ही करैक्टर  .... केज़डी जी ने भी भरी अदालत में दलील दे डाली  ... कि  एक लाख वोट से हारे हुए केतली की भी कोई इज्जत नहीं   .... मानहानि का मामला रफा-दफा किया जाए  ...... खुद मियां ३. ३७ लाख पर हारे थे  .... भूल गए !
अब मियां अपनी खांसी को काबू करें कि दिल्ली में फैला कूड़ा।  कुछ महीने तनख्वाह नहीं मिली तो क्या तूफ़ान आ गया  ... मुख्य मंत्री क्या मोदी जी की माफिक फुर्सत में हैं जो झाड़ू उठा कर स्वच्छ भारत गुनगुनाते फिरें  ... आड़-इवन ,प्रदूषण , ला -आडर  ऊपर से मान हानि के झमेले  ... सब मिले हुए हैं जी   काम ही देते नहीं करने !

शनिवार, 30 जनवरी 2016

चरखागिरी

चरखागिरी

एल आर गांधी

 बचपन से हमें 'सुनियोजित ' ढंग से 'चरखा ' बनाया गया। नर्सरी से हमें पढ़ाया  गया कि  कैसे गांधी जी नें बिना शस्त्र  या शास्त्र के  मात्र ' चरखे ' की बदौलत हिंदुस्तान को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करा दिया  ..... और हम भी अबोध बालक की भांति गुनगुनाते रहे   ..... ले दी हमें आज़ादी बिना खडग बिना ढाल ,साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल !    उधर बापू ने 'सारे ज़हाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा  ...... हिंदी हैं हम वतन है हिन्दुस्ताँ  हमारा ! हर स्टेज पर गा गा  कर इसे राष्ट्रिय गीत बना डाला। गीत के लेखक और पाकिस्तानी सोच के संस्थापक मौलाना इकबाल ने अपना गीत ही बदल दिया ' ..... मुस्लिम हैं हम वतन है सारा जहाँ हमारा !' फिर भी मुस्लिम तुष्टिकरण की 'कुष्ट -मानसिकता ' से पीड़ित  बापू  .... वही  राष्ट्र विरोधी गीत गवाते रहे।
जिन्ना ताउम्र बापू को चरखा बनाते रहे और वे बनते रहे  ... कभी उसे कायदेआज़म की उपाधि दी कि जिन्ना खुश हो जाए  ... फिर उसे मनाने के लिए उससे १४ बार मिले  ....आखिर में धमकी दी  .... पाकिस्तान मेरी डेड बॉडी पर बनेगा  .... न खुशामद काम आई और न धमकी  ... जिन्ना ने  पाक स्थापना भी १४ अगस्त ही मुकर्र की। तुष्टिकरण की पराकाष्ठा तो तब हो गई जब बापू कोप भवन में बैठ कर ' चरखा 'घुमाने  लगे ,ज़िद थी ! कि पाक को 'बकाया' ५५ करोड़ अदा किया जाए , जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने कश्मीर पर पाक कब्ज़े के विरोध में रोक दिया गया था। परिणामत : गोडसे ने बापू  को  प्रतिज्ञा के  अंजाम तक पहुंचा दिया।

बापू की साँसे थम गई मगर  'चरखागिरी  ' बदस्तूर जारी रही  .... देश को चरखे की मानिंद घूमने की अबकी बारी थी 'चाचा ' नेहरू की  .... हमें समझाया गया कि देश को आज़ाद करवाया 'नेहरू-गांधी ' परिवार ने  ... बाकी देश पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले तो विद्रोही -आतंकवादी थे  ... नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस की जासूसी की गई  ... आज़ादहिंद फ़ौज़ के सैनिको को नेहरू ने मान्यता देने से साफ़ इंकार कर दिया।
वक्त के साथ साथ नेहरू -गांधी की पारिवारिक पार्टी ने चरखे को ही चलता कर दिया  ..... चुनाव चिन्ह और झंडे पर से चरखा नदारद हो गया  ... किसानों को लुभाने को 'दो बैल ' छाप दिए  .... फिर इनका स्थान ले लिया 'गाय -बछड़े  ने  ... पार्टी का नाम भी बदल कर 'इंदिरा कांग्रेस ' हो गया और निशान हो गया हाथ  ...... वक्त के साथ बापू  का चरखा भले ही किसी 'यादगाह ' में धूल फांक रहा हो  .... पर देश को चरखा गिरी बदस्तूर घुमा रही है  ......'हे ' राम





