गुरुवार, 10 जुलाई 2014

अष्टावक्र

अष्टावक्र 



अष्टावक्र  कहते  हैं कि मोक्ष कोई वस्तु नहीं  जिसे प्राप्त किया जाए ,  न कोई स्थान है  जहाँ पहुंचा जाए , न कोई   भोग है जिसे भोगा   जा सके , न रस है , न इसकी कोई साधना है , न सिद्धि है , न ये स्वर्ग में है , न सिद्ध शीला पर।  
विषयों में विरसता ही मोक्ष है।  
विषयों में रस आता है तो संसार है ।  
जब मन विषयों से विरस   हो  जाता है तब  ' मुक्ति '  है।  संसार में रहना , खाना पीना  कर्म करना बन्ध नहीं हैं ; इनमें अनासक्त हो जाना ही मुक्ति है।  इतना ही मोक्ष विज्ञान का सार है।  
सन्यासी बनने से,  धूनी रमाने से , संसार को गालियां देने से , शरीर को सताने से , उपवास करने से , भोजन  के साथ नीम की चटनी खाने से विषयों के प्रति विरसता नहीं आ सकती।  इन सबका मोक्ष से कोई सम्बन्ध नहीं है।

(अष्टावक्र गीता १५/२) 

बुधवार, 9 जुलाई 2014

 अष्टावक्र गीता 

एल  आर  गांधी   


ज्ञानी मृत्यु के समय भी हँसता है , मूढ़ ज़िंदा रहते भी रोता है।  ज्ञानी के पास कुछ नहीं होते  भी आनंदित रहता है , अज्ञानी के पास सब कुछ होते हुए भी दुःखी रहता है।  ज्ञानी कर्म को भी खेल समझता है , अज्ञानी खेल को भी  कर्म समझता है। ज्ञानी संसार को भी नाटकवत्  समझता है किन्तु अज्ञानी नाटक और स्वपन को भी भी वास्तविकता समझता है  . ज्ञानी व् अज्ञानी के कर्मों में समानता होते हुए भी दृष्टि में अंतर है।   

(अष्टावक्र गीता ४/१)

गुरुवार, 3 जुलाई 2014

आचार्य का स्वर्ग -मुल्ला की ज़न्नत … ख्याल अच्छा है


आचार्य का स्वर्ग -मुल्ला की ज़न्नत  … ख्याल अच्छा है 

                            एल आर गांधी 


अयोग्य की पूजा का उल्टा फल मिलता है   … साई पूजा से नाराज़ शंकराचार्य सवरूपानंद सरस्वती जी ने अपने नए विवादित ब्यान में  घोषणा के साथ ही कांग्रेस महानसचिव दिग्विजय सिंह उर्फ़ दिग्गी मियां जी   को अपना परम शिष्य भी सवीकार किया  ....
सवरूपानंद जी महाराज ने साईं बाबा की हिन्दुओं द्वारा पूजा पर एतराज जताते हुए बताया कि साईं में ऐसी कोई योग्यता नहीं की उसकी पूजा की जाए  … साईं मुसलमान थे कोई अवतार नहीं की उनकी मूर्ती की पूजा की जाए  … वे चिलम  पीते थे , मांस खाते  थे और एकादशी के दिन ब्राह्मणों को जबरन मांस खिलाते  थे  …
सवरूपानंद जी पहले भी अपने विवादस्पद बयानों और कांग्रेस प्रसस्त कार्यकलापों के कारण सुर्ख़ियों में  रहे हैं  … मोदी पर प्रशन पूछने पर एक पत्रकार को थप्पड़  तक जड़ दिया , बनारस में जब हर हर मोदी का जयघोष हुआ तो स्वामी जी को नागवार गुज़रा और मोदी के आगे ' हर हर ' पर फतवा जारी कर दिया  … मोदी समर्थक नहीं माने  … माने भी क्यों , अब सवरूपानंद जी ने अपने नाम के आगे 'शंकराचार्य ' लगा रक्खा है , क्या वे भगवान शंकर जी के 'आचार्य ' हो   गए  ।
शंकराचार्य जी महाराज के महान शिष्य श्री श्री दिग्विजय सिंह उर्फ़ दिग्गी मियां के 'कृत्य' और मान्यताओं पर तो  आचार्य जी ने कोई एतराज नहीं किया और आज भी उसे अपना शिष्य मानते हैं  … दिग्गी मियां की मुस्लिमपरस्ती  … ओसामा बिन लादेन के लिए 'जी' अलंकरण का प्रयोग , इस उम्र में 'मस्तुरातपरस्ती ' और न जाने क्या- क्या  …
साई पूजा को रोकने के लिए स्वामी जी ने नागा साधुओं का आह्वान किया है  … क्या इस्लामिक देशों की भांति स्वामी जी भारत में भी धार्मिक गृह युद्ध को तो आमंत्रण नहीं दे रहे।  भारत एक लोकतांत्रिक देश है और हिन्दू समाज अनंतकाल से बहुदेव पूजक रहा है   .... आचार्य तो शाश्त्रार्थ से अपने अनुयायिओं को सही मार्ग दिखाते हैं न की शस्त्रों  से  … 
आचार्य का मानना है कि साईं को मानने वालों को मोक्ष (स्वर्ग) नहीं प्राप्त होगा  … मुल्ला कहते हैं कि जेहाद करो  …जन्नत नसीब होगी  .... हमको मालूम है ज़न्नत की हकीकत या रब , दिल के बहलाने को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है 

