मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

राजमाता की सुरक्षा और निजता

राजमाता की सुरक्षा और निजता 

       एल आर गाँधी

बीडी के लम्बे कश सडकते चोखी लामा आग बबूला हुए चले आ रहे थे ...ड्योढ़ी में कदम रखते ही उबल पड़े ...ये असान्जे तो मुझे आर एस एस का आदमी लगता है ..यकीन नहीं तो इसकी पेंट खुलवा कर देखो ..शर्तिया अन्दर से खाकी नीकर निकलेगी . यह भी कोई बात हुई भला पहले राजीव जी के स्विस खाते फरोले और अब अपनी मुई विकीलीक पर मरहूम को स्वीडन की विमान  कंपनी का दलाल बता  डाला . कहता है कि कंपनी ने भारत को जंगी जहाज बेचने के लिए राजीव जी को दलाल बोले तो कमीशन एजेंट मुकर्र किया था ...
हमने चोखी को शांत  हुए कहा अरे मियां चोखी इसमें बीडी की माफिक  सुलगने की क्या बात है ..हमारे दिवेदी जी ने  तमाम खुलासे को खारिज तो कर दिया ...बुझ गई बीडी को फिर से सुलगते हुए लामा फिर सुलगने लगे अरे मियां ये तो सारे के सारे फिरंगी 'संघी ' हो गए हैं ...अभी पिछले दिनों एक विदेशी रसाले ने सोनिया जी को चौथा सबसे अमीर राजनेता बता डाला ...और फिरंगियो के देसी एजेंटों ने आर टी आर डाल कर सोनिया जी की
आय कर रिटर्न मांग ली ...
बीडी के जल कर ख़ाक हुए फोलक की माफिक हमने चोखी को फिर समझाने की नाकान जैसी कोशिश करते हुए बताया ...भई यह तो हर नागरिक को सोनिया जी के मनमोहन का दिया हक़ है ..और फिर सभी सांसद अपनी कमाई का  लेखा जोखा सार्वजनिक करने को पाबन्द हैं ....बीडी की आखिरी चिंगारी से उंगली जला बैठे लामा ने हाथ झटक कर भेद की बात समझाते हुए फ़रमाया ...मियां आय कर वालो ने भी कोई कच्ची गोलिया नहीं खेली ..सोनिया जी से पूछा  और टका सा जवाब दे दिया .....सुरक्षा और निजता भी चीज़ है कि नहीं !

गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

चोखी लामा ..उवाच

चोखी लामा ..उवाच 

  एल आर गाँधी

चोखी लामा हमेशां की माफिक आज भी किसी ताज़ा खबर की जुगाली करते आवारा सांड से हमारे गरीबखाने में घुसे चले आ रहे थे ...घुसते ही जुगाली को सड़क कर बोले ..अरे भई .. गाँधी।। तुमने आज का नया जमाना देखा ? हमने सहज मन से फ़रमाया , भई चोखी हम तो तुम्हे मालूम ही है अंग्रेजी अखबार पढते है . अरे मियां क्या ख़ाक पढ़ते हैं ..चोखी भन्ना कर बोले . इन फिरंगी खबरनामों में घर की खबर तो ढंग की होती नहीं फिर बाहर की क्या ख़ाक देंगे . खैर हम बताते हैं ..सुनो .. चीन में लियु झिजुन  जो कभी रेल मंत्री थे 'नाप' दिए गए हैं  ..अमानत में खयानत वही जिसे आपके ये फिरंगी अखबार क्रपशन बोले तो भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए .२  ० ० ३ में रेल मंत्री के साथ साथ मंत्रालय में कम्युनिष्ट पार्टी आफ चाईना के प्रमुख भी थे .
हमसे रहा न गया ..अरे भई चोखी इसमें नया क्या है . हमारे भी तो बहुत से मंत्री अन्दर- बाहर अक्सर होते आए हैं ..बस फिर क्या था ..चोखी की जुगाली दिमाग में सड़क गई ... लगे भिन्नाने ..मियां यह चीन है ..देखना दिनों दिनों में लियु लटका दिए जाएंगे ..पिछले दिनों दो पार्षद नगरपालिका लूटते धरे गए थे ..महज़ तीन माह में लटका दिए ...हमारे माफिक नहीं केस दर केस ..पेशी दर पेशी ..अपील दर अपील और फिर जमानत ..यहाँ अफजल जैसों को लटकाने में भी  १ १ साल लगा दिए जाते हैं ..
हमने चोखी को फिर से समझाने की नाकाम कोशिश करते हुए फ़रमाया भई चोखी हमारे अपने संस्कार हैं ..हम दुनिया की सबसे विशाल डेमोक्रेसी बोले तो लोकतंत्र हैं ..हम चीन की माफिक नहीं लटका सकते . यह नेहरु -गाँधी का देश है ..नेहरु जी को जब पंजाब के कुछ लोगों ने मुख्य मंत्री कैरो साहेब के घोटालों -लूट के बारे में आगाह किया तो नेहरु जी ने बड़ी विनम्रता से समझाया ..देश का पैसा देश में है तो लूट से क्या फर्क पड़ता है  ..फिर हम तो विश्व बंधुत्व के अलमबरदार है ..अब देश का पैसा स्विस बैंको में जा रहा है तो क्या आफत आ गई ..हमारे बंगाली बाबू ने स्विस सरकार से समझौता कर इसका भी नेहरु-गाँधी हल निकाल ही दिया था ..नए खातों की जानकारी जरुरी है ..पुराने गए भाड़ में ...समझौते की महिमा देखो ! राजमाता ने महामहिम बना दिया ..

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

मधुमक्खी -अरिष्ट लक्षण

मधुमक्खी -अरिष्ट लक्षण 

  एल. आर. गाँधी

राज कुमार के मधुमक्खियों के छत्ते में 'रानी मक्खी' पर जबसे मोदी ने निशाना साधा है ...रानी की भक्त मण्डली के मखियाल भिन -भिन्ना उट्ठे हैं ...मियाँ रशीद अल्वी को तो मोदी में यमराज के दर्शन होने लगे ..हों भी क्यों न ...यमराज तो मात्र प्राण ही हरता है , मोदी राज-पाठ हरने पर उतारू हैं ..जब राज ही नहीं रहेगा तो राजमाता और उनके कुंवारे कुंवर का क्या होगा ...जब से राजकुमार ने उद्योगपतियों के जमघट में भारत पर चिरपरिचित 'हाथी 'की परिभाषा को नकारा है और इण्डिया को ' हाथी नहीं मधुमक्खियों का छत्ता बताया है ..भाजपाइ दोनों हाथों में पत्थर उठाए 'छत्तो' की तलाश में निकल पड़े हैं ...और 'रानी मक्खी' की तो अब खैर नहीं ...बहुत चूस लिया इस विदेशी-बी ने ...बस एक ही झटके में सत्ता का छत्ता जमीन पर और मधु मक्खी और मखियाल ....ढूंढते रह जाओगे ?
तिवारी जी दो  कदम आगे निकले और अल्वी के नहले पर दहला जमाया और फ़रमाया 'मोदी २ ० ० २ की 'घटनाओं ' को   नहीं दोहराएं ! मनीष मियां हैं तो सूचना और प्रसारण मंत्री ..शायद २ ० ० २ का इतिहास भूल गए !  'घटनाओं के मूल में एक ' त्रासदी 'थी ...कारसेवको को ट्रेन में घेर कर जिन्दा जला दिया गया था . अब मियां अल्वी लाख कहें 'इस देश पर प्रभु राम की कृपा बनी रहे . प्रभु राम तो राम भक्तो के साथ हैं क्योंकि जन्म भूमि पर  तो सदियों पहले 'बर्बर ' जेहादियों ने इक इमारत खड़ी कर दी थी.
जबसे मोदी ने भारत माँ का क़र्ज़ चुकाने की बात कही है ...देश को क़र्ज़ के रसातल में पहुचने वालो को सपने में भी मोदी भैंसे पर सवार ,हाथ में दंड लिए उनकी और आते दिखाई देने लगे हैं ...इस प्रकार के सपने देखने वाले 'रोगी' के लिए   आयुर्वेद में 'अरिष्ट- लक्षण' माना गया है .... मृत्यु से पूर्व के लक्षण !    

