बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

केज़री बनाम राजभक्त

केज़री बनाम राजभक्त 
 एल आर गाँधी 

खुर्शीद मीयां  ने डेढ़ सौ साल पुरानी पार्टी की नाक ही कटवा कर रख दी ....राज माता को ऐसे नालायक को फ़ौरन से पेशतर 'ट्राइसिकल ' पर बिठा कर कानून मंत्रालय से विदा कर देना चाहिए। कितनी मेहनत से एक मुकाम हासिल किया गया था,,,,,,सब गुड गोबर कर दिया ....महज़ 71 लाख में नाक कटवा  बैठे और वह  भी 'आले 'की खातिर ...अरे जिन्हें सुनाई ही नहीं देता वे क्या सुनेंगे और क्या सुनायंगे-चले थे बधिरों को 'अज़ान ' सुनाने , रोज़े गले पढ गए .
कल तक जवाई राजा का बचाव कर रहे थे ....आज लोग   मियां जी का बचाव कर रहे है .....बेनी जी का इस्पाती बचाव देखिये .... खुर्शीद मीयां जैसे सीनियर मंत्री महज़ 71 लाख जैसी छोटी रकम नहीं 'हडपेंगे ' हाँ 71 करोड़ जैसी कोई रकम होती तो हम भी मान लेते ....लाखों करोड़ की उचाईयां छूने के बाद 'सिंह ' साहेब की काबिना का कोई इतना सीनियर मंत्री ...इतना गिर जाएगा और वह भी राज माता की ' नाक का बाल 'कोई ऐरा  ग़ैरा नत्थू -खैरा नहीं .
बेनी जी ने  जब से वीरभद्र जी की रुस्तगी के बाद इस्पात मंत्रालय सम्हाला है ... तब से हर मूसिबतज़दा मंत्री के पीछे 'इस्पात ' की तरहां खड़े नज़र आते हैं .. अब भद्रपुरुष जब हिमाचल में अपनी भूमि फिर से तलाशने में मशरूफ हैं तो किसी ने पुराने जखम कुरेदते हुए महज़ 2 करोड़ की घूंस का इलज़ाम उनके नाम चस्पा कर दिया  . बेनी जी फिर से अपने पूर्वर्ती मंत्री जी के पक्ष में 'इस्पात ' की भांति खड़े दिखाई दिए  ...फ़ौरन इसे किसी कर्मचारी की चालाकी करार दिया  .. सब वीरभद्र जैसे 'इमानदार ' शख्स के नाम पर कंपनी के पैसे डकारने का षड्यंत्र बताया  . बेचारे पहले ही बाईस बरस पुराने एक छोटे से दाग को धोने को केंद्र से राज्य में पटक दिए गए हैं ...किसी ने सच ही कहा है बड़े लोगों को छोटे -छोटे ज़ख्म गहराई तक टीसते हैं  . 
बेचारे हूडा साहेब तो अपनी राजभक्ति का निर्वहन मात्र कर रहे थे ...अब जवाई राजा  को अपने राज्य की ज़मीन का एक अदद टुकड़ा नजराना  क्या दे दिया ... लगे केजरी - खेमका जैसे ऐरे -गैरे हो हल्ला मचाने   
 ये क्या जाने राज भक्ति ...इतिहास गवाह है ..कैसे राज भक्त राज परिवार की खातिर अपनी जान तक न्योछावर कर  देते थे। यह तो एक ज़मीन का टुकड़ा मात्र है  फिर हूडा साहेब को हरियाणा की सरदारी भी तो राजमाता की ही देन  है।  एक तो बलात्कारियों ने नाक में  दम कर रखा है ऊपर से ये केज़री - खेमका .....

 राज भक्तों पर आई इस मुसीबत से राजमाता सकते में है .. राजकुमार और राजमाता ने मन बना लिया है
या तो सब बदल डालो या फिर चवन्नी को रुखसत कर खुद सम्हालो !

शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

बर्बर मुल्क पाकिस्तान


बर्बर मुल्क पाकिस्तान 
एल.आर.गाँधी 

अमेरिका के थिंक टैंक ने पाकिस्तान को बर्बर मुल्कों की सूची में डालने की सिफारिश की है. मिडल ईस्ट मिडिया इंस्टीच्युट के तुफैल अहमद ने अपनी रपट में कहा है की पाकिस्तान में गैर इस्लामिक समूहों (काफिरों) को समाजिक व् मज़हबी भेदभाव का शिकार होना पड़ता है. उन्हें इस्लामिक गुटों की मज़हबी नफरत का सामना करना पड़ता है. सरकारी अधिकारिओं , वकीलों ,न्यायधीशों व् विधायकों से भी कोई उम्मीद नहीं , क्योंकि ये सभी इस बर्बरता को ,पाकिस्तान को पवित्र इस्लामिक मुल्क बनाने की पहल की नज़र से देखते हैं. रपट में तुफैल अहमद ने ईश निंदा के आरोप में हिन्दुओं, ईसाइयों व् अहमदी मुसलमानों को सताए जाने और हिन्दू व् ईसाई लड़कियों के अपहरण , ज़बरन धर्म परिवर्तन और हत्या जैसी अनगिनत घटनाओं को उजागर किया है. 
मज़हबी अनाचार और अत्याचार से पीड़ित असंख्य  हिन्दू परिवार जब अपनी बहु बेटियों की अस्मत बचाने की खातिर ,  पाकिस्तान में अपना घरबार व् व्यवसाय आदि  अपना सब कुछ छोड़ कर भारत में शरण लेने पहुंचे तो हमारे विदेश मंत्री जी ने फ़तवा जारी कर दिया कि इन हिन्दू परिवारों को उनपर पाकिस्तान में हुए अत्याचारों का सबूत देना होगा..... अमेरिकी मानवाधिकार संगठनों को तो पाकिस्तान के अत्याचार दिखाई देते हैं और उन्होंने तो पाक को 'बर्बर' अत्याचारी मुल्क तक घोषित करने की शिफारिश तक कर दी है. मगर हमारी गाँधीवादी सेकुलर सरकार को अभी भी पाकिस्तान में कोई खोट नहीं दिखाई देती. 
अल्पसंख्यक वोट बैंक की खातिर इन्हें चार करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिये दिखाई ही नहीं देते और इनके आसाम के मुख्यमंत्री ने तो साफ़ साफ़ घोषणा कर दी कि इन बांग्लादेशी मुसलमानों को अब इस देश से निकाला नहीं जा सकता. मियान्मार और असाम के मुसलमानों के पक्ष में हज़ारों की तादाद में मुसलमान मुज़ाहरा करते हैं मगर पाक में हिन्दुओं पर ढाए जा रहे अत्याचारों के विरुद्ध 'शमशान सी खामोशी' पसरी है. नेहरु-गाँधी के इन अनुयायियों ने तो 'हिन्दू' शब्द को ही एक 'साम्प्रदायिक गाली' मान लिया है..... 

