शनिवार, 17 जुलाई 2010

बादल साहेब के नौं रतन ....

बादल साहेब के नौं -रतन...
पंजाब भयंकर बाढ़ की चपेट में है और बदल साहेब के नौं रत्तन स्काट लैंड की तफरी पर गए हैं . सरकार के पास बाढ़ पीड़ितों के लिए धन का भारी 'टोटा '(कमीं) है , फिर भी अपने आठ विधायकों के लिए स्काट लैंड भ्रमण का जुगाड़ बना ही लिया गया. ये विधायक स्काट लैंड जा कर पता करेंगे की कैसे शराब के कारखानों से निकलने वाले प्रदूषित जल से बचाव किया जाए . अब लोग यह न कहें की इन विधायको के पास कौन सी तकनिकी योग्यता है जिस के आधार पर ये प्रदूषण निरोधक जानकारी समझ पाएंगे . इस का भी हल तलाश लिया गया एक एक्सियन को भी अपने दल में शामिल कर हो गए 'बदल साहेब के नौं रतन'.
अब विरोधी दल कांग्रेस को भला कब हजम होती यह 'बादल नीति' , लगे विरोध जताने -पंजाब आसमानी बादलों की 'कृपा ' से बाढ़ में डूबा जा रहा है और ज़मीनी बादल साहेब के मंत्री आसमान में उड़ रहे हैं . इन्हें किसानो की और उनकी फसल की कोई प्रवाह नहीं . और तो और कांग्रेस के कैप्टन -महाराजा अमरेन्द्र सिंह भी यका यक कहीं से प्रकट हो गई और लगे किसानों की बदहाली पर आंसू बहाने -फसलें खराब हो रहीं हैं -गरीब दाने दाने को मोहताज़ है -यह कैसा बादल राज़ है. कैप्टन साहेब के इस रुदन पर हमारी भी आँखें रुदाली हो उठीं ! पिछले दिनों किसी पत्रकार ने खुलासा किया की पंजाब का लाखों टन आनाज खुले आसमान के नीचे सड रहा है और आनाज की संभाल के लिए बनाये गए सरकारी 'वेयर हाउसिस' शराब के ठेकेदारों को गोदाम के तौर पर लीज़ पर दे रखे हैं. बाद में राज़ खुला तो 'कैप्टन साहेब की कलई भी खुल गई. ये गोदाम कैप्टन साहेब ने अपने मुख्या मंत्री काल में अपने चहेते 'शराब माफियाओं 'को औने पौने दामों पर लीज़ पर दिए थे. यह है कैप्टन साहेब का किसान और उसकी फसल के प्रति प्रेम ?मज़े की बात तो यह है बादल साहेब के इन नौं रत्नों में काग्रेसी विधायक भी हैं -यानि की हमाम में सभी नंगे हैं !
केंद्र ने राज्य सरकार को आपदा प्रबंधन के लिए २३१६.४६ करोड़ की राशि दे रखी है. फिर भी बाढ़ में घिरे किसानों को सरकारी मदद के नाम पर कोरे आश्वासनों के अतिरिक्त कुछ नहीं . थोड़ी बहुत सहायता संव्यमेवी संस्थाओं द्वारा पहुंचाई जा रही है. सबसे अधिक प्रभावित पटियाला ,मनसा और संगरूर जिलों में ३०० मकान गिरे हैं . अब सरकारी सहायता के तौर पक्के मकान के लिए २५०००/- और कच्चे मकान के लिए १००००/ की राशि निर्धारित है. और भूखे इंसान के लिए २०/- का खाना . आज की मैह्गाई में १००० ईंट का भाव ही ३५००/ है ...अब जिन बाढ़ पीड़ितों का सब कुछ लुट गया इस सहायता राशि- वह भी यदि मिल पाई ...तो क्या खाएंगे और क्या बनायेंगे?
रही बात हमारे जन प्रतिनिधियों की उनका 'सोम रस प्रेम ' किसी से छिपा नहीं. पहले शराब माफिया कैप्टन साहेब के साथ था और अब बादल साहेब के साथ. तभी तो बाढ़ में डूबे प्रदेश के 'आधुनिक रजवाड़े' बाढ़ के पानी की चिंता छोड़, शराब के पानी की जांच के लिए 'स्काट लैंड 'के लिए उड़ गए हैं .
हम तो समझे थे कि बरसात में बरसेगी शराब
आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया ......

3 टिप्‍पणियां:

  1. जमीनी बादल और आसमानी बादल दोनों में बेशर्म कौन ? जमीनी बादल |आसमानी बादल ने अपनी मर्यादा नहीं छोड़ी है |

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  2. यह भारत देश है गांधी जी, यहां जो भी घटिया से घटिया काम कर सकता है फुल बेशर्मी के साथ वही बड़ा से बड़ा सम्मान और पद पाने के योग्य होता है.

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  3. भाई आपने तो चोर नहीं चोर की माँ को ही मार दिया ऐसा आइना दिखाया है की शर्म से ही डूब मरेंगे गर किसी में जरा भी गैरत होगी तो

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