बुधवार, 20 मार्च 2013

राजमाता का गुस्सा


राजमाता का गुस्सा 

  एल आर गाँधी 

हिन्दुस्तान को कोई भी मुल्क हलके में 'न' ले ...और इटली भी .....राज माता का अपने मायके के प्रति यह गुस्सा ...भारत को बनाना स्टेट मान बैठे लोगों को 'बहुत हो चूका ' का सन्देश  ही तो है. ..?
पहले उड़न खटोलों की खरीद में किरकिरी करवा दी और अब वादा खिलाफी और वह भी ...क़ानून भी कोई चीज़ है की नहीं ...मायके पर इतनी तल्ख़ पहली बार ' दिक्खी ' राजमाता ... और हों भी क्यों न ..क्या कुछ नहीं किया अब तक 'पीहर ' वालों के लिए ... कात्रोची चाचा को बुलाया ..महमान नवाज़ी की सभी सरहदे पार कर दी ..खूब लुटाया .. पकडे गए तो बचाया भी और भगाया भी ...और तो और लूट का पकड़ा गया माल छुड़ाया भी ...अब मायके का हर कोई ऐरा- गेरा  नत्थू- खैरा ...खुद को 'चाचा -कात्रोची' मान बैठे और भाग जाए और वह भी एक नहीं दो- दो क़त्ल कर के ...यह कोई 'पकिस्तान ' नहीं जो 'ब्लड मनी ' मूंह पर मारो और छूट जाओ ....यहाँ कानून का राज चलता है ... कानून के हाथ बहुत लम्बे हैं ...कभी तो इटली तक भी पहुँच ही जाएंगे ...बशर्ते कि मृत मछ्वारों के परिवार कुछ ले दे कर ही मुकर न जाएं ...ब्लड मनी बहुत बड़ी चीज़  है ?
 

बुधवार, 13 मार्च 2013

सिंह साहेब का गुस्सा


सिंह साहेब का गुस्सा 

  एल आर गाँधी 

शांत स्वभाव सिंह साहेब को दूसरी बार गुस्से में देखा है ...एक तो पिछले दिनों जब वे मोदी के 'नाईट वाच मैन 'तंज़ पर बिफरे थे या अबकी जब इटली के पी एम् ने हमारे ' मेहमान 'लौटाने से इनकार कर दिया ... सिंह साहेब ने  साफ़ साफ़ कह दिया कि इटली की यह 'सीना जोरी ' हमें हरगिज़  मंज़ूर नहीं ! मियां खुर्शीद को तलब किया  और इटली के राजदूत से 'नाराजगी' ज़ाहिर करने का फरमान जारी कर दिया ...बा हुकम खुर्शीद मियां ने भी राजदूत को बुलाया और ना….से बोले तो ..... जाहिर कर दी. अब देश के सबसे आला कोर्ट की नज़र में इटली के ये दो मेहमान 'भगोड़े  ' हैं ..इन पर केरल के समंदर तट पर दो हिंदुस्तानी मछ्वारो को मौत की नींद सुलाने का आरोप था .. इटली ने पहले तो 'ले -दे कर मामला रफा दफा करने की जुगाड़ लड़ाई , मगर कानून के लम्बे हाथों के आगे एक न चली . अब आला कोर्ट से  'वोट डालने ' के लिए दोनों नौसैनिकों को जब दूसरी पैरोल मिली तो 'मुजरिम नोउ दो ग्यारा  हो गए .... और हों भी क्यों न ...हमारे मेहमान नवाज़ हुक्मरानों का 'ट्रैक -रिकार्ड ही कुछ ऐसा है .....
जवाई मियां वाड्रा साहेब ने ठीक ही तो कहा है ..'.इण्डिया इज ऐय बनाना स्टेट ' फिर इटली तो राजमाता जी के मायके जो ठहरे ...अपने भाई बंधुओं को 'पैरोल ' नहीं तो और किसे ? रही ट्रैक रिकार्ड की ' चाचा कात्रोची ' को मेहमान  बना  रक्खा ,खिलाया और जब ' बिचौलिये 'की  चोरी पकड़ी गई,  तो बचाया भी और भगाया भी ....अब भोपाल गैस के गुनेहगार को ही ले लो ...इन नौसैनिकों ने तो महज़ दो  मछुयारे ही मारे   हैं ...भोपाल में 15274 लोग मारे  गए और अनगिनत गैस पीड़ित  लोग आज भी नारकीय जीवन जी रहे हैं .. और इस त्रासदी के मुख्य गुनहगार को केंद्र के इशारे पर तत्कालीन सी एम् अर्जुन सिंह ने सरकारी जहाज़ में बिठा कर अमेरीका 'रुखसत किया .... कोर्ट से महज़ २ साल की सजा हुई और 'वारेन एंडरसन ' 28  साल बाद आज भी भगोड़ा है . बनाना स्टेट के गुनाहगार भगोड़ो की लम्बी कतार में दो नाम और जुड़ गए ....फिर  भी सिंह साहेब का ' गुस्सा '  .........!!!!!  

