बुधवार, 3 जुलाई 2013

श्री नगर या शरिया नगर



श्री नगर या शरिया नगर 

  एल आर गाँधी                                        


         
श्री नगर के एअरपोर्ट पर यात्रियों के लिए पांच बार नमाज़ की सुविधा के लिए विशेष तौर  पर 'नमाज़ एरिया 'बनाया गया है . देश के किसी भी प्रदेश या केंद्र शासित राज्य के एअरपोर्ट पर ऐसी सुविधा नहीं है . ज़ाहिर है जब से श्री नगर से नमाज़ न अता करने वाले 'काफिरों'को बेदखल कर नमाजियों का निजाम कायम हुआ है ,तब से नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की सरकार ने कश्मीर विशेषत श्रीनगर में सेकुलर नियम कायदों को ताक  पर रख कर 'शरियाई '  निजाम ए मुस्तफा लागू कर दिया है . 
सैंकड़ों मंदिर मिस्मार कर दिए गए , मगर किसी सेकुलर शैतान ने उफ़ तक नहीं की ..और एक बियांवान मस्जिद गिराए  जाने पर चार-चार राज्य सरकारें गिरा  दीं  और कमीशन बिठा दिए। देश के जिस प्रदेश में 
भी निज़ाम ए मुस्तफा कायम होगा वहीँ पर सेकुलरिज्म की 'कश्मीरी' इबारत लिखी जाएगी और काफिरों को बेदखल कर उनके पूजा स्थलों को मिस्मार किया जाएगा . श्री नगर की तर्ज़ पर एअरपोर्ट पर नमाज़ के लिए 'नमाज़ एरिया' बनाया जाएगा .....


बुधवार, 26 जून 2013

श्री नगर या शरिया नगर




श्री नगर या शरिया नगर 
  एल आर गाँधी

श्रीमती जी की तीव्र इच्छा थी , एक बार 'देवभूमि' श्रीनगर की सुन्दर व् अलौकिक वादियों के भ्रमण की ...वादी में प्रवेश करते ही देव भूमि पर पसरा मज़हबी आतंक का क्रूर काला  साया ज़ेहन पर तारी होता गया ...ऊपर से तो सभी पर्यटकों के प्रति समर्पित दिखाई दे रहे थे किन्तु यथार्थ में हमें लूटने और सताने को सभी खुदा के बन्दे  एक जुट थे ...
गुलमर्ग के नज़ारे देखने की इच्छा सभी पर्यटकों में होती ही है . सो हम दोनों और साथ में गए मित्र दंपत्ति होटल से ही टैक्सी में गुलमर्ग के लिए चल पड़े ...सड़क के दोनों और निहायत ही खूबसूरत कुदरत के नजारे थे ...दो दिन के साथ ने ड्राईवर को भी कुछ कुछ 'मुखर' बना   दिया ....जब उसे पता चला की हम पंजाब से हैं तो कश्मीर और पंजाब के एक से 'हालात' पर अपने पके पकाए विचार व्यक्त करने लगा ...बोला ...एक बार तो खालिस्तान बन ही गया था ? मेरी प्रतिक्रिया के लिए 'जोहान' ने मेरी और देखा ...उसकी आँखों में नाकामी का मलाल साफ़ दिखाई दे रहा था ...हिन्दुस्तान की सेना की श्रीनगर में मौजूदगी पर भी उसे सख्त ऐतराज़ था ...बात चीत आगे बढ़ी तो पता चला की जेहान के और भी तीन भाई हैं सभी अनपढ़ हैं और उसी की भाँती छोटे मोटे काम करते है ...पढाई वही मौलवी के मदरसे तक .
गुलमर्ग का रास्ता और प्राकृतिक छटा अतुलनीय थी रास्ते में कई  स्थानों पर प्रकृति के मनमोहक दृश्यों को कैमरे में कैद किया ... गुलमर्ग के पहले और निकटम गेट के रास्ते में कुछ लोग खड़े थे ..उन्होंने गाड़ी को दूसरे   रास्ते से जाने का इशारा किया ...पूछने पर जोहान ने बताया की ये लोग घोडा गैंग से हैं ...निकट के गेट पर सवारी पैदल ट्राली हाट तक चली जाती है और उनके घोड़ों पर नहीं बैठती ...यदि कोई गाड़ीवाला नहीं मानता तो ये ड्राईवर और सवारियों को पीटते हैं और गाड़ी को भी नुक्सान पहुंचाते हैं ....जोहान ने हमें दूसरे गेट जो ट्राली से ३-४ किलोमीटर दूर था उतार दिया ...पहले रेन शूज़ और रेन कोट वालों ने घेरा ..किसी प्रकार उनसे पिंड चुदाया  तो घोड़े वाले पीछे पड गए ...मानो चार घोड़ों के १ २ ० ० रूपए बचा कर हम अमीर  सैलानी उनके पेट पर लात मार  रहे हैं ...रास्ते भर घोड़े पैदल यात्रियों पर गुर्राते नज़र आए ...गुड सवारों के लिए अलग से कच्चा रास्ता है ,फिर भी ये लोग सड़क से पैदल यात्रियों पर घोडा चढाते ..कश्मीरी भाषा में भद्दे तंज़ कसते जा रहे थे .
बहुत सारी गाडिया ट्राली तक जा रही थी .. अब समझ आया कि मियां जोहान भी अपने इन घोडा गैंग बिरादरी के साथ है .
२ घंटे ट्राली के लिए लाईन में लगे जबकि टिकट पहले ही आन लाईन बुक करवा ली थी ..लोकल घोडा गैंग बिना लाईन के खिड़की से अपने ग्राहकों के लिए टिकट ले रहे थे ..मनमाने 'चर्ज़िज़ ' एंठ कर ..लाईन के बिना एंट्री के अलग से चर्ज़िज़ थे ..हम 'हिंदुस्तानी' २ घंटे तक लाईन  में खड़े कश्मीरी कायदे -क़ानून की धारा  ३ ७ ०  ताकते रहे .
जेहान ने बताया था कि गुलमर्ग की पहाड़ी पर शाल बढ़िया सस्ते और टिकाऊ मिलते हैं ...ट्राली का रास्ता एक विदेशी कंपनी ने निर्मित किया था ...बहुत बढ़िया भी था ...गुलमर्ग की पहाड़ी पर चंद  शाल बेचने वाले मुल्लाओं से सैलानी महिलाएं मोल तोल कर रहीं थी ..हमारे सैलानी भी शाल देखने लगीं ..मियांजी अपने कश्मीर में बने सस्ते शालों की गर्मी का बखान कर ही रहे थे कि एक   महिला ने सारा गुड गोबर कर दिया।।यह कह कर कि ये तो चाईनीज़ शाल हैं ....

