सोमवार, 20 दिसंबर 2010

'मार् दिया दिल्ली की सर्दी '







                                                  'मार् दिया दिल्ली की सर्दी '                                                                                                                                
                                                                    एल..आर.गान्धी. 


मौसम के खबरीओं का अनुमान है -अबकी बार ठण्ड अपने सभी पिछ्ले रिकर्ड तोड देगी ! पिछली दिसबर की  कम्प्कम्पाती ठण्डी में शीला जी की नगर निगम के अफ्सरों  ने बेघर लोगो का रैनबसेरा गिरा दिया ताकी 
वहाँ पार्क बनाया जाए तो बेघर  लोग उसी स्थान पर ठण्ड से मरने लागे. एक सव्यम सेवी संस्था ने सर्वोच्च न्यायालय को लिखा तो न्यायाक्य ने इसका सख्त नोटिस लेते हुए दिल्ली सरकार को बेघर लोगों के लिए रैनबसेरे दुगने  करने का  आदेश जारी किया. इस बरस शिला जी के अफ्सर फिर दो रैनबसेरे तोड़ते हुए पाए गए तो सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को निर्देश जारी किए की यह निश्चित किया जाए की कोइ भी बेघर इन्सान मरने  न पाए . सारे देश में बेघर इन्सनों के लिए पर्याप्त रैन्बसेरों का प्रबन्ध किया जाए. भविष्य में किसी भी रैनबसेरे को तब तक न तोडा जाए जब तक उसके स्थान पर नए आवास का प्रबन्ध न हो जाए. इसके साथ् ही दिल्ली के सभी ६५ रैनबसेरों को एक सप्ताह के भीतर चालु करने के भी निर्देश दिए गए.
देश की राजधानी जहाँ आधुनिक भारत के सभी सैकुलर शासक बडी बडी आलिशान वातानुकुलित अट्टालिकाओं  में चैन की नींद सोते हैं , वंहीं एक लाख बदनसीब बेघर गरीब इतनी भीषण ठण्ड में भी खुले असमान के नीचे तिल तिल मरने  को मजबूर हैं. शीलाजी का दावा है कि सोनिया जी की सरकार ने सभी के लिए रैन्बसेरों का पक्का इन्तजाम किया है. जबकी मौजुदा रैनबसेरे मात्र ६००० इनसानो को आश्रय दे पाते हैं .एक अनुमान के अनुसार दिल्ली की सर्दी हर रोज १० इनसानों को लील जाति है. निज़ामुदीन क्षेत्र  का एक आदमी जो मृत्कों के शवों के अन्तिम संस्कार का कार्य कर्ता है का कहना है कि पिछ्ली सर्दी में उसने हर रोज ९ लोगो को शम्शान पहुन्चाया .   
देश में ऐसे बेघर जिनके पास सर छुपाने को झोपडी भी  नहीं ,  एक करोड तीस लाख हैं और इन् पर प्रति व्यक्ति ५-६ जीव  आश्रित भी हैं. भीषण सर्दी ही नहीं -मान्सून -भीषण गर्मी , बिमारिया, बच्चो  की पढाई , बेरोजगारी और सबसे बडी समस्या भूख के चलते ये लोग महानग्रों की सड्कों के किनारे प्रति दिन तिल तिल मरते हैं.    
