बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

पाक की नापाक दरिंदगी -भारत की अंधी गली !

पाक की नापाक दरिंदगी -भारत की अंधी गली !
                एल.आर.गाँधी.

हमें अंधी गली में धकेला जा रहा है..... सबसे कठिन दौर में हैं अल्पसंख्यक.... यह शब्द हैं पाकिस्तान के ईसाई सांसद अकरम मसीह गिल के ... पाक में अल्पसंख्यकों पर निरंतर बढ़ रहे अत्याचारों के चलते विधायक राम सिंह सोधो जान बचा कर भारत आ गए. जब एक विधायक आपने आप को महफूज़ नहीं पाता तो आम ' हिन्दू' की क्या बिसात है. अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले सही सोच के मुसलमान का हश्र गवर्नर सलमान तासीर जैसा होता है जिन्हें उनके ही बाडीगार्ड मुमताज़ कादरी ने गोलियों से भून दिया और पाक में ख़ुशी का माहौल तारी हो गया 'कादरी' पर अदालत में फूलों की बरसात की गई और मुल्लाओं ने उसे 'गाजी' जो काफिरों को मारे !की उपाधि से सम्मानित किया. पाक में आज भी १४०० साल पुराने इस्लामिक क़ानून तारी हैं . किसी भी अल्पसंख्यक को ईशनिंदा के इलज़ाम में कभी भी फंसाया जा सकता है और सजा भी है उम्र कैद या फांसी. जो काम पिछले १४०० साल से 'जाजिया' करता आ रहा है वही  काम अब 'ईशनिंदा' कानून  ने संभाल लिया है. किसी भी  गरीब हिन्दू को जो जाजिया नहीं दे पाता था 'इस्लाम' कबूल करवाने का जरिया बनता था -जाजिया. अब 'ईशनिंदा' के डर से इस्लाम कबूल करना ही एक मात्र विकल्प बचा है पाक में हिन्दुओं के लिए.
पाक में आज ९७% मुसलमान हैं और केवल १.६ % हिन्दू १.६% ईसाई व् .००१% सिख बचे हैं .विभाजान के वक्त पाक में अल्प संख्यक एक चौथाई के करीब २४% थे और पिछले छह दशक में घटते घटते महज़ ३% रह गए हैं यदि यूं ही 'इस्लाम' की शरियत मान्यताओं का कहर जारी रहा तो ज़ल्द शून्य रह जायंगे. हमारे सेकुलर प्रधान  मंत्री जी को जब मालूम हुआ कि आष्ट्रेलिया में एक  हिन्दुस्तानी मुस्लिम डाक्टर को आतंकवादी समझ कर प्रताड़ित किया गया है तो सिंह साहेब  की रातों की नींद हराम हो गई . मगर राम सिंह सोंधो के जान बचा कर भारत पहुँचाने पर हमारे 'सिंह' साहेब को कोई मलाल नहीं ! शायद-
भारतीय सेकुलरिज्म का यही तकाजा है.
देश के बंटवारे के वक्त पाक की कुल आबादी ३० मिलियन थी जो अब बढ़ कर १७० मिलियन हो गई है अर्थात यह वृद्धि पांच गुना हुई . यदि  अल्पसंख्यकों की जनसँख्या भी इसी रफ़्तार से बढती तो पाक में  आज अल्पसंख्यक लगभग ४० मिलियन होने चाहियें मगर हैं मात्र ५ मिलियन . यह आंकड़े चौकाने वाले हैं - पिछले छह दशक में ३५ मिलियन अल्पसंख्यक जिनमें अधिकाँश हिन्दू थे ...इस्लामिक कट्टरवाद की भेंट चढ़ गए और हमारे सेकुलर शैतानों और मानवाधिकार के ठेकेदारों व् आदर्शवादी  मिडिया के मूंह से इस त्रासद मानव-विध्वंस पर कभी 'हे राम' तक नहीं निकल माया. ईष्ट पाक अब बंगलादेश में भी  अल्पसंख्यको का यही हाल है. करोड़ों लोग तो आतंक और बेबसी के चलते हमारे देश में ही घुस आए हैं. पिछले छह दशक में हिन्दुओं की जनसँख्या ३४% से सिमट कर मात्र ९% रह गई  है. हमारे सेकुलर शैतान फिर भी बंगलादेश की आज़ादी पर अपनी पीठ थपथपा कर मस्त हैं. जैसे 'हिन्दुओं का कोई मानव अधिकार है ही नहीं'.