मंगलवार, 25 सितंबर 2012

वाच डाग और सत्ता की सुपारी


वाच डाग और सत्ता की सुपारी 
एल.आर.गाँधी 
सत्ता कि सुपारी का कमाल.....
भारतीय मिडिया एक  ऐसा वाच डाग है जो अपनी घ्राण शक्ति से आकाश, पाताल और इहिलोक का हर राज़ जान लेता है. 
स्वर्ग की सीढ़ी, हिम मानव ,प्रलय का पल ....सूंघ कर सारी दुनिया को हैरान और परेशान कर देता है. 
लक्ष्मण के स्टिंग , जार्ज के ताबूत काण्ड ,राडिया कि टेप से पर्दा उठा कर 'तलहका' मचा देता है.....
मोदी को साम्प्रदायिक सिद्ध करने को ....ट्रेन में जलाये गए कार सेवकों को .'.महज़ हादसा '  बता देता है. 
बोर वेळ में गिरे राजू को ....राष्ट्रिय आपदा बना   देता है और मिक्का-राखी चुम्बन को  अबला उत्पीडन !
सब कुछ जानने और बताने में सक्षम है मगर .....
काले अंग्रेजों की गोरी महारानी के अस्पताल और बीमारी से अनजान है , 
दुनिया की चौथी रईसजादी की ४५००० करोड़ की  कमाई कहाँ से आई , नहीं मालूम , 
शायद सत्ता की आधी सुपारी हलक में और आधी सुपारी नाक में अटक गयी है....
और सूंघने की घ्राण शक्ति और भौंकने की श्वान शक्ति तिरोहित हो गयी है.... 
तभी तो समाज के चौथे खम्बे पर यह वाच डाग 'टांग उठा कर .................... 
जय हो ......उतिष्ठकौन्तेय  

सोमवार, 17 सितंबर 2012

उधर तालिबान - इधर सेकुलर शैतान !


