सोमवार, 22 अगस्त 2011

भ्रष्टाचार की दहीं हांडी


भ्रष्टाचार  की  दहीं  हांडी 
     एल. आर. गाँधी 

मुसलमानों ने रमजान की नमाज़ अन्ना को समर्पित कर भ्रष्टाचार के खिलाफ अज़ान दी तो श्री कृषण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भ्रष्टाचार   की  दहीं  हांडी को फोड़ कर कृषण भक्तों ने अन्ना के आन्दोलन से एकजुटता प्रकट कर दी. अन्ना के आन्दोलन पर हमारे काले अंग्रेजों की प्रारंभिक प्रतिक्रिया भी कुछ कुछ अपने मानसिक आकाओं गोरे अंग्रेजों के समान ही थी. जब गाँधी जी ने दांडी मार्च के माध्यम से अंग्रेजों के नमक कानून के विरुद्ध आन्दोलन किया तो वायसराय हिंद लार्ड इरविन ने भी लन्दन में अपने आकाओं को लिखा था  कि गाँधी के दांडी मार्च से उनकी नींद में कोई खलल नहीं पड़ने वाला.मगर गाँधी जी के दांडी मार्च को जब अभूत पूर्व जन समर्थन मिला तो गोरे अँगरेज़  'गोल मेज़ 'कांफ्रेंस को मजबूर हो गए.   कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया हमारे आज के काले अंग्रेजों की है. कांग्रेस के राजकुमार तो अन्ना आन्दोलन पर किसी प्रशन का उत्तर देना भी  मुनासिब नहीं समझाते, प्रधानमंत्री संसद की प्रभुसत्ता का राग अलाप रहे हैं. 
ज्यों ज्यों अन्ना के साथ जनसमर्थन बढ़ रहा है .. हमारे काले अंग्रेजों को अन्ना का भूत भरमाने लगा है. किसी 'गोल मेज़' का जुगाड़ शुरू हो गया है. साथ ही अपनी बची खुची साख बचाने के भी जतन हो रहे हैं. शर्त रखी गई है कि अन्ना अकेले बात करें -कोई   केजरीवाल -शांतिभूषण -किरण बेदी नहीं चाहिए. अब अन्ना भी ठहरे गाँधी के चेले ... बापू तो गोल मेज़ कांफ्रेंस में अपनी बकरी भी साथ ले कर गए थे ..साथियों को छोड़ने कि तो बात ही छोडो.       
दांडी मार्च से पहले गांधीजी ने २मार्च  १९३० को वायसराय को एक नोटिस दिया जिसमें नमक पर कर भारत की गरीब जनता  के ज़ख्मो पर नमक लगाने के समान बताया. बापू ने गोरे अँगरेज़ को बताया कि उनकी मासिक आय २१००० /- अर्थात ७००/- रोजाना है जबकि भारत के प्रति व्यक्ति औसत आय २ आना से भी कमतर है. अर्थात आम आदमी और वायसराय की आय में ५००० गुना अंतर है. आज़ादी के ६४ सालों में देश पर राज कर रहे काले अंग्रेजों ने देश को इस कदर लूटा है कि आम आदमी की हालत गोरे अंग्रेजों के वक्त से भी बदतर हो गई है. आज गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली ८० % जनता की औसत आय प्रति दिन २०/- के करीब है. जबकि देश के राष्ट्रपति पर प्रति दिन ५.१४ लाख रूपए और प्रधानमंत्री पर ३.३८ लाख रूपए खर्च होते हैं और यह खर्च औसत भारतीय से १६९०० गुना अधिक है. केन्द्रीय मंत्री मंडल पर रोज़ २५ लाख खर्च होते हैं. 
राष्ट्रिय लूट  खसूट अर्थात भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जनता द्वारा चुने गए सांसद पिछले ४२ साल से लोक पाल बिल पर माथा पच्ची कर रहे हैं - अब भी हमारे मोहन प्यारे फरमा रहे हैं कि कोई कानून बनाना सांसदों का विशेषाधिकार है- कोई अन्ना शन्ना इस विशेषाधिकार का चीर हरण नहीं कर सकता. अरे पिछले ६४ 
 वर्ष से आप देश की भूखी नंगी रियाया का जो चीर हरण कर रहे हो , उसका क्या. काठ की हांड़ी आखिर कब तक चूल्हे पर टिकेगी. जनता के सबर  के पैमाने को अन्ना की हुंकार ने छलका दिया है.
तुमसे   पहले   जो   यहाँ   तख़्त   नशीं   था ..
उसको भी अपने खुदा होने पर इतना ही यकीं था .... 