पिछले १४०० बरस में जब से इस्लाम और जेहाद ने जन्म लिया है लगभग २७० मिलियन 'काफ़िर' जो इस्लाम को नहीं मानते थे मौत के घाट उतार दिए गए !अफ्रीका में इस दौरान १२० मिलियन ईसाई व् अन्य 'काफ़िर' जेहाद की भेंट चढ़ गए. हिन्दुओं की आधी आबादी लगभग १०० मिलियन और सिल्क रूट के सभी बौध -लगभग १० मिलियन , भी इस्लामिक आतंक की ताब न ला सके. बिहार का नालंदा विश्व विद्यालय जो विश्व का सबसे विशाल और प्राचीन ज्ञान केंद्र था - मुस्लिम आक्रान्ता 'खिलज़ी ' द्वारा महज़ इस लिए नेस्तो- नामूद कर दिया गया क्योंकि विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में 'कुरआन' नहीं थी. ज्ञान के समंदर पुस्तकालय को आग लगा दी गई जो तीन माह तक जलती रही .....यह जेहाद के वो आंसू हैं जो किसी पुस्तकालय में नहीं पढाए जाते.
जेहाद के अज्ञान की इसी अग्नि में सारा 'अरब' जल रहा है अरब के २० देशों में से १६ में तानाशाही साम्राज्य है. बाकी २ इरान और लेबनान में गृह युद्ध जैसी स्थिति है. इन देशों में तानाशाह और नई व्यापारिक जमात का नियंत्रण है जिसे  अमेरीका और इस्लामिक कठमुल्लाओं का समर्थन प्राप्त है, और इस्लामिक आतंवाद  को पनपाने में इस व्यवस्था का मुख्य हाथ है .गत १००  साल में इन अरब देशों का मानवीय ज्ञान के उत्थान  में  बंगला देश से भी कम योगदान रहा है. अरब की रियाया आज विश्व की सबसे लहुलुहान सभ्यता है. जिसके समक्ष कोई भी ऐसा रहनुमा नहीं जो उसे सही राह दिखा सके.वे पश्चिम द्वारा दबाए जाते है , इजराइल की ठोकर पर हैं और आपने ही नवाबों के विश्वाश्घात के दंश से पीड़ित. अरब देशों की प्रगति का अंदाज़ा इस तथ्य से ही भली भांति उजागर होता है कि सारे अरब देशो द्वारा उत्पादित  सामान का निर्यात इजराईल  से भी कम है.
मिश्र से हुई शुरुआत अब सभी अरब देशों में फैलने जा रही है. अरब की जनता को अपना भविष्य अब इस्लाम के स्थान पर लोकतंत्र में तलाशना ज्यादा मुफीद नज़र आ रहा है. दस   लाख मिश्र वासियों का हजूम हुस्ने मुबारक के ३० साल पुरानी  तानशाही के विरुद्ध सड़कों पर है - जब कि विकल्प नदारद है...फिर भी लोग तानाशाही का  बस अंत चाहते हैं.
अपनी मज़हबी मान्यताओं के फलसवरूप मुसलमानों की आबादी तो नित्य नई उचाइयां छू रही है. विश्व की कुल आबादी बीस साल बाद ६.९० अरब से बढ़ कर ८.३० अरब हो जाएगी वहीँ मुसलामानों की आबादी १.६० अरब से बढ़ कर २.२० अरब होगी.बढती आबादी के चलते निश्चय ही उपलब्ध संसाधन बौने पड़ जायेंगे और फिर कोई 'चंगेज़ खान' मानवता के खून से अपनी शमशीर की प्यास बुझाएगा....