क्रमश




मंगलवार, 4 जून 2013

विज्ञापन की बोटी

विज्ञापन की बोटी 
  एल आर गाँधी

 जब से ५७० करोड़ से चुपड़ी भारत निर्माण  विज्ञापन   'बोटी'   हमारे मिडिया के  'वाच -डाग्ज़ 'को परोसी गयी है ..तब से मिडिया की सारी  की सारी 'घ्राण -शक्ति ' किरकिट की बाल ...बिंदु की चाल-ढाल और श्री का रुमाल सूंघने में लगी है .बेचारे केजरीवाल सिब्बल -वोडाफोन का ग्यारा हज़ार करोड़ का घोटाला अभी परोस ही रहे थे और 'बोटी' देख सभी वाच डाग्ज़ श्री के २ ० -५ ० लाख की चोरी चकारी पर पिल पड़े ...सिब्बल साहेब ने सुख की सांस ली ...देखते देखते चोर ही चौकीदार बन बैठे और किरकिट में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कायदे-क़ानून समझाने लगे ...वाह रे भारत के चौथे खम्भे और उसके इर्द गिर्द चक्कर काटते और ' बोटी 'चाटते वाच -डाग्ज़ ....

पंजाबी की एक कहावत है 'चोर उचक्का चौधरी ...गुंडी रण प्रधान ' 

