रविवार, 14 फ़रवरी 2016

राष्ट्र विरोधी कुष्टमानसिकता

राष्ट्र विरोधी कुष्टमानसिकता

एल आर गांधी

गांधी -नेहरू का बोया बबूल का बूटा 'वट वृक्ष ' बन चूका है  ..... पिछले साठ बरस में इसकी 'कुष्ट मानसिक जड़ें ' सारे देश में इस कदर फ़ैल चुकी हैं कि बाहरी  शत्रु इनके आगे बौने पड गए हैं  ..... इसका साक्षात प्रमाण जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी प्रांगण में वाप पंथी ,कांग्रेस समर्थक छात्र संगठनो द्वारा राष्ट्र विरोधी प्रदर्शन है ,जिसमें भारत के खिलाफ और पाकिस्तान और आतंकवादियों के समर्थन में नारे लगाए गए और प्रदर्शन किया गया।  सबसे शर्मनाक बात तो यह है की अधिकाँश टीवी चैंनल और विपक्ष के नेताओं ने इन राष्ट्र विरोधी छात्रों का समर्थन किया।
नेहरू -गांधी ने ऐसा राष्ट्र द्रोह का बीजारोपण किया कि यह रोग देश को सही मार्ग दिखलाने वाले शिक्षा संस्थानों में भी फ़ैल गया - नेहरू के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय इसका जीता जगता दृष्टांत है  .... देश द्रोह की नींव बापू 'ढोंगी -बूढा '(नेहरू ही के अनुसार) ने रखी।  १३ जनवरी १९४८ को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पटेल की पहल पर एक  बिल पास  जिसमें पाकिस्तान को देय ५५ करोड़ की देनदारी पर रोक  लगा दी गई  ... क्योंकि पाकिस्तान ने एक तिहाई कश्मीर पर अवैध कब्ज़ा कर लिया था ताकि पाक पर दवाब बनाया जा सके  .... बापू को मंत्रिमंडल का यह निर्णय नागवार गुज़रा और वे कोप भवन में जा बैठे  ...उसी शाम को मंत्रिमंडल को  बापू के दबाव में अपना फैसला वापिस लेना पड़ा। ..पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति दिवालिया जैसी थी। .. ५५ करोड़ मिलते ही ब्रिटेन से हथियार खरीद लिए  ...भारत का रक्षा बजट उस वक्त महज़ ८३ करोड़ था।
हमारी सेनाएं पाक से कश्मीर खाली करवा रहीं थी ,मगर नेहरू ने १ जनवरी को युद्ध बंदी की घोषणा कर दी  और कश्मीर मसला यु एन ओ में ले गया  .... कश्मीर  के मुल्लो को खुश करने के चक्कर में धारा ३७० के तहत कश्मीर को विशेष दर्ज़ा दे डाला  ..... शेख अब्दुल्ला के झांसे में आ कर कश्मीर के लाल चौक से कश्मीरिओं को खुदमुख्तारी का हक़ देने की घोषणा तक कर डाली  ..... अब जे इन यु के वाम पंथी छात्रों के 'आज़ादी ' के नारों में और नेहरू की घोषणाओं में क्या अंतर है  ...
चीन को तिब्बत तश्तरी में सजा कर दिया  .... देश का रक्षामंत्री एक वाम पंथी कृष्णमेनन को बना दिया ,जिसने फ़ौज़ के लिए जीपों की खरीद में ८० हज़ार का घोटाला किया  ..... हम चीन से युद्ध में हज़ारो मील भूमि गवा बैठे  ... सारी संसद कृष्णमेनन का इस्तीफा मांग रही थी ,मगर नेहरू अपने चहेते के साथ खड़े थे ! मेनन नेहरू के पुराने खैरख्वाह थे ,जो इंदिरा और फ़िरोज़ खान को घेर कर तीन मूर्ती भवन लाए ,जब उन्होंने ब्रिटेन की
एक मस्जिद  में मेमुना बेगम बन कर निकाह कर लिया था , गांधी ने दोनों का वैदिक रीती से पूण: विवाह किया और 'गांधी ' नाम दिया  .....
गांधी -नेहरू ने भारत को अपने बाप की जागीर समझ रखा था  ... अपने निजी लाभ और नाम  के लिए देश में
राष्ट्र विरोधी ताकतों को पालने -पोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी !




सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

बापू का पाक प्रेम

बापू का पाक प्रेम

एल आर गांधी


जब मेरा काम यहाँ ख़त्म हो जाएगा ,मैं पाकिस्तान चला जाऊंगा ! बापू पाकिस्तान से बहुत प्यार करते थे  ..... इसी बेहद प्यार के चलते उनसे रहा न गया  ......  जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पटेल के आग्रह पर पाकिस्तान को दिए जाने वाले ५५ करोड़  बकाए पर रोक लगाने का प्रस्ताव पास किया  ,कारण था पाक द्वारा भारत के कश्मीर के एक बड़े भू भाग को हथिया लिया  ..... सरकार के इस फैसले से 'बड़ी सरकार ' खफा हो गई और जा बैठे कैकई के कोप भवन में  ..... शाम को सरकार फिर बैठी और अपना फैसला वापिस ले लिया  .... बापू खुश हुआ।
बापू सपने बहुत देखते थे  ...वैसे तो हमारे 'चाचा ' जी भी बहुत सपने देखते थे  .... कश्मीरियत ,चीन को तिब्बत दान , यू इन ओ की सुरक्षा सीट , नेता जी को देश से दूर रखने का सपना  .... सिर्फ अपना और अपने परिवार का नाम ' चारों ओर ' बाकी सब चरखे !
यदि गोडसे भाई ने बापू का वध न किया होता तो बापू अपना एक और सपना भी सच करके ही मानते ! बापू के प्रिय कायदे आज़म मुहम्मद अली जिन्नाह चाहते थे कि हिन्दुस्तान के बीचो बीच एक कॉरिडोर बनाया जाए  ... यह कॉरिडोर पश्चमी   पाक से  पूर्वी पाकिस्तान तक जाए  .... बापू को भी अपने दोनों बिछड़े भाईओं से मिलने में आसानी होगी ! बापू लोक सेवा संघ बना कर बाकी जीवन पाकिस्तानियों की सेवा में समर्पित करना चाहते थे  जिन्ना भी बापू से सहमत से प्रतीत होते थे  .... एक बार जब नेहरू ने जिन्ना के बम्बई निवास के बारे में पूछा तो उसने झट से जवाब दिया , मैं तो उस घर में आ कर रहूँगा ! बच्चों के चाचा 'मान' गए ! २६/११ को वे जिन्ना के भूत ही तो थे जिन्होंने मुंबई में बापू की लोक सेवा का सपना पूरा कर दिखाया !
पाक और बांग्ला देश से 'शान्ति दूतों' का जन सैलाब सँभालने में हमारी सुरक्षा एजेंसियां खून-पसीने से तर-ब-तर हैं  .... यदि बापू का कॉरिडोर बन जाता तो आज चाचू की काश्मीर समस्या बहुत बौनी प्रतीत होती  .... बापू के दिलहराज़ीज़ 'शांतिदूत ' पूरे हिन्दुस्तान में जन्नत-जेहाद ,हूरें -लौंडे  ..... आबे -हयात में डुबकियां लगा रहे होते  .... चाचा- बापू जन्नत या जहन्नुम से हूरों के साथ नीरा पीते हुए अपनी सहिषुणता और ब्रह्मचर्य सयम  की परीक्षा में लगे सब देख रहे होते !


शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

सैंडिल और जूते

सैंडिल और जूते

एल आर गांधी


सैंडिल के साथ साथ यदि खद्दर का गमछा भी पहन लिया होता , तो हम मान जाते कि बापू के पदचिन्हों पर चलने वाला कोई तो जिन्दा है ...आज भी !मफलर मैन  सैंडिल पहन कर भारत के 'महामना ' के भवन में फ्रांस के राष्ट्रपति के भोज में क्या चले गए  .... चर्चिल की माफिक एक अग्रवाल मॉडर्न गांधी से खफा हो गए।  यही नहीं जूतों की 'ढंग' की जोड़ी खरीदने के लिए ३६४ रूपए भेज दिए और वह भी देश की राजधानी के 'मालिक ' को। नसीहत भी दे डाली  .... अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में कुछ मानक होते हैं जिनका सम्मान करना चाहिए ,बापू के चेले को  ... अरे !  गोरे  अँगरेज़ तो बापू की बकरी की मैं -मैं भी सह गए थे मगर काले अँगरेज़ 'सैंडिल ' पर सटक  गए।
अब मफलर मैन भी तूँ डाल -डाल  मैं पात पात रायता फैला रहे है  .... केतली जी ने भरी कचहरी में क्या कह दिया कि केज़डी की न तो कोई इज्जत है और न ही करैक्टर  .... केज़डी जी ने भी भरी अदालत में दलील दे डाली  ... कि  एक लाख वोट से हारे हुए केतली की भी कोई इज्जत नहीं   .... मानहानि का मामला रफा-दफा किया जाए  ...... खुद मियां ३. ३७ लाख पर हारे थे  .... भूल गए !
अब मियां अपनी खांसी को काबू करें कि दिल्ली में फैला कूड़ा।  कुछ महीने तनख्वाह नहीं मिली तो क्या तूफ़ान आ गया  ... मुख्य मंत्री क्या मोदी जी की माफिक फुर्सत में हैं जो झाड़ू उठा कर स्वच्छ भारत गुनगुनाते फिरें  ... आड़-इवन ,प्रदूषण , ला -आडर  ऊपर से मान हानि के झमेले  ... सब मिले हुए हैं जी   काम ही देते नहीं करने !

शनिवार, 30 जनवरी 2016

चरखागिरी

चरखागिरी

एल आर गांधी

 बचपन से हमें 'सुनियोजित ' ढंग से 'चरखा ' बनाया गया। नर्सरी से हमें पढ़ाया  गया कि  कैसे गांधी जी नें बिना शस्त्र  या शास्त्र के  मात्र ' चरखे ' की बदौलत हिंदुस्तान को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करा दिया  ..... और हम भी अबोध बालक की भांति गुनगुनाते रहे   ..... ले दी हमें आज़ादी बिना खडग बिना ढाल ,साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल !    उधर बापू ने 'सारे ज़हाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा  ...... हिंदी हैं हम वतन है हिन्दुस्ताँ  हमारा ! हर स्टेज पर गा गा  कर इसे राष्ट्रिय गीत बना डाला। गीत के लेखक और पाकिस्तानी सोच के संस्थापक मौलाना इकबाल ने अपना गीत ही बदल दिया ' ..... मुस्लिम हैं हम वतन है सारा जहाँ हमारा !' फिर भी मुस्लिम तुष्टिकरण की 'कुष्ट -मानसिकता ' से पीड़ित  बापू  .... वही  राष्ट्र विरोधी गीत गवाते रहे।
जिन्ना ताउम्र बापू को चरखा बनाते रहे और वे बनते रहे  ... कभी उसे कायदेआज़म की उपाधि दी कि जिन्ना खुश हो जाए  ... फिर उसे मनाने के लिए उससे १४ बार मिले  ....आखिर में धमकी दी  .... पाकिस्तान मेरी डेड बॉडी पर बनेगा  .... न खुशामद काम आई और न धमकी  ... जिन्ना ने  पाक स्थापना भी १४ अगस्त ही मुकर्र की। तुष्टिकरण की पराकाष्ठा तो तब हो गई जब बापू कोप भवन में बैठ कर ' चरखा 'घुमाने  लगे ,ज़िद थी ! कि पाक को 'बकाया' ५५ करोड़ अदा किया जाए , जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने कश्मीर पर पाक कब्ज़े के विरोध में रोक दिया गया था। परिणामत : गोडसे ने बापू  को  प्रतिज्ञा के  अंजाम तक पहुंचा दिया।