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रविवार, 16 जनवरी 2011

आज के युग में पति द्वारा औरत को पीटना क्या जायज है ?










आज के युग में पति द्वारा औरत को पीटना क्या जायज है ?
                            एल.आर.गान्धी. 

भारतीय राजनयिक अधिकारी अनिल वर्मा ने अपनी पत्नी को क्या पीट दिया ' सारे सभ्य समाज में बवाल मच गया . भारत ने भी अपने अधिकारी को वापीस बुला लिया और उसके खिलाफ सख्त कारर्वाही की जाएगी ?
इसी बीच वर्मा की पत्नी प्रोमिता ने अपने और पांच वर्षीय बेटे के लिए लन्दन में शरण देने की गुहार लगाई  है. एक सभ्य समाज में पति द्वारा अपनी पत्नी को पीटना एक अक्षम्य अपराध है और होना भी चाहिए !
यदि लन्दन के स्थान पर  यहि राजनयिक साउदी अरब में होता तो क्या वहाँ की सरकार भी एसी ही कारर्वाही करती- जाहिर है बिल्कुल नहीं . एक मुस्लिम देश में कुरान की हिदायतों के अनुरुप 'शरियत' कानून नासिर हैं और शरियत में पति द्वारा औरत को पीटना कोइ जुर्म नहीं ! 'किसी आदमी से यह नहीं पुछा जायगा कि उसने अपनी बीवी को क्यों पीटा - पैगम्बर.... इस्लाम में एक समय में चार बीवियाँ तक रखने की इज़ाज़त है और इसके इलावा उतनी लौंडियाँ   भी जितनी कोइ रख सके  ! औरत को आदमी के साथ् बराबरी का कोइ अधिकार नहीं इस्लाम में.... तभी तो पिता की ज़ायदाद में लड्की को लड़के से आधे हिस्से का अधिकार दिया गया है. (२.११,४.१२,१७५ ) . 
पिचले दिनो एक पश्चमी देश में किसी मुस्लिम महिला ने कोर्ट में फर्याद की कि उसका पति उसको पीट्ता इस लिए उसे तलाक की इज़ाज़त दी जाए. कोर्ट ने कुरान के दृष्टान्त दे कर महिला की अर्जी खारिज कर दी .. क्योंकी महिला मुसलमान है और कुरान को मानती है इस लिए उसके पति को उसे  पीटने का अधिकार  है.
मुस्लिम देशों में भी अब 'शरियत कानूनों की आड में मर्दों द्वारा औरतों पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध आवाज बुलन्द होने लगी है. पिछ्ले दिनों बंगला देश में चार बीवियों ने अपने शौहर की खूब धुनाई कर डाली. हुआ यों कि ४६ वर्षीय औटो  रिक्षा चालक युसुफ मियाँ अपनी दो बिवियों को जब   मेला दिखा रहा था तो वहाँ उन्हें उसकी तीसरी बीवी मिल गइ - यहीं पर बस नही - तीसरी बीवी ने पहली दो बीवियों को बताया की एक बीवी और भी है. बस फिर क्या था सभी बीवियों ने युसुफ मियाँ की खूब धुनाई की ...और शरियत के कानून धरे के धरे रह गए ! ऐसा ही एक किस्सा इस्लामिक रिपब्लिक पाक साफ 'पाकिस्तान के पन्जाब प्रदेश का है. गुज्रान्वाला  शहर के  मियाँ इसहाक अपने एक दोस्त के निकाह समारोह में मश्रूफ थे और उसके साथ् थी उनकी तीसरी बेगम ! तभी दर्ज़नो सगे सम्बंधियों संग इसहाक मिया की दो बीविया मेह्विश और उज्मा वहाँ पहुँच गईं- और सभी ने मिल कर मियाँ इसहाक की खूब धुनाई की , क्योंकी  उन्हें भनक लगी थी की इसहाक मिया पाँचवी बार निकाह की योजना बना रहा था....  
वर्मा साहेब पर भारत की सैकुलर सरकार कानून के अन्तर्गत कारर्वाही करने जा रही है और करनी भी चाहिए. क्योंकी हमारे संविधान में सभी नर नारियों को समान अधिकार प्राप्त हैं. शायद ये  संविधानीक  अधिकार मुस्लिम औरतो के लिए कतई नहीं हैं. जब देश की सर्वोच्च अदालत ने शाहबनों को 'गुज़र बसर भत्ते' का अधिकार देते हुए फैसला सूनाया तो इस्लाम के पैरोकार मौल्वियों के विरोध के आगे हमारे सैकुलर राजवाड़े घिघियाने लागे और अदालत का फैसला संसद में 'रद्द' कर दिया. इस्लाम में तो बीवी को पीटने का पति को पूरा अधिकार दिया गया है और एक समय में बेंत से दस वार करने की हिदायत है .. और जो स्त्रियाँ एसी हों , जिनके विद्रोह से तुम्हें भय हो , उन्हें डाटो, फटकारो 'विस्तार में उन्हें तनह छोड दो और मारो. फिर यदि वे तुम्हारी बात मानने लागें तो उनके विरुद्ध कोइ राह मत डूंडो ! निस्सन्देह अल्लाह सबसे उच्च और सबसे महान है....   कुरान ..४.३४ .. 

                          

  

