सोमवार, 19 अक्तूबर 2015


अर्विंद्र केजरीवाल's photo. 
  एल आर गांधी 
महान दार्शनिक  महृर्षि अरविन्द की ऐतिहासिक चेतावनी को दरकिनार कर 'गांधी-नेहरू ' जैसे धृतराष्ट्रों का अनुसरण कर देश को सिक्कुलर वाद के अन्धकूप में धकेलने का परिणाम हमारे सामने है  …कश्मीर में शरिया लागू है 
मुसलमान देश का संविधान और कानून मानने को तैयार नहीं। देश की रक्षा में शहीद फौजी को ५ लाख  … गाए हत्या में मारे गए मुसलमान को ४५ लाख ,४-४ फ़्लैट , नौकरी अलग से  .... ऐसी शरिया तो इस्लामिक देशों में भी  देखने को नहीं   मिलती। इस्लामिक आतंक के शिकार भारतियों को २-५ लाख और समझौता एक्सप्रेस में अल्लाह को प्यारे हुए पाक यात्रियों को १७ लाख से भी अधिक। ६९ साल पूर्व 
हिन्दू-मुस्लिम का अनुपात १२ -१  का था  … आज  ६-१ रह गया  … वह दिन दूर नहीं जब भारत    दारुल हरब से दारुल इस्लाम बन जाएगा  और हिन्दुओं का हाल वैसा ही होगा जैसा पाकिस्तान में है। 
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महर्षि अरविन्द 
हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं  होना चाहिए  । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । ।
ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६

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