 उधर तालिबान - इधर सेकुलर शैतान !
          एल.आर.गाँधी 

आगे कुआ  पीछे खाई... कुछ ऐसी स्थिति है पाक में अपना सब कुछ लुटा कर भारत में पनाह लेने आए हिन्दुओं की. 
हमारे विदेश मंत्री ने इन विस्थापित हिन्दुओं को स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें साबित करना होगा कि उन पर पाकिस्तान में कैसे कैसे अत्याचार हुए... उधर तालिबान - इधर सेकुलर शैतान !
इस्लामिक आतंक से सारी दुनिया वाकिफ है सिर्फ हमारे इन सेकुलर शैतानों के,  जो यह मानने तो ही तैयार नहीं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार होता है. अंतर्राष्ट्रीय मिडिया और यहाँ तक कि पाक के मानवाधिकार स्वमसेवी संस्थान भी मानते हैं कि प्रतिमाह दर्ज़नों हिन्दू लड़कियों को अगवा कर बलात्कार किया जाता है और फिर जबरन उन्हें मुस्लिम युवक से निकाह के लिए मजबूर किया जाता है. ... ऐसे हालात में अपना सब कुछ छोड़ कर जो हिन्दू परिवार अपनी बहु बेटियों की इज़त-अबरू बचाने के लिए भारत पलायन को मजबूर होते हैं उनसे हमारे विदेश मंत्री श्री एस.एम्.कृष्ण  जी अभी सबूत मांगते हैं कि कैसे उनके साथ ज्यादती हुई... ये तो ऐसे ही हुआ कि विदेश मंत्रीजी की अपनी लड़की को कोई अगवा कर बलात्कार करे और फिर इस्लाम कबूल करवाकर निकाह कर ले ..और जब हमारे मंत्री महोदय लूटे पिटे अपनी दरयाफ्त करें तो उनसे पूछा जाए कि आपके पास क्या सबूत है कि यह सब हुआ. 
पाकिस्तान में हिन्दू बच्चों को स्कूलों में दाखिला नहीं मिलता, उन्हें स्कूल में नमाज़ पढने को बाध्य किया जाता है और उनके सहपाठी उन्हें 'काफ़िर कुत्ता' कह कर ज़लील करते हैं. हिन्दुओं को ज़बरन इस्लाम कबूल करने को मजबूर किया जाता है, हिन्दू लड़कियों को अगवा कर बलात्कार किया जाता है . हिन्दू- सिखों से इस्लामिक कर 'जाजिया' वसूल किया जाता है. . फैक्टरियों  में हिन्दू कामगारों को पीट पीट कर मार दिया जाता है . इस्लामिक सत्ता  को मज़बूत करने की खातिर ८०% हिन्दू काफिरों की ज़मीन छिनी जा चुकी है. यही कारन है कि हिन्दुओं की जनसँख्या जो १९४७ में २०% से अधिक थी १९९१ में घट कर मात्र १.६ % रह गई.  फिर भी हमारे सेकुलर शैतान इन सभी तथ्यों से आँखें  मूंदे हर साल वाघा सीमा पर हिंद-पाक दोस्ती की मोमबत्तिया जला कर 'उन शैतानों से बगलगीर होते हैं... 
पिछले दिनों २५० पाक हिन्दू 'तीर्थ यात्रा के बहाने किसी प्रकार वीजा ले कर इधर आए तो एक परिवार ने पाक में हुए अत्याचारों की व्यथा गाथा ब्यान की  कि किस प्रकार उनके परिवार के एक पुरुष सदस्य जो पिछले २० साल से एक मुसलमान जागीरदार के यहाँ ड्राईवर का काम करता था , ने जब अपने मालिक से तनख्वाह की मांग की तो उसे जंजीरों से बांध कर इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गई...मजबूरन सारा परिवार मृतक की विधवा और पुत्र पुत्रिओं सहित उनके छोटे भाई के साथ भारत आ गया..भाई ने अपने मोबाईल में मृतक की जंजीरों में ज़कड़ी तस्वीर भी दिखाई. ... सेकुलर मिडिया को छोड़ कुछ हिंदी समाचार पत्रों ने इस स्टोरी को मृतक की तस्वीर सहित  प्रकाशित भी किया. ... मगर हमारे प्रधान मंत्री या विदेश मंत्री ने कोई प्रतिक्रिया देना शायद मुनासिब नहीं समझा ...कही पडोसी से दोस्ताना रिश्तों में खटास न आ जाए ?  यही वाकया किसी मुसलमान के साथ हुआ होता , यही प्रधान मंत्री ऐनक उतार उतार कर आंसू पोंछते ! विदेश मंत्री सभी दौरे मुल्तवी कर प्रेस में जोरदार भर्त्सना करते.  और हाँ हमारे महान सेकुलर मिडिया के महारथी ' राजदीप सरदेसाई' तो अपने चेनल पर पूरे तेरह दिन तक 'अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों ' पर देश भर के सेकुलर शैतानों का 'मजमा' लगाते और देश को बताते कि किस प्रकार 'भगवा आतंक इस्लामिक आतंक से ज्यादा खतरनाक है.    
पाक की ही एक सरकारी संस्था के आंकड़ों से पाक में अल्पसंख्यकों की मौजूदा स्थिति का भली भांति पता चलता है. पाक में विभिन धार्मिक समुदायों  पर , नेशनल डाटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथारटी के सर्वे में यह दिखाने की कोशिश की गई कि यह अवधारणा गलत है कि पाकिस्तान केवल एक इस्लामिक देश है .... रिपोर्ट के अनुसार पाक में आज भी २.९ मिलियन व्यसक सात विभिन्न समुदायों से  हैं , जिनका मज़हब इस्लाम से अलग है. इनमें १.०४  मिलियन हिन्दू ,१.२७ मिलियन क्रिश्चन , १२५६८१ अह्मदिस, ३३००० बहावी, ६१४६ सिख ४००० पारसी व् १५०० बुध.  पाक को सेकुलर और बहु-समुदय्वादी देश सिद्ध करने का क्या नायाब तरीका है. 
पाक कि १९४७ में ३.५ करोड़ जनसँख्या थी , जो आज १८ करोड़ हो गई है ... यदि कुल जनसँख्या के अनुपात से अल्पसंख्यकों की संख्या को आँका जाए तो २५% के हिसाब से आज लगभग ४ करोड़ से अधिक अल्पसंख्यक होने चाहिए और हिन्दुओं की संख्या ३.५ करोड़ . मगर पाक सेन्सस के अनुसार हिन्दू मात्र ३० लाख रह गए हैं. पिछले ६५ साल में पाकिस्तान का इस्लामिक आतंक ३.५. करोड़ हिन्दुओं को लील गया , अभी हमारे विदेश मंत्री जी को पाक छोड़ कर आ रहे हिन्दुओं से उन पर हो रहे अत्याचारों का हिसाब चाहिए.  हिसाब तो चाहिए ही वर्ना इनके वोट बैंक का हिसाब जो गडबडा जायेगा? 