बुधवार, 4 जून 2014

वाह मियां वाह

वाह मियां वाह 

 एल आर गांधी

वाह मोहम्मद मियां वाह  .... महज़ ३५ की बाली उम्र में ६२ बीवियां  … वाह  .... एक हम हैं कि ६२ की उम्र में महज़ एक से ही किसी तरहां निभा रहे हैं  … आज आपकी जिन्दा दिल जिंदगी अखबार में पढ़ कर आँखें सावन -भादों हुई जा रहीं हैं  … सच्चे सैकुलर मुसलमान की मानिंद मोहम्मद मियां ने बीवियां चुनने में अपने दिल  की सभी खिड़कियां खोल दीं  … मुसलमान हो या हिन्दू  … निकाह हो या सात फेरे   …   मोहम्मद निज़ाम या मोहम्मद सुजान  या फिर राजकुमार राय  ऐसे ही  दर्ज़नो नाम  …
हम यहाँ एक बीवी से आधी बात छुपाते हैं तो रंगे हाथो धरे जाते हैं  … और मोहम्मद मिया ? कमाल तो देखो !  ६२ बीवियों को भनक तक नहीं लगने दी  … कुछ को तो तीन तलाक फरमा कर रुखसत भी कर चुके हैं  … बिहार से ले कर बंगाल तक  मियां के ससुराल हैं  .... खुद को रेलवे का अफसर जो बताया था  … सभी बीवियां  पटरियों पर आँखें बिछाए जुल्मी सईयां की बाट जोहती  … और टी टी के आखरी डिब्बे को टकटकी लगाए निहारती रहतीं  .
चाय की चुस्कियों संग हम अखबार में  अभी 'मोहम्मद ' मियां के मुखारविंद को निहार ही रहे थे कि  मैडम की जासूस नज़र खबर की हेड लाईन पर पड़ गई  … उम्र :३५ ,नाम दर्ज़न भर ,बीवियां : ६२ , पेशा : ठगी  … सठिया गए हो मियां  सुबह सुबह भगवान का नाम , पूजा पाठ तो क्या करना  … बैठे हैं  ६२ बीवियों पर टकटकी लगाए  … शुक्र नहीं करते कि एक मिल गई  .... चाय की चुस्की कड़वी नीट  विस्की से भी कड़वी लगने लगी  .... काश हम भी तलाक तलाक तलाक कहने की जुर्रत जुटा पाते !