मंगलवार, 4 जनवरी 2011

गाँधी गिरी बनाम आतंकवाद








     एल.आर. गाँधी  
 निरंतर पिटने और कौक्रोच पालने को हमने अपना राष्ट्रीय व्यसन बना लिया है. 
कोई एक गाल पर मारे तो अपना दूसरा गाल उसके आगे कर दो ! राष्ट्र पिता ? की  नीति थी , जिसे हमने अपनी नियति मान लिया और उन्ही की नीतियों पर चलते हुए 'आस्तीन में सांप  पालने' का व्यसन हमारे सेकुलर शैतानों की राष्ट्रिय पहचान बन गया है. आस्तीन के सांपों ने राष्ट्र के लोक तंत्र के मंदिर 'संसद पर आक्रमण किया और सुरक्षा प्रह्रिओं ने अपनी जान पर खेल कर ' अपने  आतंकियों ' से संसद और सांसदों को किसी तरहं बचा लिया ! पोटा अदालत में एक  साल की सुनवाई के बाद तीन अभियुक्तों को सजाए मौत और अफसाना को पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई. अक्तूबर २००३ में उच्च न्यायालय ने अफसाना और गिलानी को दोष मुक्त कर दिया . सर्वोच्च न्यायालय ने २००५ में मुख्य अभियुक्त अफज़ल गुरु की सजाए मौत को बरकरार रखा और उसके चचेरे भाई शौकत गुरु की सजा घटा कर १० वर्ष कारावास कर दी. 
दस वर्ष बीत जाने पर भी बापू की सेकुलर सरकार अफज़ल गुरु को फांसी की सजा पर अमल कर पाने की  'पसोपेश' में है और नित नए नए बहाने बना कर 'काक्रोच' पाल रही है. पहले अफज़ल की फ़ाइल शीला जी के  कपबोर्ड में सालों पलती रही और गृह  मंत्री जी 'याद पत्रों' की खाना पूर्ती करते रहे . अब फ़ाइल चिदम्बरम जी के कपबोर्ड में पल रही है और गृह मंत्री जी  महामहिम प्रतिभा जी  को पहले  भेजे  गए केसों पर फैसले की बाट जोह रहे हैं. क्योंकि सेकुलर सरकार हर काम कायदे से करती है भले ही सालों बीत जिएँ ?
यह तो थी ' अफज़ल गुरु' पर सरकार की कछवा चाल  कार्रवाही की कहानी. अब उसके चचेरे भाई शौकत गुरु पर सेकुलर सरकार की सुपर फास्ट कहानी मुलाहिजा फरमाएं. ! शौकत की दस साल की सजा में से सभी सरकारी रियायतों के उपहार सवरूप ९ मॉस काट कर उसे रिहा कर दिया गया. शौकत मियां को अच्छे आचरण के चलते प्रति माह २ दिन माफ़ कर दिए गए और ऐसे ही २ दिन  प्रति माह अच्छे काम के मिले. १ दिन प्रति माह आपने काम से छुट्टी न करने के. फिर कैदियों को राज्य सरकार ' गणतंत्र दिवस ' पर १ माह की छूट भी देती है , और शौकत मियां से बढ़ कर  इस छूट ' का दूसरा कोई और हक़दार तो हो ही नहीं सकता. ३ साल की कैद के बाद वार्षिक छूट सो अलग. जेल नियमावली के अनुसार 'शौकत मियां' को सभी रियायतें एक साथ दे कर बिना एक भी दिन जाया किये ' आज़ाद' कर दिया गया . क्योंकि उसके गृह राज्य कश्मीर में बरफ बारी हो रही है इस लिए वह  दिल्ली के आजादपुर मंडी इलाके में आपने एक सम्बन्धी के यहाँ टिका हुआ  है.
सेकुलर सरकार के  इस राष्ट्रिय व्यसन 'एक गाल पर चांटा खाओ  और दूसरी तैयार रखो ! से हमारा पडोसी पाकी -शैतान चिर परिचत है . तभी तो उसने मुम्बई पर 'जेहादी' हमला कर हमारी आर्थिक राजधानी को हिला कर रख दिया और १६६ बेगुनाह भारतियों और विदेशी मेहमानों को मार डाला. हम फिर आपने राष्ट्रिय व्यसन के अनुसार ' कसाब' रुपी कौक्रोच को पाले हुए हैं चाहे उसके लालन पालन पर ५०% भूखो के देश का ५० करोड़ रुपया खर्च क्यों न  हो गया . अरे यह तो जिंदा काक्रोच है - हमने तो कसाब के ९ मृत 'जेहादियों' को भी सवा साल तक अस्पताल के 'शव कक्ष ' में संभाले रखा ! यह तो हुए हमारे 'काक्रोच' और आस्तीन के सांप जिन्हें हम बड़े चाव से पाल रहे हैं . यहीं पर बस नहीं ' पाकी-शैतान ' पर हम लम्बे आर्से से दवाब डाल रहे हैं कि वह अपने  यहाँ के 'भारत विरोधी ' आतंकियों को हमारे हवाले करे . अमेरिका और अन्य  देशो को भी गुहार लगा रहे हैं. ताकि हमारा राष्ट्रिय व्यसन , वही '  काक्रोच पालने का ' परवान चढ़ सके . 
  एक ओर तो हम पाकी -शैतान को विश्व के समक्ष आतन्कवाद की जन्म स्थली सिध् करने का कोइ अवसर हाथ्  से नहि जाने देते। दूसरी ओर हमारी सैकुलर सरकार  ' ज़ेहाद् ' के केन्द्र मदरसो को आर्थिक सहायता  दे कर प्रोत्साहित कर रहि है। सरकारी सहायता की होड में सामान्य मुस्लिम संचालित सकूल् भी 'मदर्से' का बोर्ड लगा कर सरकारी ग्रान्ट हद्दप्  जाते हैं।  एसे मदर्से जहा बच्चो  को शरियत और ज़ेहाद् का पाठ पिलाया जाता है हमारे यहा पाक से सौ  गुण अधिक  हैं।    
फिर भी हमारे दिग्गी मियां और चिद्दी मियां को सिर्फ और सिर्फ भगवा आतंक से ही खतरा दिख रहा है. 

     
  

सोमवार, 3 जनवरी 2011

धरा- दिनकर का लुका छिपी महोत्सव ....