शनिवार, 20 अगस्त 2011

मिश्र का तानाशाह हुस्निमुबारक.... भारत की भ्रष्ट परिवारवादी राजशाही..


मिश्र का तानाशाह हुस्निमुबारक
भारत की भ्रष्ट परिवारवादी राजशाही.. 
         एल.आर.गाँधी 
तीन  दशक  से मिश्र पर एक छत्र निरंकुश तानशाही हकुमत करने वाले  हुस्नी मुबारक आज एक पिंजरे में बंद अपने दो राज कुमारों के साथ अपने विरुद्ध  चल  रही  अदालती  कार्रवाही में अपनी उमर्द्रज़ बुढ़ापे का रोना रो कर दया की भीख मांग रहे हैं. जनता के आक्रोश के आगे अदालत के जज चाह कर भी इस तानाशाह पर दया नहीं कर पाएंगे ! तानाशाह हुस्नी मुबारक मिश्र की जनता के आक्रोश को समय रहते नहीं समझ पाए !  अरब देशों में चल रहे युवा आन्दोलन की हवा भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश भी पहुँच जायगी - यहाँ की लोकतान्त्रिक -निरंकुश -परिवारवादी राजशाही अभी तक विशवास नहीं कर पा रही. 
भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना का आन्दोलन शहरी मध्यवर्ग से होता हुआ कस्बों और गाँव तक द्रुत गति से बढ़ रहा है. मगर भ्रष्टाचार में आकंठ -डूबा शासक वर्ग अभी तक हुस्नी मुबारक की ही भांति इसे हलके में ले रहा है. सरकार और कांग्रेस की पहली प्रतिक्रिया रामदेव बाबा की भांति ही अन्ना को भी डराने और धमकाने की रही. मगर बात नहीं बनी. अब कांग्रेसी नेत्रित्व की प्रतिक्रिया अन्ना आन्दोलन की उपेक्षा और इसे अपनी मौत मरने को छोड़ देने की  है. कांग्रेस के राज कुमार जो बात बात पर बतियाते नज़र आते थे .... कल एक समारोह में अन्ना के सवाल पर चुप्पी साध गए जैसे बहुत ही महत्त्वहीन मसला हो. राहुल बाबा प्रजा राज्यम पार्टी के चिरंजीवी को कांग्रेस में जमा होने के समारोह में अपने पिता राजिव गाँधी के जयंती अवसर पर मौजूद थे. चिरंजीवी ने कांग्रेस में दाखिल होते ही राज कुमार को देश का भावी प्रधानमंत्री घोषित कर अपनी राजभक्ति का परिचय दिया. एक मंत्री महोदय वीरभद्र सिंह ने तो अन्ना आन्दोलनकारियों को डफलीबाज़  तक कह डाला और इनके जनसमर्थन को भारत की १२१ करोड़ की आबादी में महत्त्वहीन  करार दिया.यह बात  अलग है की वीरभद्र जी को देश की आबादी तक का नहीं था पता ...पूछ पाछ कर बोले... तो भी १२१ मिलियन कह बैठे. 
आज जन - जन यह जान गया है की देश पर पिछले पांच दशक से राज करने वाली पार्टी और परिवार ने इस देश को दोनों हाथों से खूब लूटा है. स्विस बैंकों में भी इनका ही अरबों रूपया जमा है. तभी तो बाबा राम देव के आन्दोलन को आधी रात को पुलसिया कार्रवाही से खदेड़ा और अब अन्ना को धमकाने -लटकाने और थकाने का खेल चल रहा है.अन्ना को एन.जी.ओ  संगठनों का समर्थन प्राप्त है. अब सरकारी सहायता प्राप्त एन.जी.ओ'ज को पटाया जा रहा है.सोनिया जी की किचन केबिनेट की सदस्य अरुणा रे    एक और जनपाल बिल ले कर मैदान में उतरी हैं  ..आन्दोलन को कुंद करने का खेल जारी है. राम लीला मैदान में आन्दोलनकारियों को नल का जल पिला कर बीमार किया जा रहा है... सरकार जानती है की अन्ना के एन.जी.ओ समर्थक केवल बिसलरी का  बोतल बंद पानी ही पचा पाते हैं. सत्ता धारी अभी तक तो आन्दोलन कारी कितने पानी में हैं... इसी चिंतन में व्यस्त हैं.    
सत्ता के नशे में चूर लोकतान्त्रिक-निरंकुश -परिवारवादी भ्रष्ट तंत्र के लोग जनता के आक्रोश को भांपने की समझ गवां बैठे हैं. जनता भ्रष्टाचारी तंत्र से त्रस्त है और अन्ना ने जनता की दुखती रग पर हाथ रक्खा है... समय रहते यदि जनता के आक्रोश को नहीं समझा और शांत किया गया ... तो वह दिन दूर नहीं जब मिश्र के ताना शाह हुस्नी मुबारक की भांति ये लोग भी जनता की अदालत में 'पिंजरे में बंद ' दया की भीख मांग रहे होंगे.  
फर्क है बस किरदारों का 
बाकि खेल पुराना है..

