सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

हूक  ………

दुखी मन मेरे ,सुन मेरा कहना
जहाँ नहीं चैना  ,वहां नहीं रहना
प्यार में धोखा खाए  …दुनिया के सताए एक बेबस प्रेमी के हृदय की हूक ही तो है।
चैन ही तो नहीं है  .... कोई बेचैन मुफलिसी से तो कोई अमीरी से  … गरीब बेचैन है कि कैसे गुज़र होगी और अमीर  .... कब सबसे अमीर हो जाएंगे ? एक हृदय की हूक तो दूसरी अहम की हूक।
भूख की हूक  … पेट को सताती है तो पैसे की भूख मन को आहत कर जाती है  .... एक कचरा बीनने वाला उदास है कि आज कल से कम जुटा  पाया हूँ तो एक अमीर गहरी सोच में है कि शेयर सूचकांक इतना क्यों खिसक गया।
इक मस्ती की हूक भी है  .... जिसने हूक के मायने ही बदल कर रख दिए  …।
वाह रे ग़ालिब तेरी फाका मस्तियाँ
वोह खाना सूखे टुकड़े भिगो कर शराब में 

शनिवार, 14 फ़रवरी 2015

छोटे शहर के परिंदे

छोटे शहर के परिंदे

एल आर गांधी

शाही शहर की शाही बारांदरी सूनी पड़ी  थी और वह भी १४ फरवरी को  … आज तो वहीँ से फूल तोड़ कर अपने लव बर्डज़ को मुफ्त मुफ्त में इम्प्रेस करने का दिन था  …वेलन्ताइन डे  .... अपनी नित्य की संध्या -सैर पर नज़रें किसी प्रेमी जोड़े को ढून्ढ ही रहीं थी  …कि एक पुलसिया विसल के साथ दरोगा जी की गर्जना सुनाई दी  … ओए चलो ! पेड़ की ओट में बैठे दो प्रेमी सरपट द्रुत गति से पिछले गेट से खिसक लिए   अब इन बेअदब खाकी वालों को कौन समझाए !
बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं
किसी भंवरे को न फूलों से उड़ाया जाए
पटियाला पैग और महाराजा भूपेंद्र सिंह की तीन सौ पहंसठ रानिओं के लिए तो मशहूर है हमारा शाही शहर
 … महाराज के ही पूर्वज राजेंदर सिंह ने बारादरी बाग़ बनवाया था  .... उन्होंने तो यहीं पर पहाड़ी बाग़ में विदेश से मंगवा कर स्नान मुद्रा में एक नग्न सुंदरी का बुत भी  स्थापित किया था -बाथिंग ब्यूटी  .... सौंदर्य के दुश्मन आतंकियों ने बम से उड़ा दिया।
वही काम आज खाकी वर्दी वाले कर रहे हैं  .... कहते हैं ऊपर से  आडर  हैं  …… अरे ऊपर वाले  क्या बिना 'प्यार 'के ही पैदा हो गए थे !
किसी तितली को फूलों से गिरा कर देखो
आंधिओं तूने दरख्तों को गिराया होगा    !
यही काम खाकी ने किसी मेट्रो में किया होता तो मिडिया के वाच डॉग्स न  जाने कितने ऊपर और नीचे वालों
की 'खबर' ले  लेते  . .... कहते हैं छोटे शहरों में धारा १९६ हटा दी गई है  …छोटे शहर के परिंदों -----लव-बर्डज़
को पंख फैला कर उड़ने की इज़ाज़त नहीं।