धरा- दिनकर का लुका छिपी महोत्सव ......

                    एल. आर. गाँधी. 
                               
 आज दिनकर.... धरा... संग लुक्का छिप्पी का खेल खेलेंगे .....
अनादी काल से एक पैर पर गोलाकार नृत्य में निमग्न धरा अपने प्रियतम की परिक्रमा में तल्लीन है और दिनकर भी निरंतर निहारते हुए अपनी उर्जा की पुष्प वर्षा कर उसे अखण्ड  सौभाग्यवती भव की मंगल आशीष से आनंदित कर रहे हैं . भ्रमांड के इन प्रथम प्रेमिओं के सृष्टि सम्भोग का आज महोत्सव है. नए वर्ष में ऐसे छह महोत्सव होंगे और चार जनवरी को इस प्रथम  उत्सव का विश्व मन्चन प्रात्य से  सांय तक चलेगा ...लो ... चाँद ने मंच संचालन का जिम्मा संभाल लिया है.... धरा ने आँखें बंद कर लीं.... और....और  दिनकर ने छुपने का स्थान ढूंढने की कवायत शुरू कर दी...... लो दिनकर छुप गए...और ... और धरा दबे पाँव अपने प्रियतम को ढून्ढ रही है. ...चाँद चुप चाप इस खेल को निहार ..ठंडी आहें भर रहा है. मानो.... तीनों आज सदिओं के बाद इतनी लम्बी छुट्टी पर पिकनिक माना रहे हैं ..पिछले कई दिनों से सूर्या देव इस उत्सव की तैयारी में लगे थे.... बादलों की ओट में छुपने का अभ्यास कर रहे थे... और धरा उनके इस लुका -  छुपी के खेल से पानी पानी हो पिंघल कर जमी जा रही थी .
वैज्ञानिक विशाल काय दूरबीनों से इस महापर्व को निहार रहे हैं और इस महा सृष्टि सम्भोग से पैदा होने वाली उथल पुथल की विवेचना में लगे हैं और हम लोग अपने परलोक की चिंता में ग्रस्त प्रदूषित-पवित्र ठन्डे जल की डुबकियां लगाने में व्यस्त हैं कुरुक्षेत्र की पुन्य भूमि में लोग इस ग्रहण के  दुष्परिणामों  से निजात पाने के लिए धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करेंगे.  अपनी भविष्य  विज्ञान  की पोथिओं के गर्भ से 'कुम्भ राशी' के जातको को आतंकित कर , सूर्य ग्रहण से होने वाली विप्पत्तियो से छुट्कारे के उपाए सुझा कर 'मोटी दक्षिणा' बटोराने में,ज्योतिषी  सिध्हस्थ हैं.   और सरकार ने पुन्य भूमि  कुरुक्षेत्र  में छुट्टी  घोषित कर दी है.ब्रह्म सरोवर में डुबकी लगाने के लिए ५ लाख श्रधालुओं के आने की उम्मीद थी - कहते हैं इस वक्त की एक डुबकी जन्म जन्मान्तर के पाप हर लेती है ! मगर सरोवर के घाट को देख कर ऐसा आभास हो रहा था जैसे कहर की ठण्ड के आगे आस्था ठिठुर कर ठिठक गई...कहर की ठण्डी और अनजाने से  परलोक की  चिन्ता में बर्फीले पानी की डुबकी !.. न बाबा न ... .हम तो भई इतनी ठंडी में 'पंच-स्नान ' से ही संतुष्ट हैं और देव लोक प्रद्दत सोम रस की चुस्कियों में विश्व के प्राचीनतम प्रेमियों की रास लीला का लुत्फ़ उठा रहे हैं . 
हमारी गृह लक्ष्मी जी शीतल जल से स्नान कर एक हाथ में दूब के तिनके और दूसरे में गंगा जल का लोटा लिए सारे घर में गंगा जल का छिडकाव कर आसुरी शक्तिओं को बाहर का रास्ता दिखा रहीं हैं. ग्रहण से पूर्व सभी खाद्य पदार्थों में एक-एक दूब का तिनका टिका दिया गया था ताकि सूर्य ग्रहण के दुष्परिणामों से बचे रहे. 
इसे कहते हैं कुंठित मान्यताओं के अंधकूप में डूबते को 'तिनके' का सहारा !

सोमवार, 20 दिसंबर 2010

'मार् दिया दिल्ली की सर्दी '







                                                  'मार् दिया दिल्ली की सर्दी '                                                                                                                                
                                                                    एल..आर.गान्धी. 