रविवार, 14 अगस्त 2011

गाँधीवादी अन्ना .............पर कांग्रेसियों की विरासती सोच !!!!

 गाँधीवादी अन्ना .............पर 
कांग्रेसियों की विरासती सोच !!!!
      एल.आर.गाँधी  
      
 ज्यों ज्यों अन्ना के अनशन  का दिन निकट आ रहा है...सत्ताधारी राजनेताओं की बौखलाहट भी बढती जा रही है ..अन्ना  का हश्र भी बाबा के अंजाम तक पहुँचाने की तैयारी भी  जोर शोर से चल रही. आरोप प्रत्यारोपों का महांभारत छिढ़ गया है.... कांग्रेस के एक प्रवक्ता मनीष तिवाड़ी ने अन्ना पर अपने जन्म दिवस पर २.२ लाख की भारी भरकम रकम खर्च करने या करवाने का दोष लगाया और कहा कि  एक  गाँधीवादी को जन्मदिन पर ऐसी फ़िज़ूल खर्ची शोभा नहीं देती..... एक कांग्रेसी नेता कि एक गाँधीवादी को गांधीजी के आदर्शों पर नसीहत ? बहुत अटपटा सा लगता है जब कोई कांग्रेसी गाँधीजी के आदर्शों की दुहाई देता है !!!!!
अन्ना के आन्दोलन के लिए हमारी इस गाँधी-छाप सरकार के पास दिल्ली में कोई उचित स्थान नहीं ? जितना हमारी यह लोगों द्वारा चुनी गई सरकार आज अन्ना से डरी हुई है उतना तो विदेशी अँगरेज़  हकुमत कभी गाँधी से 