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

धृतराष्ट्र के उत्तराधिकारी


धृतराष्ट्र के उत्तराधिकारी

   एल आर गाँधी

आज हस्तिनापुर उदास है ...उदास है गंगा पुत्र भीष्म  के लिए ..भीष्म की हस्तिनापुर के  प्रति समर्पित प्रतिज्ञाओं के लिए ...धर्म युद्ध में गंगा पुत्र के अधर्म का साथ देने के लिए ... बाण - शय्या पर पड़े भीष्म भी उदास हैं ..अपनी उन प्रतिज्ञाओं के लिए जो उन्होंने भारतवर्ष की मूल अवधारनाओं के विपरीत मात्र हस्तिनापुर के सिंहासन पर आरूढ़ अंधे .... धृतराष्ट्र  के प्रति लीं और ' भरत ' के प्रजापालक सिधान्तों को भुला दिया ...
पितामहा के समक्ष सम्राट 'भरत ' मानो प्रकट रूप में पूछ रहे हों ... पितामहा यदि आप ने धर्म का साथ दिया होता और राष्ट्र प्रेम को अपने राज प्रेम से प्राथमिकता दी होती तो आज मेरे भारतवर्ष की यह दुर्गति कदापि न हुई होती ....अपने राष्ट्र प्रेम के कारन ही तो मैंने अपने नौं पुत्रो में से किसी को भी राष्ट्र के प्रजाजन के हित में अपना उत्तराधिकारी मनोनीत नहीं किया ...प्रचलित प्रथा के  अंतर्गत , अपने जयेष्ट पुत्र को राज सिंहासन पर बिठाने के निर्णय ने जब मेरी बुद्धि  और मन में अंतर्द्वंध मचाया तो मैं महर्षि कन्व के आश्रय में गया उन्होंने मेरे मन और बुद्धि के द्वंध का निराकरण किया ...तब मुझे ज्ञान हुआ की कोई भी राजा अपनी प्रजा और राष्ट्र  से बड़ा नहीं होता ...राजा का  धर्म है अपनी प्रजा की रक्षा करना और ऐसे समर्थ पुरुष को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करे जो अपने राष्ट्र और प्रजा के साथ न्याय करे और उनकी रक्षा करे .... मैंने राष्ट्र हित में अपने पुत्रों का मोह त्याग कर भारद्वाज पुत्र युद्धमन्यु को अपना उत्तराधिकारी चुन लिया ....मेरा चुनाव उचित सिद्ध हुआ ...धरम् युद्ध में युद्धमन्यु  ने धरम का साथ दिया और पांडवों की विजय में महत्त्वपूर्ण योगदान  भी दिया ......