सोमवार, 20 अगस्त 2012

असाम बनाम मुग्लिस्तान


असाम बनाम मुग्लिस्तान 
एल. आर गाँधी. 

पाकिस्तान में बचे खुचे अल्पसंख्यकों को 'नेस्तोनाबूद ' करने का खेल जारी है. सैंकड़ों हिन्दू  परिवार इस्लामिक अत्याचार से दुखी हो कर पलायन कर रहे हैं ..और हमारे सेकुलर शैतान 'ईद मुबारक 'में मस्त हैं. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को मुसलमान बनाने या फिर डराने धमकाने के लिए यू तो शरियत के बहुत से कानून हैं. मगर ईश निंदा का कानून 'अल्पसंख्यकों' के लिए एक मौत के फरमान से कम नहीं जिसके तहत किसी भी अल्पसंख्यक को बेवजह बेमौत मार दिया जाता है. 
अभी  ११ वर्षीया एक ईसाई लड़की को ईश  निंदा के आरोप में बंदी बना लिया गया . शुक्रवार को एक मियां ने लड़की पर आरोप लगाया कि उसने कुरआन के १० पन्ने जला दिए ...५००-६०० लोगों ने लड़की का घर घेर लिया ...इससे पहले कि मज़हबी हुजूम उसे मौत के घाट उतार देता ...पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. ...३०० ईसाई परिवार अपनी जान बचा कर भागने को लाचार हैं और पुलिस उन्हें भगाने में मदद कर रही है. पिछले ६५ साल में पाक में अल्पसंख्यक २५% से घटते घटते महज़ १.६% रह गए हैं और इनमें अधिसंख्या हिन्दुओं की है. 
लगभग यही हाल बंगलादेश का है. बंगलादेश के १९७१ में अस्तित्व में आने के वक्त हिन्दुओं कि आबादी ३६% थी जो अब महज़ ९ % रह गई है . अपनी ओर से तो इंदिरा जी ने बंगला देश बनाने में इस लिए मदद की थी कि पड़ोस में एक 'सेकुलर मित्र- पडोसी' होगा. मगर हुआ बिलकुल इसका उल्ट ...बंगलादेश से करोड़ों बंगलादेशी मुसलमान आसाम , बंगाल और बिहार में आ घुसे  और आज आसाम के मूल निवासिओं को ही उनकी जन्मभूमि से बेदखल करने की साज़िश चल रही है. हमारे सिंह साहेब २२ साल से आसाम के 'घुसपैठिये' हैं और अभी तक उन्हें असाम कि समस्या समझ में नहीं आ रही. 
सिंह साहेब हम समझाते हैं आप को आसाम की मूल समस्या ... यह है कश्मीर से आसाम तक 'मुगलस्तान 'बनाने की 'जिन्ना' की पुरानी योजना. . बंगलादेश में जहाँगीर नगर युनिवर्सटी   में मुगलस्तान रिसर्च इंस्टीच्युट ने पाक से असाम तक मुग्लिस्तान बनाने कि योजना बनाई है. उस योजना के तहत  ही देश का मुस्लिम समाज आज आसाम के घुसपैठिये मुसलमानों के साथ खड़ा नज़र आ रहा है. मुंबई, उत्तरप्रदेश ,आन्ध्र, दिल्ली और कर्णाटक की सेकुलर सरकारों को 'लकवा' मार गया है मुसलमानों का यह रूप देख कर .... लकवा से पीड़ित सेकुलर शैतान ... अपने इन शैतानो को खुश करने के लिए टेढ़े मुंह से ही सही ... ईद मुबारक का प्रलाप कर रहे हैं...... वतन के पटल पर एक और विभाजन की रेखाएं साफ़ नज़र आ रही हैं. ... और   हमारे 'शिखंडी' राज परिवार के काले कारनामों को छुपाने -बचाने को ही वतनपरस्ती मान बैठे हैं.    