नहीं थी घबराई . गांधीजी को अनशन या आन्दोलन के लिए कभी इतने कायदे कानून नहीं थे पढ़ाए गए. अंग्रेजों द्वारा गाँधी जी को जो ट्रेन सुवुधा  मुहैया करवाई गई थी...वह किसी भी स्तर से प्रथम श्रेणी से कमतर न थी... जिस कम्पार्टमेंट में गाँधी सफ़र करते थे, उसमें रेल के तीन डिब्बे -प्रथम श्रेणी सुविधाओं से लैस थे...फिर भी डिब्बों के बाहर 'तीसरा-दर्ज़ा' लिखा रहता !!!!!!..आज गाँधी जी के नोट -छाप कांग्रेसियों को एक अदना से टोपी-धारी अन्ना से 'ग़दर' की बू आ रही है... अन्ना से संविधानिक खतरा खड़ा हो गया है
गाँधी के नाम पर पिछले ६४ वर्षों से सत्ता सुख भोग रहे ये कांग्रेसी ....किस कदर गाँधी-छाप नोटों के दीवाने हो चुके हैं ...यही अयना तो दिखाना चाहते हैं- अन्ना !!! अन्ना पर अपने आन्दोलन के लिए पैसा कहाँ  से आया का आरोप  लगाने वाले शायद यह भूल गए कि गाँधी जी पर प्रति दिन ५०/- खर्च होते थे और यह खर्च उस वक्त के उद्योगपति 'बिडला ' द्वारा किया जाता था . उस वक्त के यह ५०/- आज के २००००/- के बराबर हुए ...इस प्रकार तो अन्ना के जन्म दिन जितना गांधीजी हर हफ्ते उड़ा देते थे.?
बाबा के बाद अब अन्ना के 'ऐशो- आराम' पर होने वाली पाई पाई का हिसाब 'अर्थशास्त्री मनमोहन' सरकार के 'दिग्गी-सिब्बल' लगाने में मशगूल हैं.  सारी सरकारी एजेंसियां भी दिन रात अन्ना की जन्मपत्रियाँ खंगाल रहीं हैं.. अन्ना के जन्म दिन पर किसी अन्ना प्रेमी के २.२ लाख रूपए का भारी भरकम खर्चा ...' तौबा तौबा' ... एक गाँधी वादी और उसके जन्म दिन पर इतनी फ़िज़ूल खर्ची ? 
गाँधी के नाम पर छै दशक से देश पर राज करने वाला नेहरु गाँधी परिवार ... कितना गाँधीवादी है और देश की गरीब जनता के खून पसीने की कितनी दौलत पर अब तक ' हाथ साफ़ ' कर चूका है ... उस पर हमारा सुपारी-पाक  मिडिया भी खामोश  है. नेहरु- गाँधी परिवार का स्विस बैंकों में २.५० बिलियन डालर जमा है. महज़ पिछले तीन साल में कांग्रसी सरकार की राजमाता श्रीमती सोनिया गाँधी की विदेश यात्राओं पर १८५० करोड़ खर्च किये गए - किस 
हैसियत से - एक सांसद हैं - इस लिए ?.... यदि देश के सभी सांसदों पर इतना ही सरकारी खर्चो होने लगे तो .....प्रणब दा.. के हाथ में कटोरा ..थमाना पड़ेगा.    
जैसे विचार सरकार में बैठे कांग्रेसियों के आज गाँधीवादी अन्ना हजारे के बारे में सुनने को मिल रहे हैं कुछ ऐसे ही  विचार हमारे चाचा नेहरु के गांधीजी के बारे में भी थे.... १९५५ में कनाडियन प्रधानमंत्री लेस्टर पियर्सन ने नेहरूजी से भेंट की और उनके गांधीजी के बारे में एक सवाल के जवाब में नेहरु जी ने फ़रमाया ' ओह, वह भयंकर ढोंगी बूढा ! सत्ता के नशे में चूर इन चोर उच्च्क्को का अन्ना को बुरा नहीं मनाना चाहिए ... आखिर विरासत में मिली सोच है जाते जाते ही जाएगी और सत्ता के साथ ही जाएगी !!!!