रविवार, 14 दिसंबर 2014

कम्प्यूटर और कुरान

कम्प्यूटर और कुरान 

एल अार गांधी

मोदी साहेब को मेहदी मियां का सलाम  .... मोदी भारत के मुसलमानों के  ऐक हाथ में लैपटॉप और दूसरे में कुरान देखने को लालायित थे  …उनका  यह भी दावा था कि आई एस आतंकियों को देश के मुसलमान माकूल ज़बाब देंगे  …।
बेंगलुरु पुलिस ने जुमे को  ऐसे ही आतंकी को धर  -दबोचा जो कंप्यूटर पर आई एस  के लिए जेहाद में मशगूल था  …प. बंगाल का  मेहदी  बिस्वास आई एस के लिए बेंगलुरु से ट्विटर अकाउंट 'शामी विटनेस ' नाम से अरबी में आने वाली जेहादी ख़बरों को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करता था  … इसका खुलासा जब ब्रिटिश चैनल -४ ने खुलासा किया तो हमारी पुलिस की आँख खुली   … मेहदी ने जुर्म कबूल लिया है  ....
सिकलुर ममता दीदी के बंगाल बिज़ली बोर्ड से सेवा मुक्त एसिस्टेंट इंजीनियर पिता अपने बेटे को बेक़सूर मानते हैं   … उनका कहना है कि मेहदी जबरदस्ती करने पर ही 'नमाज़ ' पढता था।  '  वह जेहादी कैसे हो सकता है ? अर्थात जो शख्स 'कुरान - नमाज़ ' पढ़ने में रूचि नहीं रखता  … वह जेहादी हो ही नहीं सकता !
पूर्व राष्ट्रपति डा. ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा है  … मुसलमान पैदाइशी आतंकवादी नहीं होता उन्हें मदरसों में कुरान पढ़ाई जाती है , जिसके अनुसार वे हिन्दू ,बौद्ध ,सिख , ईसाई और अन्य गैर मुस्लिम्स को चुन चुन कर मारते हैं।  आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए भारत में चल रहे हज़ारों मदरसों पर प्रतिबन्ध लगाना बेहद ज़रूरी है  …
सिकलुर सरकारें मदरसों को करोडो रूपए अनुदान देती रही है और इस्लामिक देशो से जो अकूत धन आ रहा है  … सो अलग  … दीदी के बंगाल में तो मदरसों और मौलविओं पर सरकार ख़ास मेहरवान है  …

शनिवार, 22 नवंबर 2014

स्वछंद प्रेम या भोग की आज़ादी

स्वछंद प्रेम या भोग की आज़ादी

   एल आर गांधी


 समाज का एक वर्ग जहाँ जो चाहे करने की आज़ादी चाहता है ,वहीँ दूसरा आदर्शवादी वर्ग स्वछंद प्रेम अभिव्यक्ति का विरोधी है  … गत दिनों युवा प्रेमियों ने सार्वजनिक स्थान पर ' चुम्बन -आलिंगन ' की नुमाइश कर अपना विरोध प्रकट किया , उन भारतीय संस्कृति के ध्वजावाहकों के विरुद्ध , जो इसे पाश्चात्य सभ्यता की फ़ूहड़ नुमाइश मानते हैं  …।
जहाँ तक भारतीय संस्कृति का प्रशन है  … प्रेम की अभिव्यक्ति और उस की परिणति पर प्राचीन काल में कोई रोक नहीं थी  … गन्धर्व  विवाह , कन्या द्वारा स्वेच्छा से वर का चयन या वरण को   समाजिक मान्यता प्राप्त थी  … मुग़ल काल में बहुत सी प्राचीन मान्यताएं खंडित हो गई  …
महर्षि  विश्वामित्र के  तप तेज़ से जब इंद्रदेव को संकट का आभास हुआ तो उन्होंने देवलोक की सबसे सुंदर व् आकर्षक अप्सरा 'मेनका ' को ऋषिवर का तपोभंग करने भेजा  । ऋषिवर मेनका के सौंदर्य जाल में फंस गए !
कालांतर में जब महर्षि को मालुम हुआ तो उनके आक्रोश की सीमा नहीं  थी  .... मेनका को श्राप दिया और अपनी नवजात कन्या 'शकुंतला ' को कण्व ऋषि को सौंप कर पूण: तपोवन चले गए  …
शकुंतला ने महाराजा दुष्यंत से 'गन्धर्व ' विवाह किया  … महर्षि कण्व का उनके इस प्रेम विवाह को वरदहस्त प्राप्त था  .... शकुंतला -दुष्यंत के पुत्र महाराजा भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम 'भारत ' पड़ा  .... भरत ने प्रथम बार यहाँ लोकतंत्र की नीँव रखी  .... अपने नौ पुत्रों में से अपना उत्तराधिकारी न चुन कर अपनी प्रजा में से सबसे उपयुक्त व् योग्य वीर व् विवेकवान पुरुष 'युद्धमन्यु ' को अपने विशाल राज्य की  कमान सौंपी !
फिर भी हमारे समाज  में स्त्री को प्रेमहीन विवाह सहन करने को बाध्य होना पड़ता है  … ६०% भारतीय पुरुष उन्हें नियमित रूप से पीटते हैं और ७५% अपनी मर्ज़ी से शारीरिक सम्बन्ध चाहते हैं  । बरसों से कुछ हज़ार रूपए की खातिर ८० आल के बूढ़े अरब शेखों सी ब्याह दी जाती रही हैं  .
यह युग स्वयं चुनने की आज़ादी का युग है  … रही बात शारीरिक सम्बन्ध बनाने की आज़ादी की ! गर्भ निरोधक गोली के आविष्कारक अस्ष्ट्रियाई -अमेरिकन केमिस्ट-लेखक  कार्ल ज़रासी का दावा है कि ' अब हम ऐसे युग की ओर जा रहे हैं , जहां शारीरिक रिश्ते केवल आमोद-प्रमोद का अंग होंगे  ....
नए नए आविष्कारों ने ज़न्नत -स्वर्ग -जहन्नुम की परिभाषा ही बदल  कर रख दी है  .
जिसमें लाखों बरस की हूरें हों
ऐसी जन्नत को क्या करे कोई 

शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

कानून के हाथ लम्बे भी और बौने भी
एल आर गांधी
कानून के हाथ कितने लम्बे या कितने बौने … किसी के लिए लम्बे तो किसी के लिए बौने ....
यही लम्बे हाथ बाबा आसा के गिरेबान तक पहुँच भी गए और सलाखों के पीछे भी पहुंचा दिया .... अपने योगदान पर मिडिया ने भी खूब पीठ थपथपाई .... अब संत राम पाल को कानूनी औकात दिखाने को हरियाणा पुलिस और मिडिया संत राम पाल के कबीर पंथी सतलोक आश्रम की किलेबंदी किये खड़े हैं और दूसरी तरफ संत जी के कबीर पंथी भक्त आश्रम की रक्षा में अड़े हैं ....झगड़ा २००६ का है , जब आर्य समाजियों का कबीरपंथी संत राम पाल के साथ इसी आश्रम के बहार झगड़ा हो गया था … तब सरकार कांग्रेस की थी ,अब बीजेपी है … कानून यका यक जाग गया और सिकुलर मिडिया भी ....
बाबा पर न्यायालय के नान- बेलेबल वारंट की तामील की दरकार है … सरकार और पुलिस बेचारी मज़बूर है … इस लिए संत जी को घेरा है … मगर मिडिया खाम खाह में पिट रहा है … इसे कहते हैं 'समझदार -नासमझ '.
हमारे सिकुलर देश में सैंकड़ों बेलेबल -नान-बेलेबल कोर्ट वारंट तामील की दरकार में कोतवालिओं की चौखटों पर बरसों से एड़ियां रगड़ रहे हैं … न तो सरकारों को याद है और न मिडिया को …
सिकुलर सियासतदानों की सबसे बुल्लंद इबादतगाह के शाही इमाम हज़रात सैयद अहमद बुखारी, जिनके यहाँ १२५ बरस पुरानी पार्टी की 'राजमाता' भी चुनाव से पहले सज़दा करना नहीं भूलती .... पर दो दर्ज़न से भी अधिक बेलेबल नान-बेलेबल कोर्ट के वारंट ज़ेरे -तामीर हैं …
दिल्ली की एक कोर्ट के जज साहेब की यह टिप्पणी : 'देश के कानून और सिकुलर मिडिया और सियासत की दिशा और दशा को खुद ब खुद बयां कर देती है ': रिकार्ड देखने के बाद यह कहा जा सकता है कि कमिश्नर रैंक का अफसर भी इतनी हिम्मत नहीं जुटा सकता कि वह 'बुखारी' के खिलाफ वारंट की तामील करवा सके (जनवरी २००४ ) . वह (बुखारी ) देश के किसी भी कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता। …