मंगलवार, 7 अगस्त 2012

अठन्नी की ताजपोशी


अठन्नी की ताजपोशी


एल.आर.गाँधी
जब से एक अर्थशास्त्री ने देश की कमान सम्हाली है….देश की अर्थव्यवस्था ही ज़मींदोज़ नहीं हुयी बल्कि राजनैतिक व्यवस्था भी रसातल में जा समाई है.
सिंह साहेब ने जब से ‘चवन्नी’ का चलन बंद किया है तब से लोग अठन्नी को भी उसी नज़र से देखने लगे हैं और इसका चलन भी लगभग ख़तम हो गया है. अठन्नी की दुर्दशा भांपते हुए रिजर्व बैंक ने लोगों में भरपूर अठन्नियां बाँट कर इसे फिर से पुनर्जीवित करने की नाकाम कोशिश तो की है मगर ‘कोई इसे भाव देने के मूड में नहीं’. रही बात रुपैये की … काफी अरसे से बीमार चल रहा है ..और अपनी बीमारी को ‘निजता और सिकियोरिटी’ के नाम पर छुपाए चला जा रहा है. अब तो बस थोड़ी बहुत गाँधी छाप ५००-१००० की ही पूछ है.
जैसे रूपए की बीमारी और उदासीनता के साथ ही चवन्नी बे मोल हो गई वैसे ही हमारे सिंह साहेब भी मैडम की कृपा से पी.एम्. की कुर्सी पर बैठे तो हैं मगर कीमत चवन्नी की भी नहीं रही.. बेचारी को कोई पूछता ही नहीं. जब से पहले बिहार में और फिर यू.पी. में किसी ने अठन्नी को मूंह नहीं लगाया तभी से ‘दिग्गी’ जैसे धेल्ले विचलित हो चले हैं. आज अठन्नी को नहीं पूछा कल ‘रुपी’ को नकार देंगे… ऐसे कैसे चलेगा. अठन्नी को कोई बड़ा .रूप.-.रुतबा दे कर बाज़ार में उतारा जाए … यह भी सुझाव आया कि खारिज और बेमोल चवन्नी के स्थान पर अठन्नी की ताजपोशी कर दी जाय ..फिलहाल आकर्षक द्वान्नी को भी मार्कीट में उतारा गया है ताकि अठन्नी और ‘रूपी ‘ की गैरहाजिरी की भरपाई की जा सके. सुपारिपाक मिडिया को भांड गिरी का काम सौंप दिया गया है.
‘रूपी’ बीमार है …अठन्नी’ चल नहीं पा रही …चवन्नी का कोई मोल नहीं … अब तो द्वान्नी या फिर सुपारिपाक मिडिया का ही सहारा है….

रविवार, 5 अगस्त 2012

अन्ना और राजनैतिक ढोंग


 अन्ना और राजनैतिक ढोंग 
एल.आर.गाँधी. 