सोमवार, 1 अगस्त 2011

स्विस चोरों की क्वात्रोचिगिरी

स्विस चोरों की क्वात्रोचिगिरी 

        एल.आर.गाँधी 

क्या स्विस बैंक खातों का हश्र भी बोफोर जैसा  होगा  ? जिस प्रकार बोफोर काण्ड के खलनायक क्वात्रोची चाचा  को बचाया और भगाया  गया - आखिर में पूरी बेशर्मी  से उसे   ७ .३  मिलियन  डालर  बैंक से  निकालने  की भी आज़ादी  दे  दी  गई  . ठीक  उसी  प्रकार  स्विस बैंको  में  देश  की  अकूत  धन  दौलत  लूट   कर  जमा  करवाने  वाले प्रभाव शाली लोगों को यह कला धन इधर- उधर करने का मौका दिया जा रहा है. स्विस बैंक एसोसियेशन  की माने तो  पिछले तीन साल में १५ लाख  डालर की कमी  आयी है. 
अब  तो कांग्रेस  की महारानी  और राजकुमार  भी स्विट्ज़रलैंड हो  आए  हैं . स्विट्ज़रलैंड से नेहरु परिवार का पुराना नाता है. नेहरूजी की धर्मपत्नी को जब राजयक्ष्मा ने आ  घेरा  तो  नेहरूजी ने उन्हें  इलाज़ के लिए स्विट्ज़रलैंड भेज दिया और वहीँ  पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली. प्रसिद्ध  कानूनविद  रामजेठमलानी  ने   आरोप  लगाया    है कि  नेहरु परिवार  का स्विस  बैंकों  में   २ .५०  बिलियन  डालर जमा  है.और फिर किसी पालतू 'दिग्गी' ने इस आरोप का प्रतिकार या खंडन भी  तो नहीं किया.इस तथ्य  की पुष्टि स्विस मैगज़ीन   स्केविज़र    इल्लियुस्त्रेती ने  भी की थी.. मैगज़ीन  ने रहस्योद्घाटन किया था कि राहुल गाँधी स्विस बैंकों से लाभार्थी हैं और उनके खाते में उनकी  माँ के अधिकृत २ बिलियन डालर हैं.  इन खातों के खाता नंबर एक 'घडी' में छिपे हैं. 'लगता है समय  के काल चक्कर ने अपना भ्रष्ट चक्र पूरा कर लिया है. ' देश को दोनों हाथों से लूटने वाले अब लूट के धन को छुपाते फिर रहे हैं.    
एक ओर चीन और रूस ने अपनी जनता से वायदा किया है कि देश के धन को हर हाल में वापिस लाया जायेगा और चीन ने तो इन लुटेरो को फंसी का कानून भी पास कर दिया .... मगर हमारे चोरों के सरदार और फिर भी ईमानदार शायद सोच रहे हैं कि देश की सी .बी.आई क्वात्रोची चाचा कि भांति इन स्विस चोरों को भी बचा लेगी. क्वात्रोची तो विदेशी था -भगा दिया ... मगर  अपने ये देशी-विदेशी राज पाठ छोड़ कर कहाँ भागेंगे ...बाबा राम देव को तो सरकारी दमन चक्र में फंसा लिया. मगर सर्वोच्च न्यायलय का क्या जिसने इन शाही चोरों को सलाखों के पीछे पहुँचाने की ठान रक्खी है. और देश के गरीब  और भूखे जब इन शाही चोरों को पहचान कर सजा देंगे और वोट की चोट से गुमनामी के गट्टर में फेंक देंगे तब 'सरदार और सी.बी.आई. भी कुछ नहीं कर पायेंगे 

