गुरुवार, 2 जून 2011

साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक --सैकुलर शैतानो की शरियत -शरारत ?

साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक
सैकुलर शैतानो की शरियत -शरारत  ?

एल आर गान्धी

सेकुलर जाजिया( हज सब्सिडी) के बाद , देश के बहुसंख्यक समुदाय 'हिन्दुओं' पर, सेकुलर शरियत कानून लागू होने जा रहा है. इस  "सांप्रदायिक एवं लक्षित हिन्सा " कानून का मसौदा सोनिया की सेकुलर शैतान मंडली (नाक) द्वारा तैयार किया जा रह है। इस नाक मण्डली में तिस्ता सितल्वार् ,अरुणा राय  ,शब्नंम हष्मि और सैयद शहबुदीन् जैसे सदस्यो  को लिया गया है ताकि संप्र्दायिक हिन्सा के नाम पर 'हिन्दुओ '  पर 'सैकुलर शरियत' लागु की जा सके । मसौदे में किसी भी प्रकार की साम्प्रदायिक हिन्सा के लिये 'बहुसंख्यक- हिन्दुओ' को ही हर हाल में दोषी माना गया है।
दन्गो में अल्पसंख्यक महिला के बलात्कार पर कडी सज़ा का प्रावधान है - अर्थात हिन्दु महिला का बलात्कार कोइ अपराध् नही ? द्न्गा हमेशा बहुसंख्यक (हिन्दु) द्वारा फ़ैलाया  जाता है ? अल्पसंख्यक को कोइ सज़ा  नही ? अल्प्सन्ख्यको के खिलाफ़् 'घृणा अभियान ' अपराध् ! मगर बहुसन्खयक के खिलाफ़् ? एसे नियम कायदे तो केवल् 'पवित्र कुर्रान की शरियत में ही मिलते हैं। पाक में शरियत के कानून ' जज़िया , ईश् निन्दा,दीयत् आदि के ज़रिये  अल्प अन्ख्यक विशेषतय हिन्दुओ को प्रताडित किया जाता है ताकि वे इस्लाम कबूल ले  या भाग जाए अन्यथा  काफ़िर् को मारना  तो शरियत में सबाब् का काम है ही । आज पाक में हिन्दु २४% से घट कर  मात्र   डेढ%  रह गया है। यही काम अब देश के सैकुलर शैतान इस कानून के ज़रिये करने जा रहे हैं ताकि मुसलमानो के वोट हासिल किये जा सके।
ऐसे कानून निश्चय ही संविधान की मूल धारणा के खिलाफ़् हैं - इससे विभिन्न सांप्रदायो में जहा एक ओर आपसी मतभेद बढते हैं, दूसरी ओर समान नागरिक संहिता का भी उल्लन्घन होता है। हमारे संविधान के रचयिता डा: भीम राव   अम्बेदकर के इस्लाम और मुस्लिम समाज  के बारे में विचार ऐतिहासिक धरातल पर खरे उतरते हैं - " हिन्दुओ  को अपना भाइ- बन्धु मानने का इस्लाम में कोइ मौका नही। आक्रामक मनोवृति मुस्लिम की प्रकृति में ही विध्य्मान है। हिन्दुओ की दुर्बलता का लाभ उठा कर गुण्डागर्दी करना उनका स्वभाव है"।
सबसे ताज़ा उद्हारन गुजरात  दन्गो का है। अब तक सभी सैकुलर शैतान प्रचारित करते रहे कि गोधरा ट्रेन में ५६ कार सेवको का जल कर मरना महज़् एक हादसा था और बाद में प्रतिक्रिया सवरूप् मुसलिम समुदाय के खिलाफ़् हुइ हिन्सा - राज्य प्रायोजित थी। अब न्यायालय में यह साबित हो गया कि कारसेवको को मुस्लिम दन्गयियो ने घेर कर आग लगायी  और जिन्दा जला दिया। अब सभी  सैकुलर शैतान चुप हैं । इन संपर्दायिक दन्गो में हिन्सा का शिकार तो 'इन्सानियत' ही हुइ । दन्गो के शिकार बेगुणाह्  भारतीय थे उनको हिन्दु या मुस्लिम वोट  मान कर राजनीतिक रोटिया सेक्ने वाले  नेताओ को आवाम् इतिहास के गर्त में धकेल देगा।             
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2 टिप्‍पणियां:

  1. निश्चित रूप से इसका विरोध होना चाहिये... और अल्पसंख्यक है कौन...

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  2. "साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिन्सा अधिनियम-२०११" हिन्दुओं के देश में हिन्दुत्व के सर्वनाश लिये काला कानून.. इसका पुरजोर विरोध करें.. जय भारत..

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