हस्तिनापुर पुन: आज राष्ट्र प्रेम और राज भक्ति के दोराहे पर खड़ा है ....असंख्य राष्ट्र भक्तों की महान कुर्बानियों के उपरान्त जब देश आजाद हुआ तो हमारे संविधान्वेताओं ने आज़ाद देश को भारत के प्रथम जनतंत्र जनक 'सम्राट भरत 'के नाम पर भारतवर्ष नाम दिया ...संविधान के प्रथम पृष्ट पर 'इण्डिया दैट इज भारत 'इस का प्रमाण है. वैसे तो आजादी के तुरंत बाद ही भरत की योग्य उत्तराधिकारी के चयन की विचारधारा को 'तिलांजलि दे दी गई ,जब बहुमत की अवहेलना करते हुए गाँधी जी की पसंद को राष्ट्र का उत्तराधिकारी बना दिया गया ....तभी से देश  पर  ' धृतराष्ट्र वादी ' अंधी उत्तराधिकार प्रथा छाई है. राष्ट्र की प्रजा को केंद्र में ही नहीं अब तो अधिकाँश राज्यों में भी 'परिवार' से अपना 'उत्तराधिकारी' चुनने का एक मात्र विकल्प उपलब्ध है. केंद्र में यदि गाँधी का दिया एक परिवार 'राज्भाक्तो' की आस्था का केंद्र है तो राज्यों में अपने -अपने परिवारों की ताजपोशी में राजभक्तों के 'गिरोह ' सक्रीय हैं . मकसद भी सभी का एक ही है ...अपने 'आका' को सत्ता में बनाए रखना और देश की जनता और संसाधनों को दोनों हाथों से खूब लूटना ....जिस प्रकार आज़ादी से पहले रियासती रजवाड़े अपनी- अपनी सत्ता के नशे में चूर दिल्ली -दरबार को चुनौती देने से नहीं चूकते  थे ...आज लगभग  वही  हाल क्षेत्रीय दलों के समक्ष केंद्र का है ...सत्ता पर काबिज़ धृतराष्ट्रों  को परिवार और दुर्योधन के अतिरिक्त कुछ दिखाई ही नहीं देता ....... गाँधी का बोया बीज आज वट वृक्ष का रूप ले गया है ...इसकी कीमत तो राष्ट्र को और इसकी प्रजा को ही चुकानी पड़ेगी ...
भारत को फिर  से किसी 'भरत ' की तलाश है जो राष्ट्र को उपयुक्त योग्य उत्तराधिकारी  प्रदान करे ...जय भारत .




शुक्रवार, 25 जनवरी 2013

आतंक के प्यादे और वजीर


आतंक के प्यादे और वजीर 

      एल आर गाँधी 

प्यादे को फांसी और वजीर को महज़ 35 साल और वह  भी अमेरिकन जेल में , बहुत बेइंसाफी है ....हमारे खुर्शीद मियां ने तो साफ़ कर दिया की हेडली भारत का गुनेहगार है ...मुंबई के 26/11 आतंकी हमले में अमेरिकन 6 मरे और भारतीय 160 . हम डेविड कोलमैन हेडली उर्फ़ दाउद  गिलानी को कसाब से कमतर सजा कभी मंज़ूर नहीं करने वाले ...हम उसे सजा देते तो फांसी ही देते ..अमेरिका से हम हेडली को मांगते रहेंगे  ... यह भी कोई बात हुई ...एक मेहमान को पकड़ा और सजा का फरमान सुना डाला  .. न कोई मेहमाननवाज़ी - न आव भगत , न नखरे उठाए और न बिरियानी खिलाई  ...
अतिथि देवोभव ...अमेरिका क्या जाने .. अतिथि की कैसे सेवा की जाती है , तो कोई हम से सीखे ...कसाब मियां पर आठ आठ बावर्ची लगा रखे थे हमने .. चाहे हम अपने घर में भूखे सोते हों मगर महमान पर 55 करोड़ यूँ लुटा दिए जैसे ढोंगी बाबा की लंगोटी ...