बुधवार, 27 जुलाई 2011

सोमालिया का समोसा - नार्वे का आंद्रेस - भारत का दिग्गी !!!!

सोमालिया का समोसा - नार्वे का आंद्रेस - भारत का दिग्गी !!!!

                                    एल.आर.गाँधी. 


विश्व    का   सभ्य   समाज एक ओर सोमालिया की भूख और बिमारियों से त्रस्त जनता की सहायता कर रहा है वहीँ दूसरी ओर सोमालिया के इस्लामिक आतंकी संगठन 'अल शबाब ' ने 'समोसे' पर प्रतिबन्ध लगा दिया है. 
इन इस्लाम के पैरोकार आतंकियों का मानना है की समोसे का तिकोना आकार ईसाई धरम के प्रतीक  से मिलता जुलता है - इस्लाम में किसी दुसरे मज़हब को सहन  करना 'हराम' जो ठहरा ! 
शायद इस्लामिक अतिवादियों की फैलाई मज़हबी कटुता का ही परिणाम हमें ईसाई बहुल नार्वे में दिखाई दिया जब एक धुर दक्षिण पंथी ईसाई युवक ने सत्तारूढ़ दल के ९३ निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया.सत्ताधारी लेबर पार्टी साम्यवादियों ओर मुस्लिम अल्पसंख्यकों  के पुनर्वास की हिमायती है. दक्षिण  पंथी ईसाई इन मुसलमानों को यूरोप  के लिए बहुत बड़ा खतरा मानते हैं .नार्वे के ओटोयो द्वीप में जब यह हादसा हुआ तो मौके पर उपस्थित पुलिस अधिकारी सबसे पहला शिकार हुआ. नार्वे में दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहला हादसा था जिसमें इतनी संख्या में लोग हताहत हुए. शांतिप्रिय इस द्वीप में  पुलिस वालों को हथियार नहीं दिए जाते ओर न ही कभी इसकी ज़रूरत महसूस की गई. .स्थानीय पुलिस कर्मी महज़   मूक दर्शक  बने  रहने  को मजबूर थे ! 
९/११ के आतंकी हमले के बाद यूरोप व् विश्व के ईसाई समुदाय में इस्लाम के प्रति विचार ओर व्यवहार में भारी अंतर आया है. अधिकाश युर्पीय देशों में इस्लाम की कट्टरवादी मान्यताओं को हेय दृष्टि से देखा जाने लगा है. बहुत से देशों में इस्लामिक प्रतीक नकाब , मीनारों ओर मदरसों पर प्रतिबन्ध लगने लगे हैं. इस्लाम को आतंक का पर्याय माना जाने लगा है. दूसरी और इस्लाम के प्रचारक मौलवी इसे अपने मज़हब की तौहीन के रूप में लेते हुए मुस्लिम समाज में ओर मज़हबी कटुता फैला रहे हैं. यहाँ तक की ९/११ के ग्राउंड जीरो पर मस्जिद उसारने पर अड़े हैं. यूरोपीय समाज इसे इस्लामिक आतंक के विजय चिन्ह के रूप में देखने लगे हैं , जिससे मुसलमान अमेरिका पर हुए आतंकी हमले को अपनी जीत के रूप में दर्ज करने पर उतारू हैं. 
बौध धर्म में दीक्षा लेने के उपरान्त सम्राट अशोक ने भी सत्य अहिंसा को अपना कर अपने राज्य को सुरक्षा विहीन कर दिया था. चारों और सुख शान्ति का साम्राज्य था .. किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था की सीमा पार से तलवार के जोर पर मज़हब फ़ैलाने मुहम्मद के सिपाही भारत को लहू लुहान कर देंगे. लाखों निहत्थे भारतीय यहाँ तक की बूढ़े, बच्चे ओर औरतें  तलवार के घाट उतार देये गए ओर जिन्हों ने इस्लाम कबूल लिया उन्हें बख्श दिया गया - 'क्योंकि अल्लाह बहुत मेहरबान है' . हजरों विशाल देवालयों को तोड़ कर मस्जिदें खड़ी की गईं- जाजिया की मार न सह पाने वाले मजलूम हिन्दू मुसलमान हो गए.  यह सिलसिला सदियों से निरंतर जारी है .... १०० मिलियन हिन्दू इस्लाम की भेंट चढ़ गए ... भारत से अलग होने के बाद पाक में हिन्दू 24%  से घटते घटते महज़ डेढ़ प्रतिशत रह गए- अर्थात पाक में ही पिछले 64 साल में 35 मिलियन हिन्दुओं को मिटा दिया या ज़बरन मुस्लमान बना दिया गया .  
अब इस्लामिक आतंक से त्रस्त यदि कोई  भारतीय राष्ट्र भक्त इन सत्य अंहिंसा के मज़हबी पोषक सेकुलर शैतानो के खिलाफ आवाज़ उठाता है तो उसे भगवा आतंक जैसे नामों से अलंकृत किया जाता है. हमारे हुक्मरानों की इस्लामिक आतंक के खिलाफ लड़ाई का भी क्या खूब मंज़र है .... पाक आतंकी कसाब अपने ९ जेहादी हमलावरों के साथ जब देश की व्यवसायिक  राजधानी मुंबई में खून  की होली खेल रहा था तो हमारे पुलिस के आला अफसर ' दिग्गी' मियां से भगवा आतंक से उनकी जान को खतरे पर बतिया रहे थे.      
पृथ्वी राज चौहान ने गौरी को १७ बार छोड़ा ..ओर उसने पहले अवसर में ही.. नहीं बक्शा .. जो कौमें अपनी ऐतिहासिक गलतियों से नहीं सीखती ... इतिहास के गर्त में ..........???????त