गुरुवार, 30 मई 2013

पाक और ईश-निंदा का अन्धकार

पाक और ईश-निंदा का अन्धकार 

      एल आर गाँधी

लगता है ईश -निंदा के नाम पर अनगिनत निर्दोष अल्पसंख्यकों पर किये जुल्मो-सितम. ,और इस्लामिक आतंक के सताये  मासूम लोगों की बददुआएं पाक को भविष्य में .अन्धकार के गर्त में डुबो देंगी .
पाक पर ज़बरदस्त बिजली संकट है ...१८ -१८ घंटे का पावर कट  आम बात है ...पिछले चुनावों में यह एक मुख्य मुद्दा था ...सत्ता के प्रमुख दावेदार मियां नवाज़ शरीफ अपने परम हितैषी चीन के हुक्मरान को पाक को बिजली संकट से उबारने में सहायता की बार बार गुहार लगा रहे हैं ...और चीन भी अपने दुश्मन के दुश्मन परम मित्र पाक को पावर क्राइसिस के इस अंधकूप से बाहर  निकलने में जी जान से लगा है .
ऐसे में ईश -निंदा का महादानव चीन की अँधेरा- हटाओ योजनाओं के बीच आ टपका है.  पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे  एनर्जी प्रोजेक्ट मनेज़र ली पिंग अकस्मात ही ईश -निंदा के आरोप में फंस गए ...हुआ यूँ कि ली पिंग का अपने ही विभाग के एक पाक अधिकारी डॉ . साजिद से कमरे का तकरार चल रहा था .. ली ने तैश में आ कर साजिद मियां का सामान कमरे से बाहर  फेंक दिया और सामान में उर्दू में लिखी 'कुरआन ' भी थी ....जैसे ही मुस्लमान कर्मचारिओं को कुरआन की तौहीन का पता चला ..ली की शामत आ गई और साजिद मियां को मौका मिल गया ली को सबक सिखाने का ...किसी तरहां ली को पुलिस ने लोगों के कहर से तो बचा लिया ..मगर ईश-निंदा के कानून के कहर से कौन बचाएगा ?
ईश निंदा की सजा मौत है ...पाक में इंसान का क़त्ल करके तो बचा जा सकता है ...ब्लड मनी चूका कर ..मगर ईश निंदा के दोषी की तो  बस अल्लाह ही खैर करे ...अब भविष्य में क्या कोई 'ली' चीन से,  पाक के अँधेरे में रौशनी की लौ जलाने  के लिए पाक आने का दुस्साहस कर पाएगा ?  

मंगलवार, 21 मई 2013

वफादारों की श्वान -वृति


वफादारों की श्वान -वृति 

       एल आर गाँधी 

नितीश मियां के दो ' वफादारों 'को लालू मियां ने अल्शेशन क्या कहा के दोनों बुरा मान गए और लालू पर ठोक दिया इज्ज़त हतक का दावा ...देसी बफदारों को विदेशी अल्शेशन कहा ...बहुत बदतमीज़ी है ..

धर्मनिरपेक्ष बोले तो सेकुलरिज्म की ठोस प्रतीक छिद्र्नुमा अरबी टोपी पहन कर लालू ने गाँधी मैदान से नितीश को ललकारा ...तूं डाल डाल ,मैं पात पात ...तो नितीश कहाँ पीछे रहने वाले थे ..झट से मियां नवाज़ शरीफ को बिहार तशरीफ़ लाने  का न्योता दे डाला ...लालू के 'उर्दू बैनर ' लटके रह गए ...

यका यक हमारे चौथे खम्भे के वाच डाग आइ पी एल के बेचारे श्री शान्तों की चीर फाड़ में मुश्गूल हो गए हैं ..एक कम मोल बीके खिलाडी ने 'उपरी ' कमाई की हिमाकत जो कर डाली .. बेचारे केजरीवाल मुफ्त मुफ्त में श्री की रन लुटाऊ बाल पर हिट  विकेट हो गए ...बड़े जतन से वोडाफोन के कपिल -कनेक्शन का १ १ ० ० ० करोड़ का महा घोटाला लाए थे ...मगर कपिल की सरकारी चपाती चाट रहा 'वाच डाग ' मिडिया ....श्री के २ ० -५ ० लाख की चोरी -चकारी पर ही पिला रहा . ..हमारे राजनेताओं ने लगता है मिडिया की 'श्वान वृति ' को बखूबी जान पहचान लिया है ...बचपन में जब देर रात हम दूकान से अपनी ड्यूटी दे कर घर लौटते तो रास्ते में गली के आवारा कुतों से बहुत डर लगता था ..धीरे धीरे हमने भी इनकी श्वान वृति को पहचान लिया ...अपनी जेब में चंद गुड की डलियाँ रखते ...जब खुत्ते हमारी ओर लपकते , हम एक गुड की डली उन की तरफ उछाल देते ...वे गुड पर लपकते और हम खिसक लेते ...

श्री संत  की इस महान शहादत का उसे इनाम तो बनता है मेरे भाई .....पिक्चर अभी बाकी है ...जो इनाम ऐसी ही शहादत पर नौजवान खिलाडियों  के रोल माडल महान क्रिक्टर मियां अजहरुदीन को मिला था ...श्री संत  को भी मिलेगा ....२ ० १ ४ के लोक सभा चुनाव तो आने दो ...हमारा 'हाथ' अपने जैसों के साथ ! 