शनिवार, 17 मई 2014

वासना -संयम और गांधी जी

वासना -संयम और गांधी जी 

        एल आर गांधी

बापू की अस्मत फिरंगिओं  के बाजार में   नीलाम होने जा रही   है।  बापू   यूँ तो कई बार नीलाम हुए  मगर इस बार की बात  कुछ 'निजी ' सी है  ....  राज परिवार के गान्धिओं की निज़ता का विशेष ख्याल रखने वाली गाँधीवादी सरकार उदासीन सी है।  नीलामी में बापू के तीन खत बिकेंगे  … एक खत में बापू ने अपने ज्येष्ठ पुत्र हरी लाल के बारे में बहुत ही सनसनीखेज़ - निजी तथ्य उजागर किये हैं  ।खत में  बापू ने बेटे पर अपनी ही पुत्री के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया  था  …
हरी लाल ने १९३६ में इस्लाम कबूल लिया था और हरी लाल गांधी से अब्दुल्लाह गांधी हो गए थे  … अब अब्दुल्लाह हुए हरी के लिए तो शरीयत की मान्यताएं ही उपयुक्त रही होंगी जिनमें  … बाग़ के फूल पर सबसे पहला हक़ 'माली ' का होता है। .
फिर गांधी जी की निजी मान्यताएं भी वासना -संयम और ब्रह्मचर्य पर 'आश्चर्यजनक ' ही थीं  । अपनी वासना पर संयम की परीक्षा के लिए बापू अपनी युवा सवयंसेविकाओं के साथ  'हमबिस्तर ' होते थे  … चलने फिरने के लिए भी उन्हें दो युवा सेविकाओं के कन्धों की दरकार थी  … अब ब्रह्मचर्य के इस प्रयोग में गांधी जी सफल रहे  तो क्या उनके अनुयायी भी सफल रहेंगे  … क्या गारंटी है ?
बेचारे आशाराम 'बापू' वासना -संयम के ऐसे  ही खेल में धरे गए  … बेरहम मिडिया ने एक नही सुनी और बलात्कारी बना  दिया   … शुक्र है बापू के वक्त ये घ्राण शक्ति युक्त श्वान   …  मुआ मिडिया नहीं था  .
बापू के अनुयायी तो आज भी जी -जान से वासना- संयम के इस प्रयोग में संलग्न हैं  । वयोवृद्ध तिवाड़ी जी का तो सारा जीवन ही इन प्रयोगों में गुज़र गया  … प्रयोग के प्रतिफल ९० की आयु में भुक्त रहे हैं  । सच्चे गांधी वादी 'दिग्गी ' मियां  वासना -संयम के ऐसे ही प्रयोग में लिप्त  धरे गए  … अब नाती -पोते दद्दू की बारात में 'अब्दुल्लाह ' बेगाना होने को तैयार बैठे हैं। राजमाता के एक वकील प्रवक्ता तो न्यायालय परिसर में स्थित अपने चैंबर में ही अपनी एक सहयोगी वकील के साथ वासना पर संयम का प्रयोग करते पकडे गए  … वाच  डॉग  कुछ अरसा गुर्राया फिर मौन हो गया  । वकील साहेब फिर से राजमाता के दरबार में बतिया रहे हैं।
बापू के समर्पित गाँधीवादी अनुयायी गांधीजी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए 'वासना -संयम ' के प्रयोग में अक्सर धरे जाते हैं और यह मुआ मिडिया का वाच - डॉग  बोटी बोटी नोच खाने को आतुर है   … हे राम 