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

भ्रष्टाचार ...चीन में सजा... भारत में मज़ा

 भ्रष्टाचार ...चीन में सजा... भारत में मज़ा  

               एल. आर गाँधी 

चीन  में  गत   मंगलवार को दो भ्रष्ट राजनेताओं को फाँसी  पर चढ़ा दिया गया - ये थे पूर्व मेयर जो रिश्वत लेने, हेराफेरी और पद के दुर्रपयोग के दोषी पाए गए. १२ मई को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई और महज़ २ महीने नौं दिन के बाद लटका दिया गया.  भ्रष्टाचार के प्रति अपनी ' जीरो   टालरेंस ' निति की बदौलत आज चीन विकास स्तर में भारत से मीलों आगे निकल गया है. ऐसी अनेकों उदाहरण चीन में देखने को मिलती हैं जब भ्रष्टाचार में लिप्त राजनेताओं, कर्मचारियों व् अन्य नागरिकों को सूली पर लटका दिया गया. 
हमारे यहाँ   ऐसी एक भी उदहारण ' ढूँढते रह जाओगे ' सूली तो क्या किसी को मामूली सजा भी हुई हो. आज हम  विश्व   के भ्रष्ट देशों के सिरमौर बन कर उभरे हैं और शीर्ष स्थान तक पहुँचाने  के लिए   चंद  पायदान  की दरकार   है. भ्रष्टाचार के कीर्तिमान   बनाने  में हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री महा पंडित  श्री श्री जवाहर लाल जी नेहरु का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. पंडित जी द्वारा रोपे और सिंचित  किये गए भ्रष्टाचार के  बूटे  आज वट वृक्ष बन उभरे  हैं .पंडित जी के कार्यकाल में पहला घोटाला जीप     घोटाला था जिसे    उनके चहेते कृष्णा मेनन ने सरअंजाम   दिया था.  
आजाद भारत का यह पहला घोटाला था और वह  भी देश की सुरक्षा  से सम्बंधित !   नाम - मात्र के विरोधी  सांसदों   ने यह मामला  जोर शोर से संसद में उठाया... नेहरु जी  बुरा    मान     गए - कृष्णा   मेनन नेहरु जी  के ख़ास राजदार जो ठहरे  ? मेनन को सजा तो क्या ! इनाम सवरूप रक्षा मंत्री बना दिया ! नतीजा  ६२ के युद्ध  में हम चीन के हाथों  पराजित  हुए और हजारों मील अपनी  भूमि से हाथ धो बैठे. नेहरु जी सदमे से उबर न सके और अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए. 
दूसरा भ्रष्टाचार भी  नेहरु जी की ही  देन  था जब पंजाब  के वृष्ट  नागरिक  व् राजनेता  नेहरु जी   से मिले   और ततकालीन    मुख्यमंत्री  परताप सिंह कैरो की लूट  खसूट  की  शिकायत की. नेहरु जी ने कैरो के खिलाफ कार्रवाही तो क्या करनी थी उल्टा 'जुमला' दे  मारा   ' अरे  भई   कैरो यह लूट  का पैसा कोई बाहर तो नहीं  ले गया - देश में ही लगा रहा है. भ्रष्टाचार के प्रति 'सब चलता है' की इस  नीति के चलते और नेहरु जी की नादानी के परिणाम स्वरुप   आज , स्विस  बैंकों  में भ्रष्टाचार से लूटा गया - भारत का   काला धन १५०० बिलियन  डालर को पार कर गया है. 
बाबा राम देव जी ने जब भारत के विदेशी बैंकों में पड़े पैसे को राष्ट्रिय  सम्पति घोषित करने और काला धन विदेशी बैंको में जमा करवाने वालों के खिलाफ मृत्यु दंड की मांग में राम लीला मैदान में लाखों समर्थकों के साथ अहिंसक व् शांतमयी     धरना   दिया तो हमारी सेकुलर शैतानों की सर्कार ने आन्दोलनकारियों    को पीट   पीट कर भगाया और भगा भगा कर पीटा. जाहिर है सरकार में बैठे राजनेता नहीं चाहते  कि लोग स्विस बैंको में पड़े पैसे पर हो हल्ला करे क्योंकि अधिकाँश पैसा पिछले ६४ साल से सत्ता सुख भोग रहे राजनेताओं और उनके कुनबे का है. उल्टा आन्दोलनकारी समाजसेवकों को झूठे मामलों में प्रताड़ित करने का खेल खेला जा रहा है. मिडिया को इन समाजसेवकों के खिलाफ प्रचार के लिए करोड़ों रूपए की 'विज्ञापन  सुपारी' दी जा रही है. ताकि आम लोगो में भ्रम फैलाया जाए. एक सर्वे के अनुसार देश की ५४ % जनता भ्रष्टाचार के प्रति संवेदनहीन है. एक ही परिवार और पार्टी की सरकार की पिछले ६४ साल में देश 
को भ्रष्टाचार के गर्त में धकेलने कि यह सबसे बड़ी साजिश है. 
तोहमतें आयेंगी नादिरशाह पर - आप दिल्ली रोज़ ही लूटा करो .
नेहरु का बोया भ्रष्ट बीज  आज मनमोहन के सर पर वट वृक्ष बना इतरा रहा है - महज़ ६८ करोड़ के बोफोर्स घोटाले पर केंद्र की सरकार औंधे मूंह गिरी थी .. आज १.७६ लाख करोड़ के २जी घोटाले पर देश में शमशान सी ख़ामोशी है. क्योंकि ऐसे महां घोटाले तो  अब  रोज़ रोज़ उजागर हो रहे हैं.  चोरों का सरदार सिंह फिर भी ईमानदार है ? न्यायालयों की सक्रियता के चलते अनेक मंत्री और संत्री तिहार जेल में बंद हैं. सिलसिला अगर यूँ ही जारी रहा तो एक दिन मंत्री मंडल की बैठक भी तिहार जेल में होगी और हमारे चोरों के सरदार और फिर भी ईमानदार प्रधानमंत्री को भी     ' ति...    हा ...   र ...  '       तो जाना ही पड़े.... गा ..........??????????