आड -इवन जश्न

एल आर गांधी

नेता जी ने अभी आड -इवन के जश्न का आगाज़ ही किया था कि किसी सुंदरी ने पिचकारी से रंग दिया  ..... झट से नेताजी झल्लाए 'होली कब है  ....कब है होली ! हम होली पर गीली होली खेलने के सख्त खिलाफ हैं  .....गीली होली से हमें  ठण्ड लग जाती है और महीनों खांसी नहीं जाती  ... हमें  पता होता कि आज होली मनाई जाएगी तो हम  यह आड -इवन   किसी और दिन मना लेता  .... भइ यह भी कोई बात हुई ये भाजपा वाले होली के नाम पर दिल्ली के पानी को बर्बाद करने पर तुले हैं  .... दिल्ली में पानी की किल्लत को ये क्या समझें ! यह सरा -सर साज़िश है  .... इतनी ठण्ड में गीला करके रख दिया  .....
तभी दूसरे  माइक से सन्सोधिया जी ने जब घोषणा की कि यह केजरी जी की हत्या का प्रयास है  .... काली सियाही की एक एक बूँद का हिसाब लिया जाएगा  .... तब जा के माज़रा समझ में आया कि यह तो किसी आपिये ने ही भंग में रंग दे मारा  ..... नेताजी ने शालीनता का पुराना चोला ओढ़ कर 'घोषणा 'की कि 'बेरंगी ' को जाने दिया जाए  .

आड - इवन की महान उपलब्धियों का बखान बिना व्यवधान पुण् शुरू किया गया  ... आड़ -इवन की अभूत पूर्व सफलता को भांपते हुए अब इसे बड़े पैमाने पर चलाया जाएगा  ..... लोगों की असुविधाओं के अध्ययन के उपरांत इस फार्मूले को 'लिंगोनुसार ' आज़माया जाएगा ! एक दिन पुरुष और एक दिन स्त्री  .... रेप कंट्रोल में व्यस्त पुलिस की मौजां ई मौजां  ... बच्चे मन के सच्चे कभी भी किसी के भी साथ  .... किन्नरों और राजनेताओं पर कोई पाबंदी नहीं !

बुधवार, 13 जनवरी 2016

मंगलवार, 5 जनवरी 2016

संथारा

एल आर गांधी


जब से तेरी ऊँगली पकड़ कर चलने की ठानी है  .... जिंदगी यकायक 'जो है सो है ' की माफिक कटी पतंग सी हुई जा रही है  ..... बिना डोर के आकाश की नित नई उचाइयां छूने को बेताब  .... बेपरवाह ! हवा का झोंका जिस ओर लेजाए  ..... वक्त के साथ ही 'बस' ऊपरी हवा में परवाज़ पर हो लिए हैं  .... भय मुक्त - शोक मुक्त -लालसा मुक्त , मुक्ति की बंदिशों से भी मुक्त  .... कहूँ तो मुक्ति से भी मुक्त   ..... अंत: करण में अनंत अमृत कलश लबालब भर कर छलक रहा है  .. सूखे झरने की  मानिंद बूँद बूँद धीरे धीरे अग्रसर है  .... अपनी ऊँगली को थामे हाथ में लुप्त हो जाने को  ...... मृत्यु की ऊँगली पकड़ कर चलना सीखो  ...... संथारा  है।