अन्ना के जनांदोलन  के राजनितिक -समर में कूदने पर दिग्गी मियां बहुत खुश हैं ...मानों अन्ना ने उनकी नसीहत मान ली और कूद गए राजनीति के मैदान में ...कल तक राजनीति को मैली गंगा कहने वाले आज खुद 'गंगा' में डूबने को तैयार हो गए हैं. क्योंकि दिग्विजय सिंह से अधिक कौन जान सकता है कि राजनीति के हमाम में तो सब नंगे हैं ....अन्ना को सर से पाओं तक भ्रष्टाचार में लिप्त कहने पर  अपनी किरकिरी करवा कर अलोप हो गए  कांग्रेसी प्रवक्ता मनीष तिवारी फिर से अपने पूरे रंग में हैं ...अन्ना के आन्दोलन को राजनीति से प्रेरित बता कर अपनी खुन्नस निकाल रहे हैं. 
यह वही अन्ना हैं जिन्हें हमारे 'चोरों के सरदार और फिर भी ईमानदार' .....'राजनैतिक चवन्नी' ने आज के महान गाँधी कह सलाम ठोका था ..और कांग्रेसी छुटभैयों के अपशब्दों के लिए 'सारी' फील किया था. उसी गाँधी वादी नेता के आमरण अनशन को इस प्रकार 'धिक्कार' दिया जैसे कोई  जिद्दी-ढोंगी' बूढा  सठिया गया हो.
कान्ग्रेसिओं की नज़र में गांधीवाद के बारे में ऐसा नजरिया कोई नई बात नहीं है. सत्ता के नशे में चूर इन सेकुलर शैतानों ने गाँधी के नाम का दोहन तो खूब किया मगर उनके एक भी आदर्श से इनका दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं. इनके आदर्श तो आज 'राजमाता' सोनिया गाँधी है या फिर गाँधीवादी वयोवृद्ध नेता एन.डी.तिवारी , सुखराम, या बीरभद्र जैसे  भद्रपुरुष हैं .... तिवारीजी को तो दो दशक बाद पता भी चल गया कि वे एक रोहित तिवारी के नाजायज़ बाप हैं ...मगर इन गाँधी को बापू कहने वाले इन सेकुलर शैतानो या माडर्न गांधियों  को तो यह भी याद नहीं कि महात्मा गाँधी को 'राष्ट्र पिता' किसने बनाया था. इसमें इनका कोई दोष भी नहीं , जब गांधीजी को बापू कहने वाले पंडित जवाहर लाल ही उन्हें 'ढोंगी बूढा' मानते थे , तो इन छुटभैयों को क्या कहें. कनाडियन पी.एम् लेस्टर पियर्सन ने अपनी पुस्तक में इसका ज़िक्र किया है. १९५५ में जब वे नेहरूजी के निमंत्रण पर भारत आए तो एक नाईट ड्रिंक पार्टी में जब उन्होंने नेहरूजी से गाँधी जी का ज़िक्र छेड़ा तो नेहरूजी के मुंह से अनायास ही निकल पड़ा 'ओह ,...वह  भयंकर ढोंगी बूढा'
लगभग ऐसे ही विचार हमारे आज के कांग्रेसियों के अन्ना जी के बारे में हैं. और हों भी क्यों न ...अन्ना उनके भ्रष्टाचार पर टिके सिंहासन की चूलें हिलाने पर जो तुले हैं. जिस प्रकार गाँधी जी ने सदियों से सो रहे दबे कुचले भारतियों को अपने जन आंदोलनों के ज़रिये जागृत कर दिया था वैसे ही पिछले छह दशक से भ्रष्टाचार से त्रस्त भारतियों को जगाने का काम कर रहे हैं अन्ना जी. फर्क सिर्फ इतना है कि गाँधी जी के वक्त लोग सो रहे थे मगर आज आधे से अधित लोग भ्रष्टाचार को जायज़ मानते हैं और  भ्रष्ट  नेताओं की भांति..... अन्ना को ढोंगी बूढा मान हँसते हैं . कान्ग्रेसिओं कि ख़ुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं क्योंकि वे जानते हैं कि अन्ना के राजनीति में दाखिले से 'कांग्रेस' विरोधी वोट जो बी.जे.पी. की झोली में जाने का अंदेशा था अब बंट जाएगा .. राजनीति में अनजान दुश्मन अक्सर दोस्त ही होता है.