शुक्रवार, 4 मार्च 2011

पाक ध्वज में काल कल्वित- सफ़ेद रंग

पाक ध्वज में काल कल्वित- सफ़ेद रंग 
   एल. आर. गाँधी 

पाक  के  इकलौते अल्पसंख्यकों के मंत्री शाहबाज़ भट्टी की दिन दिहाड़े हत्या कर पाक के कट्टरवादी मुसलामानों ने सारे विश्व को एक स्पष्ट सन्देश दे दिया है. यह सन्देश है की पाक में कुरआन और मुहम्मद को न मानाने वालों के लिए कोई स्थान नहीं. भट्टी पाक के एक मात्र ईसाई मंत्री थे. भट्टी  ईशनिंदा क़ानून के मुखालिफ थे जिसे पाक में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने में प्रयुक्त किया जाता रहा है. इसे कुफ्र क़ानून से भी जाना जाता है. पाक में इस्लाम के पैरोकार कुफ्र और काफ़िर को मिटाने वाले को गाजी कह कर सम्मानित करते  है. पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या करने वाले बाड़ी  गार्ड को भी गाजी के रूप में सम्मानित किया गया.    
एक और तो पाक के प्रधान मंत्री युसूफ रज़ा गिलानी अल्पसंख्यकों की सलामती के बड़े बड़े दावे करते हुए फरमा  रहे हैं कि पाक के राष्ट्र ध्वज का सफ़ेद हिस्सा अल्पसंख्यकों का प्रतीक है. दूसरी ओर आंतरिक  सुरक्षा मंत्री रहमान मालिक साफ़ साफ़ शब्दों में आगाह कर  रहे हैं कि 'हमारे मुल्क में सिविल वार से खून खराबा होना तय है. पिछले दिनों पाक के ६६ वर्षीय हिन्दू विधायक ने पाक से भाग कर भारत में शरण ली. पाक में कुफ्र के नाम पर बढ़ रही अल्पसंख्यकों की कठिनाईयों  पर ईसाई सांसद अकरम मसीह गिल ने कहा कि सबसे कठिन दौर में हैं अल्पसंख्यक- उन्हें अंधी गली में धकेला जा रहा है. प्रसिद्ध लेखिला तसलीमा नसरीन ने तो यहाँ तक कह दिया कि सभी अल्पसंख्यकों को पाक छोड़ देना चाहिए. 
ईशनिंदा या कुफ्र के क़ानून के तहत जन . जिया उल हक़ के समय से अब तक ६०० काफिरों पर केस दर्ज हुए - कुछ को तो जेल में ही मौत के घाट उतार दिया गया. पाक में आम हिन्दू या ईसाई की तो बात छोडो शाहबाज़  भट्टी  और अकरम मसीह गिल जैसे मंत्री व् सांसद भी पाक के मुस्लिम समाज में अपने ईसाई नाम के साथ नहीं रह सकते उन्हें भी मुस्लिम नाम रखने पड़ते हैं.      
गत छह दशकों में पाक में इस्लाम और मुहम्मद के नाम पर अल्पसंख्यकों पर इस कदर जुल्मोसितम ढाए गए की लगभग ३५ मिलियन अल्पसंख्यक यातो मार दिए गए या फिर अपनी जान बचाने के लिए मुसलमान हो गए और बहुत सारे पाक छोड़ भाग गए. आंकड़े गवाह हैं - १९४७ में जब जिन्ना ने सेकुलर इस्लामिक राज्य की स्थापना की और अल्पसंख्यकों के जान ओ माल और धर्म की पूरी हिफाज़त का वायदा किया तो उस वक्त पाक में २४% अल्पसंख्यक थे और कुल आबादी थी ३० मिलियन . २०१० आते आते आबादी तो हो गई १७० 
मिलियन  अर्थात ५ गुना से अधिक और अल्प संख्यक रह गए मात्र   ३% जिसमें १.५% हिन्दू और १.५% ईसाई हैं और यह संख्या भी तेज़ी से घट रही है. 
मानवाधिकार के ठेकेदार और भारत के सेकुलर शैतान 'हिन्दुओं   और ईसाइओ   '  पर पाक में हो रहे अमानवीय  अत्याचारों  पर अपराधिक  चुप्पी  साधे  हुए हैं . और तो और पाक में ईश  निंदा  के नाम पर हो रही राजनैतिक हत्याओं  पर भारत के किसी  भी कांग्रेसी  या कौम्नष्ट  ने एक शब्द  नहीं बोला  ..... पांच  राज्यों  में होने जा रहे चुनावों में कहीं मुस्लिम वोट बैंक  न फिसल जाएं !!!!!!!  


2 टिप्‍पणियां:

  1. कथित सेक्युलरों को यह सब नहीं दिखता साहब!

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  2. भारतीय सेकुलरिज्म सिर्फ मुसलमानों और ईसाइयों के लिये है..

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