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2014

' निल बैलेंस ' विदेशी खाते

आज पटियालवियों का सर शर्म से झुक गया  .... यह जान कर कि रियासत की महारानी पर किसी 'उच्चक्के ' ने यह दोष मढ़ दिया कि उनका विदेश में 'काला ' खाता है और उसका भी 'बैलेंस ' निल है  .... एक रियासत की महारानी और बैंक बैलेंस निल  .... हे राम !  कैसा लोक - तान्त्रिक  कलयुग आ गया  … जब महारानी कंगाल है तो प्रजातंत्र की प्रजा का क्या होगा ?
अवश्य ही इसमें किसी राजपरिवार विरोधी विदेशी शक्ति की चाल है  । महारानी ने तो धुर विरोधी विदेशियों की भी मोती महल और चैल -पैलेस में खूब खातिर दारी को भी आँख मूँद कर सवीकार किया।  पटियालवियों को बढ़ चढ़ कर नज़राने दे कर ज़ीरो बैलेंस अकॉउंट को मालामाल करने की मूहिम चलानी होगी  … रियासती अस्मत का सवाल है भाई !
ऐसे 'उच्चक्कों ' पर मान हानि का दावा 'अब तो ' कर ही देना चाहिए  … कल को देश की 'राजमाता ' और राजकुमार के ' निल बैलेंस ' विदेशी खाते कोई उठा लाएगा !

रविवार, 14 सितंबर 2014

कीचड़ वृति

कीचड़ वृति 

एल आर गांधी  


पुरानी कहानी है   एक महात्मा नदी किनारे बैठा ,कीचड़ में लिप्त मरणप्राय बिच्छू को कीचड़ से बाहर निकलता और बिच्छू उसे काट लेता।   महात्मा फिर से बिच्छू को कीचड़ से निकलता और बिच्छू फिर काटता  … एक राह गीर ने महात्मा से पूछा  … महात्मन्  बार बार इसे बचाने का प्रयास कर रहे हो और यह दुष्ट जीव आप को बार बार दंश मार कर पीड़ा पहुंचा रहा है  … आप इसे मरने के लिए छोड़ क्यों नहीं देते  । 
महात्मा राहगीर को प्रत्युत्तर देते हुए कहते हैं  … जब यह जीव अपनी दुष्ट वृति को त्यागने को त्यार नहीं तो मैं अपनी साधुवृति को क्यों त्यागूँ !
पृथ्वी पर स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को प्राकृतिक आपदा बाढ़ ने घेर लिया तो हज़ारों सेना के जवान लाखों कश्मीरिओं की जान बचाने के लिए दिन-रात अपनी जान हथले पर रख कर बचाव कार्यों में जुट गए  .... बदले में कुछ अलगाववादी बिच्छू-वृति के देश द्रोही  तत्त्व सेना के जवानो पर हमले कर रहे हैं , एक जवान का तो हाथ ही काट दिया  … अब जवानो को बाढ़ में घिरे असहाय  लोगों के साथ -साथ अपनी गन का भार भी उठाना पड़ रहा है   … सेना को आपदा में अपने नागरिको की रक्षा के साथ साथ आत्मरक्षा की शिक्षा भी दी जाती है  … वे कितने ही मक्कार हो जाएं , मगर हम अपने संस्कार नहीं त्याग अकते  … यदि ऐसा किसी पश्चिमी या अरबी देश में होता तो बिच्छू-वृति के ऐसे देश द्रोहिओं को 'कीचड़ में मरने के लिए ' छोड़ दिया जाता  …