मौसम के खबरीओं का अनुमान है -अबकी बार ठण्ड अपने सभी पिछ्ले रिकर्ड तोड देगी ! पिछली दिसबर की  कम्प्कम्पाती ठण्डी में शीला जी की नगर निगम के अफ्सरों  ने बेघर लोगो का रैनबसेरा गिरा दिया ताकी 
वहाँ पार्क बनाया जाए तो बेघर  लोग उसी स्थान पर ठण्ड से मरने लागे. एक सव्यम सेवी संस्था ने सर्वोच्च न्यायालय को लिखा तो न्यायाक्य ने इसका सख्त नोटिस लेते हुए दिल्ली सरकार को बेघर लोगों के लिए रैनबसेरे दुगने  करने का  आदेश जारी किया. इस बरस शिला जी के अफ्सर फिर दो रैनबसेरे तोड़ते हुए पाए गए तो सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए की यह निश्चित किया जाए की कोइ भी बेघर इन्सान मरने  न पाए . सारे देश में बेघर इन्सनों के लिए पर्याप्त रैन्बसेरों का प्रबन्ध किया जाए. भविष्य में किसी भी रैनबसेरे को तब तक न तोडा जाए जब तक उसके स्थान पर नए आवास का प्रबन्ध न हो जाए. इसके साथ् ही दिल्ली के सभी ६५ रैनबसेरों को एक सप्ताह के भीतर चालु करने के भी निर्देश दिए गए.
देश की राजधानी जहाँ आधुनिक भारत के सभी सैकुलर शासक बडी बडी आलिशान वातानुकुलित अट्टालिकाओं  में चैन की नींद सोते हैं , वंहीं एक लाख बदनसीब बेघर गरीब इतनी भीषण ठण्ड में भी खुले असमान के नीचे तिल तिल मरने  को मजबूर हैं. शीलाजी का दावा है कि सोनिया जी की सरकार ने सभी के लिए रैन्बसेरों का पक्का इन्तजाम किया है. जबकी मौजुदा रैनबसेरे मात्र ६००० इनसानो को आश्रय दे पाते हैं .एक अनुमान के अनुसार दिल्ली की सर्दी हर रोज १० इनसानों को लील जाति है. निज़ामुदीन क्षेत्र  का एक आदमी जो मृत्कों के शवों के अन्तिम संस्कार का कार्य कर्ता है का कहना है कि पिछ्ली सर्दी में उसने हर रोज ९ लोगो को शम्शान पहुन्चाया .   
देश में ऐसे बेघर जिनके पास सर छुपाने को झोपडी भी  नहीं ,  एक करोड तीस लाख हैं और इन् पर प्रति व्यक्ति ५-६ जीव  आश्रित भी हैं. भीषण सर्दी ही नहीं -मान्सून -भीषण गर्मी , बिमारिया, बच्चो  की पढाई , बेरोजगारी और सबसे बडी समस्या भूख के चलते ये लोग महानग्रों की सड्कों के किनारे प्रति दिन तिल तिल मरते हैं.    
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर  कर्नाटक और गुजरात सरकार तो कुछ हर्कत में आइ हैं  कर्नाटक सरकार ने राज्य के सभी ज़िलाधिशों को और २१४ लोकल बडिज़ को ४९ सूत्री कार्य क्रम के तहत बेघर गरिबों के लिए आवास और भोजन के समुचित प्रबन्धन पर ३ माह के भीतर कार्यान्वन के आदेश दिए हैं . वहीं गुजरात में अहमदाबाद नगर निगम ने बेघर लोगों के लिए ६ डौरमैटारी किसम के आवास 'रैनबसेरे'  बनाने की योजना बनाई है जहाँ बेघर  लोग रात्री के वक्त ठहर सकेंगे और इसके इलावा ऐसे लोगों को रात्री के वक्त रैन्बसेरों, कैमुनीटी केन्द्र , मंदिरों और दिस्पैन्सरिओन् में आश्रय दिया जाएगा.  
वहीं देश के सबसे बडे  प्रदेश उत्तर प्रदेश की  महारानी माया वती जी के पास 'माया' की कमी के चलते इस योजना पर कोइ भी कारवाई करने का न तो वक्त है और न ही पैसा. फिर भी प्यार की धरोहर ताजमहल के लिए मशहूर आगरा में एक श्री निशुल्क जल सेवा दल के बाँके लाल महेश्वरी द्वारा ५० बेघर इन्सानों के लिए एक रैनबसेरा ज़रुर बनाया गया है. माया जी के पास विशाल मूर्तियों ,स्मार्कों, पत्थर के भीमकाय हाथियों के लिए तो करोदों रुपये  हैं मगर इन्सानों के लिए ...........
दिल्ली पुलिस के रेकर्ड के अनुसार २००५ से २००९  तक ऐसे बेघर बेसहारा मरने  वालों की संख्या ३१०३ रही. इस के अतिरिक्त जिन बेसहारा लोगों को पास पड़ोस के लोग खुद ही अन्तिम संस्कार कर देते हैं कि गिन्ती प्रति दिन १० मृत्कों की है. पुलिस की माने तो बेसहारा लोग भीषण गर्मी का शिकार अधिक संख्या में होते हैं.ऐसे मृत्कों में ९४% लोग औस्तान ४२ वर्ष के मजदुरी करने वाले पुरुष होते हैं. मात्र ८% लोग दुर्घटना या हत्या का शिकार होते हैं जबकी ९२% लोग भूख, प्यास ,गर्मी, ठण्ड, बिमारी और निर्धनता के कारण बिना उपचार रोगों जैसे टी.बी. मलेरिया या नशा जन्य रोगों के शिकार हो  जाते हैं .
लौह  पुरुष वल्लभ भाई पटेल ने रियासतों को समाप्त कर देश में लोक तंत्र की नींव इस लिए मज़बूत की कि लोगों द्वारा चुनी गई सरकारें गरीबों और बेसहारा मजलूमों को रोटी कपडा और मकान की मूल भूत सुविधाएँ उपलब्ध करवाएंगी . मगर आज़ादी के ६३ वर्ष बाद भी गरीब और गरीब होता गया और आज हम विश्व के भ्रष्टतम  देशों के सिरमौर हैं. अरे इन सेकुलर शैतानों से तो बेहतर  रियासती रजवाड़े ही थे . रियासती दौर में शहर के सभी साहूकारों को महाराज की विशेष हिदायत थी कि शर्दी के मौसम में वे अपनी हवेली के अहाते में 'अलाव' जलाएं ताकि बेघर -गरीब लोग और जानवर ठण्ड से राहत पा सकें . इसके इलावा सभी सम्प्रदायों की अपनी अपनी धर्म शालाये और रियासत के रैनबसेरे बेघर लोगों को ठण्ड व् गर्मी से राहत के लिए खोल दिए जाते थे जहाँ भोजन और जलपान की व्यवस्था के अतिरिक्त धर्मार्थ संस्थाएं कम्बल-रजाई निशुल्क उपलब्ध करवातीं थी . पशुओं को  गौशाला में आश्रय  और आहार मिल जाता था. अब इंसानों का यह हाल है- पशुओं का तो बस भगवान ही मालिक है.   
दिल्ली के रईसजादों के लिए तो सर्दी का मौसम उस फिल्मी गीत की माफीक है....'प्यार तेरा दिल्ली की सर्दी' ... और बेघर गरिबों के लिए 'मार् दिया दिल्ली की सर्दी....        