मंगलवार, 19 जुलाई 2011

बाबा का राम बाण

बाबा का राम बाण 

एल.आर. गाँधी  


दशकों  से राम लीला मैदान में - राम लीला का अंत दशहरे को, बुराई के प्रतीक रावण दहन से होता आया है..... मगर इस बार सत्ता के नशे में मदमस्त 'सेकुलर शैतानों ' ने राम लीला मैदान को 'रावण लीला' का अखाडा  बना डाला और सत्य- अहिंसा की रामसेना को रात के अँधेरे में खदेड़ कर दशानन विजय का बिगुल बजा दिया. बाबा राम देव के अभियान को पलीता लगाने के लिए सरकारी खजाने का मुंह खोल दिया और महज़ पांच दिन में मिडिया के वाच डाग्ज़ को १७०० करोड़ के विज्ञापन  टुकड़े डाल दिए- और हमारे मिडिया के दलालों ने भी खूब बाबा की खबर ली. 
मगर बाबा का राम बाण तो चल गया ..... राम लीला मैदान की सरकारी शैतानियत सारे देश ने ही नहीं सारे विश्व ने देखि ..और असर भी विश्व व्यापी हुआ. भारत की जनता में यह साफ़ साफ़  सन्देश गया कि देश पर राज करने वाले ये काले अँगरेज़ अव्वल दर्जे के चोर -डाकू हैं. विदेशी बैंकों में पड़ा अधिकाँश काला धन इन्हीं राजनेताओं का है  , जिसे वे किसी भी कीमत पर ज़ाहिर  नहीं होने देंगे . बाबा के राम बाण से घायल तो ये शैतान भी हुए ही हैं .. तभी तो राजमाता- राजकुमार अपने दशानन भेदियों सहित ८ जून को निजी विमान से स्विसत्ज्र्लैंड भागे ... अपना काला धन ठिकाने लगाने को !!!!  मज़े की बात तो यह है कि अपने आप को देश के वाच डाग ... भेदी कुत्ते कहने वाला मिडिया भी मुंह में विज्ञापन की मोटी सुपारी दबाए चुप चाप बैठा है.. किसी ने माँ- बेटे से सवाल नहीं किया कि वे चुप चाप स्विस्द्जर्लैंड कौन से ज़रूरी काम से गए थे...   
बाबा का राम बाण तो बहुत दूर तक काम कर गया .... स्विस सरकार और स्विस बैंक बाबा के राम बाण से बेहाल हैं .. स्विस मिडिया का मानना है की बाबा फैक्टर स्विस अर्थ व्यवस्था पर बहुत भारी  पड़ा है .. स्विस बैंको की जमा राशी में यका यक १५ लाख करोड़  डालर की कमी आई है. यदि यही हाल रहा तो स्विस बैंको का काला गोरख धंधा चौपट हो जाएगा. इन बैंको का  ५२ %  कारोबार हमारे चोरों के पैसे से ही चलता है. 
भारत के बाद स्विस बैंकों में सबसे अधिक काला धन चीन और रूस का है. बाबा की मुहीम ने वहां भी अपना असर दिखाया है ...अरब देशों के जनांदोलन से  चीन और रूस के हुक्मरान पहले ही बहुत चिंतित हैं .. चीन ने क़ानून बना कर  स्विस सरकार से स्विस बैंकों में चीनियों के काले धन का विवरण मंगवा लिया है, और काले धन पर कानून में मृत्यु दंड का बदलाव भी कर रहा है.  दूसरी ओर रूस में एक समाजिक कार्यकर्त्ता बदिमीर ईलिनोईच द्वारा चलाया जा रहा आन्दोलन जोर पकड़ता जा रहा है. रूस की सरकार ने जनता को आश्वासन दिया है कि देश का सारा काला धन दो माह में वापिस मंगवा लिया जाएगा.     
नेट पर भी सरकार के खिलाफ ज़बरदस्त आन्दोलन चल रहा है .. फिर भी हमारे ये काले अँगरेज़ खुश फहमी में मस्त हैं कि ... खाए जाओ खाए जाओ .. किहने भेद खोलना ऐ.. आपे रौला पाए जाओ .. भुखेयाँ नूँ लमियाँ कहानिया सुनाए जाओ.  मगर ये भूल गए की राम बाण से रावण नहीं बच पाया ये किस खेत की मूली हैं.