बुधवार, 14 मई 2014

शरीयत क़ानून और सैकुलर शैतान

शरीयत क़ानून  और सैकुलर शैतान 

         एल आर गांधी

मलेरकोटला के एक गाँव में एक मियां ने अपनी ही बेटी को माँ बना  दिया  .... गाँव वालों  पता चला कि मियां जी की बड़ी बेटी जो अपनी माँ  की मौत के बाद अपने अब्बा के साथ रहती थी , सात माह की गर्भवती है। लड़की से जब  पूछा गया तो  बताया कि अब्बा मियां ही  उसके होने वाले बच्चे के बाप हैं  .
 पड़ोसियों ने मामला गांव की पंचायत के आगे रक्खा  … पंचायत ने इस्लामिक कानून की शरिया के अनुसार फैसला सुनाया कि अब अब्बा मियां को इस लड़की का पति मान लिया  जाए और ये दोनों मियां-बीवी गांव छोड़ कर कहीं और जा कर रहे  .... समाचार  पत्रों में खबर आने के बाद   भी प्रशासन , पुलिस और समाज के सैकुलर शैतान चुप हैं  … शायद शरिया से पंगा लेने की जुर्रत नहीं है किसी में भी  ....
सऊदी अरब में एक मौलवी ने अपनी ही पांच बरस की बेटी के साथ रेप किया , यातनाएं दीं और उसके 'रेक्टम ' को खंडित कर दिया  । मौलवी को अपनी बेटी के कौमार्य  पर शक था  … ज़ख्मों की ताब न सहते हुए ५ वर्षीय मासूम लामा अल घामदी अल्लाह को प्यारी हो गई  … शरीयत कानून के तहत मौलवी को २ लाख रियाल का जुर्माना (ब्लड मनी ) किया गया जो बच्ची की माँ को दिया जाएगा  … यदि  लामा  लड़का होती तो यह (ब्लड मनी ) दुगनी अर्थात ४ लाख रियाल होती  …  इस्लामिक कानून में अब्बा अपने बच्चो और बीवी को 'मार' सकता है  …  सभी महिलाएं नाबालिग हैं  … अब्बा लड़कियों को बाल विवाह के लिए बेच भी सकता है।
बांग्लादेश में तो एक रेप पीड़ित १४ साला लड़की को ही सजा सुना दी गयी  । हिना को सौ कोड़े लगाने की सजा दी गई , मगर ८० कोड़ों के बाद ही वह बेहोश हो गई और ६ दिन बाद अल्लाह को प्यारी हो गई  … सचमुच अल्लाह महान ही और उसके शरियाई कानून के तहत सब को  न्याय मिलता है  !!!!!!!!!!!!!

शनिवार, 3 मई 2014

गुरु दोबारा … चेला कुंवारा

गुरु दोबारा  … चेला कुंवारा 

  एल  आर  गांधी

राज  कुमार ४२ सावन चूक गए मगर अभी तक 'कुंवारे ' हैं   … मगर गुरु देव को मुश्किल से  विधुर हुए अभी एक बरस गुज़रा कि दूसरी 'मस्तुरात ' ढूंढ भी ली  . और वह भी अपने से २५ बरस छोटी  … ४२ वर्षीय टी वी एंकर अमृता राय दिग्गी मियां के साथ  एक अर्से से उ ला ला हैं मगर चुपके चुपके  । जब एक पत्रकार ने दिग्गी मियां से उनके 'दिलदार' के बारे में पूछा तो मियां बिफर पड़े और इज़्ज़त  हतक के  दावे की चुनौती दे डाली  … मगर दूसरे ही दिन पलट गए और छाती ठोक कर अपने  और अमृता के सम्बद्ध कबूल लिए  …
दिग्गी मियां के  दोगले पन पर 'भौजाई ' ने ट्वीट कर आश्चर्य व्यक्त किया  … भाई लक्ष्मण सिंह से उसकी शादी का दिग्गी मियां ने महज़ इस लिए घोर विरोध किया कि वह भाई से १३ साल छोटी थी और राजपूत बिरादरी से नहीं थी  … दिग्गी मियां के एक पुत्र और ४ पुत्रियां हैं  … नई 'माँ ' मियां की बड़ी बेटी से भी छोटी है और दादू  की दूसरी वेडिंग में पौत्र और पौत्रिया भी शरीक होंगीं ?
एक यक्ष प्रशन दिग्गी के दल के दिग्गज़ों और 'वाक गुदम ' दिग्गी  मियां के हर वाक पर तालियां पीटने वाले  कांग्रेसियों को खूब सता रहा है  … वह प्रशन है कि दिग्गी मियां अब अमृता जी के साथ 'सात फेरे लेंगे कि चर्च वेडिंग करेंगे या फिर 'निकाह ' करेंगे  .... प्रशन जायज़ भी है और दरुस्त भी  . क्योंकि मियां पैदा तो राजपूत हिन्दू परिवार में हुए  और  राज भक्ति के चलते 'ईसाई ' हो गए और अपने दल व् राज परिवार की मानसिकता के चलते इस्लाम प्रस्त ' ओसामा जी' हो गए  .
गुरु देव ने लगता है अपने इकलौते चेले को ' वाक गुदम ' के सिवा कोई गुर नहीं सिखाया  … जिस प्रकार दिग्गी मियां जब भी मुंह खोलते हैं तो उलटे टंगे जीव की भांति  वाक गुदम ही करते हैं  और उसी की भांति न पक्षियों की श्रेणी में आते हैं और न ही पशुओं की  … गुरु की दूजी शादी में कुंवारा चेला नाचेगा।