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

मूर्ख- नपुंसक या बौधिक-किन्नर

 मूर्ख- नपुंसक या बौधिक-किन्नर 
एल.आर.गाँधी. 

हमारे सेकुलर शैतानों को विश्व भर में नए नए ' अलंकारों ' से नवाज़ा जा रहा है. सिंगापूर के एक वृष्ट अधिकारी ने अमेरिकियों के साथ एक बैठक में भारत को 'मूर्ख दोस्त' कहा . इसका खुलासा विक्किलीक्स में हुआ . हमारे विदेशी और देसी राजनेताओं को इस का कोई मलाल भी नहीं. अमेरिकन अधिकारिओं के गुप्त सन्देश नित नए नए रहस्योदघाटन कर रहा है विकिलीक्स . २६/११ के आतंकी हमले के बारे में अमेरिका को पूर्व सूचना थी फिर भी उसने हमारे साथ उस महत्तवपूर्ण जानकारी को 'साँझा ' करने की जेहमत  नहीं उठाई. और हम हर आतंकी हमले की शिकायत अमेरिका से ऐसे किये जाते हैं जैसे कोई लाचार- बेबस बार बार मार खा कर आपने भगवान् को याद करता है. अमेरिका को हम विश्व आतंक वाद के खिलाफ अपना चिर सहयोगी मान बैठे हैं और यह भूल गए की अमेरिका के हित पाक के साथ जुड़े हुए है . फिर मूर्ख और नपुंसक का साथ देता भी कौन है ? 
वर्षों से हमारे गृह मंत्री जी  चिल्ला चिल्ला कर आसमान सर पर उठाए हुए हैं कि पाक को २६/११ के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाही के लिए कहा जाए . पाक के यहाँ पनाह लिए आतंकियों  को हमारे सपुर्द किया जाए. अरे भाई जिन आतंकियों को हमारे उच्चतम न्यायालय ने फांसी पर लटकाने की सजा सुना रखी है , पहले उनको तो निपट लो पाक में बैठे आतंकियों को mangwa कर क्या aachaar daloge उनका ? .  एक दशक बीत गया मगर  अफज़ल मियां लाईन में लगे हैं ,कभी शीला जी के पास फाईल अटक जाती है और अब चिदम्बरम  जी के यहाँ पड़ी है. १३ दिसंबर को देश की संसद और सांसदों  की हिफाजत में शहीद हुए जवानों को श्रधांजलि  दी गई और हमले के एक मात्र सजायाफ्ता 'अफज़ल' मियां की फांसी में हो रही देरी के बारे में जब हमारे ग्रह मंत्री 'धोती-धारी' श्री श्री पल्निअप्पम चिदम्बरम से बी.जे.पी नेता सुषमा स्वराज ने पूछा  तो वे बिफर गए , बोले  ' ये लोग मूर्ख हैं या बहरे होने का नाटक कर रहे हैं ,कितनी बार हमने समझाया है इस विषय में .  उन्होंने सरकार की मजबूरी का विस्तार से खुलासा किया. फांसी के सभी केस पंक्ति वार राष्ट्रपति जी को भेजे जाते है . महामहिम ने ५-६ केसों पर हुकम पास भी कर दिया है. एन.डी.ए.काल में जीरो ,उनसे पूर्व शिवराज पाटिल के साढ़े चार साल में २  और उनके २ साल के कार्यकाल में ५-६ . वाह क्या उपलब्धि है ? इस प्रकार अफज़ल का नंबर आते आते तो तीन दशक और गुज़र जाएंगे . जब बड़े भाई का नंबर १५ साल बाद आयेगा तो छोटे मियां  'कसाब' तो जेल में ही बिरियानी  खाते खाते 'अल्लाह' को प्यारे हो जाएंगे.! हाँ यह बात दीगर है कि कोई जहाज़ अगवा हो जाए और हमारे मंत्री जी की रोज़ रोज़ के विपक्षी उलाहनों से जान छूटे.       