बापू की साँसे थम गई मगर  'चरखागिरी  ' बदस्तूर जारी रही  .... देश को चरखे की मानिंद घूमने की अबकी बारी थी 'चाचा ' नेहरू की  .... हमें समझाया गया कि देश को आज़ाद करवाया 'नेहरू-गांधी ' परिवार ने  ... बाकी देश पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले तो विद्रोही -आतंकवादी थे  ... नेता जी सुभाष चन्द्र बॉस की जासूसी की गई  ... आज़ादहिंद फ़ौज़ के सैनिको को नेहरू ने मान्यता देने से साफ़ इंकार कर दिया।
वक्त के साथ साथ नेहरू -गांधी की पारिवारिक पार्टी ने चरखे को ही चलता कर दिया  ..... चुनाव चिन्ह और झंडे पर से चरखा नदारद हो गया  ... किसानों को लुभाने को 'दो बैल ' छाप दिए  .... फिर इनका स्थान ले लिया 'गाय -बछड़े  ने  ... पार्टी का नाम भी बदल कर 'इंदिरा कांग्रेस ' हो गया और निशान हो गया हाथ  ...... वक्त के साथ बापू  का चरखा भले ही किसी 'यादगाह ' में धूल फांक रहा हो  .... पर देश को चरखा गिरी बदस्तूर घुमा रही है  ......'हे ' राम





आड -इवन जश्न

एल आर गांधी

नेता जी ने अभी आड -इवन के जश्न का आगाज़ ही किया था कि किसी सुंदरी ने पिचकारी से रंग दिया  ..... झट से नेताजी झल्लाए 'होली कब है  ....कब है होली ! हम होली पर गीली होली खेलने के सख्त खिलाफ हैं  .....गीली होली से हमें  ठण्ड लग जाती है और महीनों खांसी नहीं जाती  ... हमें  पता होता कि आज होली मनाई जाएगी तो हम  यह आड -इवन   किसी और दिन मना लेता  .... भइ यह भी कोई बात हुई ये भाजपा वाले होली के नाम पर दिल्ली के पानी को बर्बाद करने पर तुले हैं  .... दिल्ली में पानी की किल्लत को ये क्या समझें ! यह सरा -सर साज़िश है  .... इतनी ठण्ड में गीला करके रख दिया  .....
तभी दूसरे  माइक से सन्सोधिया जी ने जब घोषणा की कि यह केजरी जी की हत्या का प्रयास है  .... काली सियाही की एक एक बूँद का हिसाब लिया जाएगा  .... तब जा के माज़रा समझ में आया कि यह तो किसी आपिये ने ही भंग में रंग दे मारा  ..... नेताजी ने शालीनता का पुराना चोला ओढ़ कर 'घोषणा 'की कि 'बेरंगी ' को जाने दिया जाए  .

आड - इवन की महान उपलब्धियों का बखान बिना व्यवधान पुण् शुरू किया गया  ... आड़ -इवन की अभूत पूर्व सफलता को भांपते हुए अब इसे बड़े पैमाने पर चलाया जाएगा  ..... लोगों की असुविधाओं के अध्ययन के उपरांत इस फार्मूले को 'लिंगोनुसार ' आज़माया जाएगा ! एक दिन पुरुष और एक दिन स्त्री  .... रेप कंट्रोल में व्यस्त पुलिस की मौजां ई मौजां  ... बच्चे मन के सच्चे कभी भी किसी के भी साथ  .... किन्नरों और राजनेताओं पर कोई पाबंदी नहीं !

बुधवार, 13 जनवरी 2016

पशु प्रेमी मेनका जी की  बिरादरी आज पोंगल -मकरसक्रांति 

मंगलवार, 5 जनवरी 2016

संथारा

एल आर गांधी


जब से तेरी ऊँगली पकड़ कर चलने की ठानी है  .... जिंदगी यकायक 'जो है सो है ' की माफिक कटी पतंग सी हुई जा रही है  ..... बिना डोर के आकाश की नित नई उचाइयां छूने को बेताब  .... बेपरवाह ! हवा का झोंका जिस ओर लेजाए  ..... वक्त के साथ ही 'बस' ऊपरी हवा में परवाज़ पर हो लिए हैं  .... भय मुक्त - शोक मुक्त -लालसा मुक्त , मुक्ति की बंदिशों से भी मुक्त  .... कहूँ तो मुक्ति से भी मुक्त   ..... अंत: करण में अनंत अमृत कलश लबालब भर कर छलक रहा है  .. सूखे झरने की  मानिंद बूँद बूँद धीरे धीरे अग्रसर है  .... अपनी ऊँगली को थामे हाथ में लुप्त हो जाने को  ...... मृत्यु की ऊँगली पकड़ कर चलना सीखो  ...... संथारा  है।