राजकुमार के प्रवक्ता अल्वी मीयां ने भी लगभग भीख मांगने के अंदाज़ में हेडली जी की मांग अमेरिका से कर डाली है  ...यूँ तो हम अपने पडोसी पाक से भी अपने दाऊद साहेब और सईद साहेब को मांगते चले आ रहे हैं, मगर हमारा पडोसी खुद ही भिखारी जो ठहरा , हमें क्या देगा ....जब मांगते हैं बहाने बना देता है  कभी कहता है ...हैं ही नहीं ..ढूंढ लो ! हम तो खुद आतंक् पीड़ित हैं .. वगैरा वगैरा ...अब हेडली मियाँ हमारे यहाँ पांच बार आये और हमारे राहुल जी की मेहमान नवाजी से भी नवाजे गए ...अब आप 'राहुल' से राजकुमार का मुगालता न पाल बैठना .. ये आर एस एस और भाजपा के भगवा आतंकी पहले ही राजकुमार पर हमले की फिराक में बैठे हैं। हमारा इशारा मशहूर मियां  महेश भट्ट के सहेबजादे राहुल भट्ट की और है। हैडली जी राहुल भट्ट के मेहमान रहे ...मेहमां जो हमारा होता है वो जान से प्यारा होता है ..सो हेडली जी आए .. एक नहीं .. दो नहीं ..पूरे पांच बार आये  और चले गए और हम आए मेहमान के मंसूबों को  पहचानने में चूक गए .. अब अमेरिका ने पकड़ कर अपने  'मेहमानखाने' में डाल  दिया तो लगे मांगने ... जिन अपनों ने इस मेहमान की खातिरदारी की उनका क्या किया ? कुछ नहीं ...अतिथि देवो भव् ..संस्कार जो ठहरे।   

जब शिंदे जी से हमने पूछा ..मियां हेडली का क्या आचार डालोगे ..पहले जिनको फांसी  पर लटकाने के फरमान सुनाए  हैं पहले उनसे तो निपट लो , बेचारे अफज़ल मियां एक दशक से 'जन्नत के दरवाजे पर दस्तक को बेताब बैठे हैं . शिंदे जी ने झट से फ़रमाया भई हम तो अभी अभी ग्रह मंत्री बने हैं , कसाब को लटका दिया और जैसे ही अफज़ल मिया की फ़ाइल् मेरे पास आएगी उन्हें भी लटका दूंगा ...फिलहाल तो लगता है ..फाईल  ..लटक गई। फिर अपने और पराए आतंकियों को कोई एक आँख से कैसे देख सकता है .. अपने ....अपने जो ठहरे .. 

लगता है अमेरिकन जज इस्लामिक आतंकियों को और उनके जेहादी मंसूबों को हमसे पहले समझ गए हैं ...तभी तो हेडली को 35 साल की सजा सुनाते  हुए जज ने बहुत ही गंभीर टिप्पणी की !!
..........'उनके लिए कितनी भी गंभीर सजा देने के बाद भी आतंकियों की फितरत नहीं बदलेगी ' .. शायद अमेरिका ने शरियत की जेहादी इबारत पढ़ भी ली और समझ भी ली ..और हम पढ़ कर भी उसे समझने के बहाने ढूंढ रहे हैं .....'तुमरे रब ने हेडली के आखिरत में तय्यार कर दी है . जन्नत में 72 लौंडियाँ और मोती जैसे गिल्मे और वे अंगूर के बाग़ में गद्दे जहाँ नहरें  रवां होती हैं ..(सूरा . 45.12) फिर कोई इमाम ...किसी कोच्ची की मस्जिद में आतंक के वजीर डेविड कोलमैन हेडली उर्फ़ दाऊद गिलानी के लिए नमाज़ पढ़ेगा ...प्यादे के लिए भी पढ़ी थी ...और हमारे सेकुलर शैतान इसे  एक 'मज़हबी ' मामला कह कर रफा दफा कर देंगे .....