नूरा कुश्ती जारी है. गृह मंत्रालय राष्ट्रपति भवन को 'फांसी' के केसों पर हुकम पारित करने के लिए आधा दर्ज़न 'रिमाईडर' भेज चूका है उधर महामहिम के पास और भी बहुत से काम है ,फिर कोई समय सीमा भी नहीं ! जब तक पिछले केस नहीं निपट जाते तब तक और केस भेजने का कोई   ' तुक ' भी नहीं बनता.  . जब दिल्ली की मुख्य मंत्री 'अफज़ल की फ़ाइल ४-५ साल रख सकती है फिर प्रतिभाजी तो महामहिम हैं उनके पास तो असीम शक्तियां है और वह तो फांसी की सजा मुआफ  करने को भी सक्षम है भले ही 'लोक तंत्र के मंदिर संसद ' को उड़ने का अपराधी ही क्यों न हो. अभी 'अफज़ल मियां' की फ़ाइल तो 'धोती-धारी' चिदम्बरम के पास पुराने पापियों कि लम्बी कतार के आगे खिसकने के इंतजार में पड़ी है.
 कितनी बहादुरी के साथ लड़ रहे है 'आतकवाद' के खिलाफ हमारे यह सेकुलर शैतान फिर भी ये दुनिया वाले न मालुम क्यों इनको 'मूर्ख- नपुंसक या बौधिक किन्नर ' के संबोधनों से नवाजे जा रहे हैं ? अभी तो भगवा आतंक इन्हें अंदर से खाए जा रहा है. 

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

क्या इमानदारी क़ी परिभाषा भी बदल गई है ?

चोरों का सरदार ! फिर भी सिंह इमानदार ?
उन्हें हम आज भी लुटेरा कह कर याद करते हैं. गज़नी-नादिर शाह -दुर्रानी- कम्पनी बहादुर और न जाने क्या क्या ? वे तो लूटने आए थे और लूट कर चल दिए ! मगर ये तो अपने हैं और हमीं ने इन्हें चुना है अपना रहनुमां - भला ये कहाँ जाएंगे ?
चोर सिपाही का खेल जारी है. चोरों का सरदार अपनी सरपरस्ती में पहले तो चोरी और सेंध मारी को सरंजाम तक पहुंचता है और जब कुछ सतर्क श्वान अपनी घ्राण शक्ति का मुज़ाहेरा कर चोर-चोर का शोर मचाते हैं तो 'सरदार साहेब' बड़ी मासूमियत से चंद 'उच्चक्कों'  को पकड़ कर 'सख्त कार्रवाही' की ठंडी तफ्शीश की सी.बी.आई. दौड़ा देते हैं - चोर की  दिल्ली की बदनाम  गलियों में तलाश  जारी है और चोरों का राजा चीन के मैदानों में खेल रहा है. चंद खबरी खूब चिल्लाते हैं 'मेरा  मुंसिफ ही मेरा कातिल है -क्या मेरे हक़ में फैसला देगा.'  बाकी के बड़े बड़े 'खबरी' चोरों के राजा के टुकड़े खा कर अपना  श्वान धर्म निभा रहे हैं -'दुम' हिला कर.
बापू के भारत में लूट की परिभाषाएं ही बदल गईं हैं - सेंधमारी अब चोरी हो गई है और डाका महज़ घोटाले का कम्बल ओढ़े सरे बाज़ार इठला रहा है !   लुटेरे अब   'सफ़ेद पोश लीडर ' के रूप में   हमारे भारत भाग्य विधाता बने दिल्ली के मयूर सिंहासन पर शोभाएमान हैं.
चोरों का सरदार ! सिंह फिर भी अमानदार ?
क्या इमानदारी क़ी परिभाषा भी बदल गई है ?