मंगलवार, 14 मई 2013

सिंह साहेब के शान्ति दूत

सिंह साहेब के शान्ति दूत 

    एल आर गाँधी

जब से सिंह साहेब को 'शरीफ साहेब' का न्योता आया है ..तब से बस ख़ुशी छुपाए नहीं छुपती ...शादी की शेरवानी 'चुस्त-दरुस्त ' करवाने भेज दी है ..मैडम ने भी नई साडिओं के आडर दे दिए हैं ...सेकुलर भोंपुओं ने शरीफ साहेब की शराफत के  कसीदे पढने शुरू कर दिए हैं ... और एक स्वर में पाक के नए रहनुमा को 'शान्ति-
दूत' या फिर बोले तो फ़रिश्ता ऐ अमन के खिताबों से नवाजना शुरू कर दिया है ...

पंजाबी की एक कहावत है 'नहाती धोती रह गई -मूंह  ते मक्खी बैह गई ' पुरानी शेरवानी अभी दरुस्त हो कर भी नहीं आई थी की 'खबर ' आ गई ...सिंह साहेब की अगवानी के लिए पूरी तयारी कर ली है .आइ एस आई ने ! और ट्रेलर के तौर पर  कश्मीर के लिए  'शांति के फ़रिश्ते ' भी रवाना  कर दिए गए हैं .. सिंह साहेब की हसरत हवा हो गई ...

सिंह साहेब ने तो दरिया दिली की सभी सरहदे तोड़-ताड़ कर गिलानी जी को भी 'शांतिदूत 'घोषित कर डाला  था।। मगर जब  इस शांति दूत ने अपने ' असली दांत ' दिखाए तो सिंह साहेब की हालत उस श्वान की सी हो गई जो बार बार अपनी की हुई ..... को चाटने को पलटता ही है . सयानों ने कहा है कि एक बार धोखा खाने वाले को मूर्ख नहीं कहते ..दूसरी बार खाने वाले को तो मूर्ख ही कहते हैं . और बार बार धोखा खाने वाले को फिर मूर्खों का सरदार ही कहेंगे न !....   और जो लोग सदियों से धोखे पर धोखे खाए चले जा रहे है ...उन्हें क्या कहें ?
   

सिंह साहेब के शान्ति दूत

सिंह साहेब के शान्ति दूत 

    एल आर गाँधी

जब से सिंह साहेब को 'शरीफ साहेब' का न्योता आया है ..तब से बस ख़ुशी छुपाए नहीं छुपती ...शादी की शेरवानी 'चुस्त-दरुस्त ' करवाने भेज दी है ..मैडम ने भी नई साडिओं के आडर दे दिए हैं ...सेकुलर भोंपुओं ने शरीफ साहेब की शराफत के  कसीदे पढने शुरू कर दिए हैं ... और एक स्वर में पाक के नए रहनुमा को 'शान्ति-
दूत' या फिर बोले तो फ़रिश्ता ऐ अमन के खिताबों से नवाजना शुरू कर दिया है ...

पंजाबी की एक कहावत है 'नहाती धोती रह गई -मूंह  ते मक्खी बैह गई ' पुरानी शेरवानी अभी दरुस्त हो कर भी नहीं आई थी की 'खबर ' आ गई ...सिंह साहेब की अगवानी के लिए पूरी तयारी कर ली है .आइ एस आई ने ! और ट्रेलर के तौर पर  कश्मीर के लिए  'शांति के फ़रिश्ते ' भी रवाना  कर दिए गए हैं .. सिंह साहेब की हसरत हवा हो गई ...

सिंह साहेब ने तो दरिया दिली की सभी सरहदे तोड़-ताड़ कर गिलानी जी को भी 'शांतिदूत 'घोषित कर डाला  था।। मगर जब  इस शांति दूत ने अपने ' असली दांत ' दिखाए तो सिंह साहेब की हालत उस श्वान की सी हो गई जो बार बार अपनी की हुई ..... को चाटने को पलटता ही है . सयानों ने कहा है कि एक बार धोखा खाने वाले को मूर्ख नहीं कहते ..दूसरी बार खाने वाले को तो मूर्ख ही कहते हैं . और बार बार धोखा खाने वाले को फिर मूर्खों का सरदार ही कहेंगे न !....   और जो लोग सदियों से धोखे पर धोखे खाए चले जा रहे है ...उन्हें क्या कहें ?