मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

मूर्ख- नपुंसक या बौधिक-किन्नर

 मूर्ख- नपुंसक या बौधिक-किन्नर 
एल.आर.गाँधी. 

हमारे सेकुलर शैतानों को विश्व भर में नए नए ' अलंकारों ' से नवाज़ा जा रहा है. सिंगापूर के एक वृष्ट अधिकारी ने अमेरिकियों के साथ एक बैठक में भारत को 'मूर्ख दोस्त' कहा . इसका खुलासा विक्किलीक्स में हुआ . हमारे विदेशी और देसी राजनेताओं को इस का कोई मलाल भी नहीं. अमेरिकन अधिकारिओं के गुप्त सन्देश नित नए नए रहस्योदघाटन कर रहा है विकिलीक्स . २६/११ के आतंकी हमले के बारे में अमेरिका को पूर्व सूचना थी फिर भी उसने हमारे साथ उस महत्तवपूर्ण जानकारी को 'साँझा ' करने की जेहमत  नहीं उठाई. और हम हर आतंकी हमले की शिकायत अमेरिका से ऐसे किये जाते हैं जैसे कोई लाचार- बेबस बार बार मार खा कर आपने भगवान् को याद करता है. अमेरिका को हम विश्व आतंक वाद के खिलाफ अपना चिर सहयोगी मान बैठे हैं और यह भूल गए की अमेरिका के हित पाक के साथ जुड़े हुए है . फिर मूर्ख और नपुंसक का साथ देता भी कौन है ? 
वर्षों से हमारे गृह मंत्री जी  चिल्ला चिल्ला कर आसमान सर पर उठाए हुए हैं कि पाक को २६/११ के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाही के लिए कहा जाए . पाक के यहाँ पनाह लिए आतंकियों  को हमारे सपुर्द किया जाए. अरे भाई जिन आतंकियों को हमारे उच्चतम न्यायालय ने फांसी पर लटकाने की सजा सुना रखी है , पहले उनको तो निपट लो पाक में बैठे आतंकियों को mangwa कर क्या aachaar daloge उनका ? .  एक दशक बीत गया मगर  अफज़ल मियां लाईन में लगे हैं ,कभी शीला जी के पास फाईल अटक जाती है और अब चिदम्बरम  जी के यहाँ पड़ी है. १३ दिसंबर को देश की संसद और सांसदों  की हिफाजत में शहीद हुए जवानों को श्रधांजलि  दी गई और हमले के एक मात्र सजायाफ्ता 'अफज़ल' मियां की फांसी में हो रही देरी के बारे में जब हमारे ग्रह मंत्री 'धोती-धारी' श्री श्री पल्निअप्पम चिदम्बरम से बी.जे.पी नेता सुषमा स्वराज ने पूछा  तो वे बिफर गए , बोले  ' ये लोग मूर्ख हैं या बहरे होने का नाटक कर रहे हैं ,कितनी बार हमने समझाया है इस विषय में .  उन्होंने सरकार की मजबूरी का विस्तार से खुलासा किया. फांसी के सभी केस पंक्ति वार राष्ट्रपति जी को भेजे जाते है . महामहिम ने ५-६ केसों पर हुकम पास भी कर दिया है. एन.डी.ए.काल में जीरो ,उनसे पूर्व शिवराज पाटिल के साढ़े चार साल में २  और उनके २ साल के कार्यकाल में ५-६ . वाह क्या उपलब्धि है ? इस प्रकार अफज़ल का नंबर आते आते तो तीन दशक और गुज़र जाएंगे . जब बड़े भाई का नंबर १५ साल बाद आयेगा तो छोटे मियां  'कसाब' तो जेल में ही बिरियानी  खाते खाते 'अल्लाह' को प्यारे हो जाएंगे.! हाँ यह बात दीगर है कि कोई जहाज़ अगवा हो जाए और हमारे मंत्री जी की रोज़ रोज़ के विपक्षी उलाहनों से जान छूटे.       
नूरा कुश्ती जारी है. गृह मंत्रालय राष्ट्रपति भवन को 'फांसी' के केसों पर हुकम पारित करने के लिए आधा दर्ज़न 'रिमाईडर' भेज चूका है उधर महामहिम के पास और भी बहुत से काम है ,फिर कोई समय सीमा भी नहीं ! जब तक पिछले केस नहीं निपट जाते तब तक और केस भेजने का कोई   ' तुक ' भी नहीं बनता.  . जब दिल्ली की मुख्य मंत्री 'अफज़ल की फ़ाइल ४-५ साल रख सकती है फिर प्रतिभाजी तो महामहिम हैं उनके पास तो असीम शक्तियां है और वह तो फांसी की सजा मुआफ  करने को भी सक्षम है भले ही 'लोक तंत्र के मंदिर संसद ' को उड़ने का अपराधी ही क्यों न हो. अभी 'अफज़ल मियां' की फ़ाइल तो 'धोती-धारी' चिदम्बरम के पास पुराने पापियों कि लम्बी कतार के आगे खिसकने के इंतजार में पड़ी है.
 कितनी बहादुरी के साथ लड़ रहे है 'आतकवाद' के खिलाफ हमारे यह सेकुलर शैतान फिर भी ये दुनिया वाले न मालुम क्यों इनको 'मूर्ख- नपुंसक या बौधिक किन्नर ' के संबोधनों से नवाजे जा रहे हैं ? अभी तो भगवा आतंक इन्हें अंदर से खाए जा रहा है. 

2 टिप्‍पणियां:

  1. मूर्ख और नपुंसक का साथ देता भी कौन है ? सही कहा...

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  2. आलेख बहुत ही सटीक है। बधाई। कुछ अशुद्धियां है उन्‍हें दुरस्‍त कर लेंगे तो पढने में अच्‍छा लगेगा।

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