गुरुवार, 22 सितंबर 2011

कतार में राज कुमार

 कतार में  राज कुमार 
    एल आर  गाँधी 



राजमाता दुःखी है  ..... दुःखी है मुए मोदी  से  ..... मुए ने मेरे फूल से 'लाल' को लाइन में लगा दिया  ..... पिछली पांच पीढ़ियों , घियासुदीन से अब तक , किसी तीसमारखाँ में हिम्मत नहीं थी ,राज परिवार के किसी राज कुमार को आम जनता और वह भी गरीब -गुरबों की लाइन में लगा दे। 
हमने तो अपने राज में करीब -करीब गरीबी पर विराम लगा दिया था।  हमारे योजना आयोग के सर्वे -सर्वा सरदार मोंटेक सिंह जी ने तो अपने ३५ लाख के 'जनाना- मर्दाना ' से फारिग हो कर साफ़ कर दिया था कि ३२/- में शहरी और २६/- में ग्रामीण भर पेट खाता है  ..... किसी की क्या मज़ाल कोई उन्हें ग़रीब कह कर अपमानित करे। 
यह तो  मोदी की सोची समझी साजिश है ! १००० -५०० के नोट यका -यक  और वह रात के १२ बजे बंद करके 'बेचारे ' गरीबों को लंबी-लंबी लाइनों में धक्के खाने को मज़बूर कर दिया  !  महज़ ३२/- रूपए और २६/- रुप्पली में भर पेट खाने  वाला मजदूर आज १०००-५०० के नोटो के लिए लाइन में धक्के खाने को मजबूर है।  एक हमारा राज था जब कुछ लोग महज़ १२ रूपए में पेट भर खा कर हज़म करने को 'हाजमोला ' चूसते थे   हमारे राज बब्बर  मियां ने तो साफ़ - साफ़ अपनी आँखों से देखा था 'मुम्बई' में ! ५/- रूपए में भर पेट खाते हमारे एक एम्.पी ने अपनी आँखों से देखा वह भी   शीला की दिल्ली में !
लगता है  ५०० - १००० के नोटधारी लोग -बाग़ भी अब  भर पेट 'खाने'  को तरसते हैं  ..... इनका 'दुःख' राजकुमार से देखा  नहीं गया  ...... बस लग गए लाइन में !

2 टिप्‍पणियां:

  1. वह रे ग़ालिब तेरी फाका मस्तियाँ
    वो खाना सूखे टुकड़े भिगो कर शराब में


    आपके लेख ,आपका चिंतन समझ नहीं आता की आपकी तारीफ़ करूँ या ऐसे मंजर पर आंसूं बहाऊ

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  2. सही कह रहे हैं आप, सरकार बेचारी और करे भी क्या? कानून बना दिये, ये कम है? :)

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