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर  कर्नाटक और गुजरात सरकार तो कुछ हर्कत में आइ हैं  कर्नाटक सरकार ने राज्य के सभी ज़िलाधिशों को और २१४ लोकल बडिज़ को ४९ सूत्री कार्य क्रम के तहत बेघर गरिबों के लिए आवास और भोजन के समुचित प्रबन्धन पर ३ माह के भीतर कार्यान्वन के आदेश दिए हैं . वहीं गुजरात में अहमदाबाद नगर निगम ने बेघर लोगों के लिए ६ डौरमैटारी किसम के आवास 'रैनबसेरे'  बनाने की योजना बनाई है जहाँ बेघर  लोग रात्री के वक्त ठहर सकेंगे और इसके इलावा ऐसे लोगों को रात्री के वक्त रैन्बसेरों, कैमुनीटी केन्द्र , मंदिरों और दिस्पैन्सरिओन् में आश्रय दिया जाएगा.  
वहीं देश के सबसे बडे  प्रदेश उत्तर प्रदेश की  महारानी माया वती जी के पास 'माया' की कमी के चलते इस योजना पर कोइ भी कारवाई करने का न तो वक्त है और न ही पैसा. फिर भी प्यार की धरोहर ताजमहल के लिए मशहूर आगरा में एक श्री निशुल्क जल सेवा दल के बाँके लाल महेश्वरी द्वारा ५० बेघर इन्सानों के लिए एक रैनबसेरा ज़रुर बनाया गया है. माया जी के पास विशाल मूर्तियों ,स्मार्कों, पत्थर के भीमकाय हाथियों के लिए तो करोदों रुपये  हैं मगर इन्सानों के लिए ...........
दिल्ली पुलिस के रेकर्ड के अनुसार २००५ से २००९  तक ऐसे बेघर बेसहारा मरने  वालों की संख्या ३१०३ रही. इस के अतिरिक्त जिन बेसहारा लोगों को पास पड़ोस के लोग खुद ही अन्तिम संस्कार कर देते हैं कि गिन्ती प्रति दिन १० मृत्कों की है. पुलिस की माने तो बेसहारा लोग भीषण गर्मी का शिकार अधिक संख्या में होते हैं.ऐसे मृत्कों में ९४% लोग औस्तान ४२ वर्ष के मजदुरी करने वाले पुरुष होते हैं. मात्र ८% लोग दुर्घटना या हत्या का शिकार होते हैं जबकी ९२% लोग भूख, प्यास ,गर्मी, ठण्ड, बिमारी और निर्धनता के कारण बिना उपचार रोगों जैसे टी.बी. मलेरिया या नशा जन्य रोगों के शिकार हो  जाते हैं .
लौह  पुरुष वल्लभ भाई पटेल ने रियासतों को समाप्त कर देश में लोक तंत्र की नींव इस लिए मज़बूत की कि लोगों द्वारा चुनी गई सरकारें गरीबों और बेसहारा मजलूमों को रोटी कपडा और मकान की मूल भूत सुविधाएँ उपलब्ध करवाएंगी . मगर आज़ादी के ६३ वर्ष बाद भी गरीब और गरीब होता गया और आज हम विश्व के भ्रष्टतम  देशों के सिरमौर हैं. अरे इन सेकुलर शैतानों से तो बेहतर  रियासती रजवाड़े ही थे . रियासती दौर में शहर के सभी साहूकारों को महाराज की विशेष हिदायत थी कि शर्दी के मौसम में वे अपनी हवेली के अहाते में 'अलाव' जलाएं ताकि बेघर -गरीब लोग और जानवर ठण्ड से राहत पा सकें . इसके इलावा सभी सम्प्रदायों की अपनी अपनी धर्म शालाये और रियासत के रैनबसेरे बेघर लोगों को ठण्ड व् गर्मी से राहत के लिए खोल दिए जाते थे जहाँ भोजन और जलपान की व्यवस्था के अतिरिक्त धर्मार्थ संस्थाएं कम्बल-रजाई निशुल्क उपलब्ध करवातीं थी . पशुओं को  गौशाला में आश्रय  और आहार मिल जाता था. अब इंसानों का यह हाल है- पशुओं का तो बस भगवान ही मालिक है.   
दिल्ली के रईसजादों के लिए तो सर्दी का मौसम उस फिल्मी गीत की माफीक है....'प्यार तेरा दिल्ली की सर्दी' ... और बेघर गरिबों के लिए 'मार् दिया दिल्ली की सर्दी....        

मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

मूर्ख- नपुंसक या बौधिक-किन्नर

 मूर्ख- नपुंसक या बौधिक-किन्नर 
एल.आर.गाँधी. 

हमारे सेकुलर शैतानों को विश्व भर में नए नए ' अलंकारों ' से नवाज़ा जा रहा है. सिंगापूर के एक वृष्ट अधिकारी ने अमेरिकियों के साथ एक बैठक में भारत को 'मूर्ख दोस्त' कहा . इसका खुलासा विक्किलीक्स में हुआ . हमारे विदेशी और देसी राजनेताओं को इस का कोई मलाल भी नहीं. अमेरिकन अधिकारिओं के गुप्त सन्देश नित नए नए रहस्योदघाटन कर रहा है विकिलीक्स . २६/११ के आतंकी हमले के बारे में अमेरिका को पूर्व सूचना थी फिर भी उसने हमारे साथ उस महत्तवपूर्ण जानकारी को 'साँझा ' करने की जेहमत  नहीं उठाई. और हम हर आतंकी हमले की शिकायत अमेरिका से ऐसे किये जाते हैं जैसे कोई लाचार- बेबस बार बार मार खा कर आपने भगवान् को याद करता है. अमेरिका को हम विश्व आतंक वाद के खिलाफ अपना चिर सहयोगी मान बैठे हैं और यह भूल गए की अमेरिका के हित पाक के साथ जुड़े हुए है . फिर मूर्ख और नपुंसक का साथ देता भी कौन है ? 
वर्षों से हमारे गृह मंत्री जी  चिल्ला चिल्ला कर आसमान सर पर उठाए हुए हैं कि पाक को २६/११ के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाही के लिए कहा जाए . पाक के यहाँ पनाह लिए आतंकियों  को हमारे सपुर्द किया जाए. अरे भाई जिन आतंकियों को हमारे उच्चतम न्यायालय ने फांसी पर लटकाने की सजा सुना रखी है , पहले उनको तो निपट लो पाक में बैठे आतंकियों को mangwa कर क्या aachaar daloge उनका ? .  एक दशक बीत गया मगर  अफज़ल मियां लाईन में लगे हैं ,कभी शीला जी के पास फाईल अटक जाती है और अब चिदम्बरम  जी के यहाँ पड़ी है. १३ दिसंबर को देश की संसद और सांसदों  की हिफाजत में शहीद हुए जवानों को श्रधांजलि  दी गई और हमले के एक मात्र सजायाफ्ता 'अफज़ल' मियां की फांसी में हो रही देरी के बारे में जब हमारे ग्रह मंत्री 'धोती-धारी' श्री श्री पल्निअप्पम चिदम्बरम से बी.जे.पी नेता सुषमा स्वराज ने पूछा  तो वे बिफर गए , बोले  ' ये लोग मूर्ख हैं या बहरे होने का नाटक कर रहे हैं ,कितनी बार हमने समझाया है इस विषय में .  उन्होंने सरकार की मजबूरी का विस्तार से खुलासा किया. फांसी के सभी केस पंक्ति वार राष्ट्रपति जी को भेजे जाते है . महामहिम ने ५-६ केसों पर हुकम पास भी कर दिया है. एन.डी.ए.काल में जीरो ,उनसे पूर्व शिवराज पाटिल के साढ़े चार साल में २  और उनके २ साल के कार्यकाल में ५-६ . वाह क्या उपलब्धि है ? इस प्रकार अफज़ल का नंबर आते आते तो तीन दशक और गुज़र जाएंगे . जब बड़े भाई का नंबर १५ साल बाद आयेगा तो छोटे मियां  'कसाब' तो जेल में ही बिरियानी  खाते खाते 'अल्लाह' को प्यारे हो जाएंगे.! हाँ यह बात दीगर है कि कोई जहाज़ अगवा हो जाए और हमारे मंत्री जी की रोज़ रोज़ के विपक्षी उलाहनों से जान छूटे.       
नूरा कुश्ती जारी है. गृह मंत्रालय राष्ट्रपति भवन को 'फांसी' के केसों पर हुकम पारित करने के लिए आधा दर्ज़न 'रिमाईडर' भेज चूका है उधर महामहिम के पास और भी बहुत से काम है ,फिर कोई समय सीमा भी नहीं ! जब तक पिछले केस नहीं निपट जाते तब तक और केस भेजने का कोई   ' तुक ' भी नहीं बनता.  . जब दिल्ली की मुख्य मंत्री 'अफज़ल की फ़ाइल ४-५ साल रख सकती है फिर प्रतिभाजी तो महामहिम हैं उनके पास तो असीम शक्तियां है और वह तो फांसी की सजा मुआफ  करने को भी सक्षम है भले ही 'लोक तंत्र के मंदिर संसद ' को उड़ने का अपराधी ही क्यों न हो. अभी 'अफज़ल मियां' की फ़ाइल तो 'धोती-धारी' चिदम्बरम के पास पुराने पापियों कि लम्बी कतार के आगे खिसकने के इंतजार में पड़ी है.
 कितनी बहादुरी के साथ लड़ रहे है 'आतकवाद' के खिलाफ हमारे यह सेकुलर शैतान फिर भी ये दुनिया वाले न मालुम क्यों इनको 'मूर्ख- नपुंसक या बौधिक किन्नर ' के संबोधनों से नवाजे जा रहे हैं ? अभी तो भगवा आतंक इन्हें अंदर से खाए जा रहा है. 

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

क्या इमानदारी क़ी परिभाषा भी बदल गई है ?

चोरों का सरदार ! फिर भी सिंह इमानदार ?
उन्हें हम आज भी लुटेरा कह कर याद करते हैं. गज़नी-नादिर शाह -दुर्रानी- कम्पनी बहादुर और न जाने क्या क्या ? वे तो लूटने आए थे और लूट कर चल दिए ! मगर ये तो अपने हैं और हमीं ने इन्हें चुना है अपना रहनुमां - भला ये कहाँ जाएंगे ?
चोर सिपाही का खेल जारी है. चोरों का सरदार अपनी सरपरस्ती में पहले तो चोरी और सेंध मारी को सरंजाम तक पहुंचता है और जब कुछ सतर्क श्वान अपनी घ्राण शक्ति का मुज़ाहेरा कर चोर-चोर का शोर मचाते हैं तो 'सरदार साहेब' बड़ी मासूमियत से चंद 'उच्चक्कों'  को पकड़ कर 'सख्त कार्रवाही' की ठंडी तफ्शीश की सी.बी.आई. दौड़ा देते हैं - चोर की  दिल्ली की बदनाम  गलियों में तलाश  जारी है और चोरों का राजा चीन के मैदानों में खेल रहा है. चंद खबरी खूब चिल्लाते हैं 'मेरा  मुंसिफ ही मेरा कातिल है -क्या मेरे हक़ में फैसला देगा.'  बाकी के बड़े बड़े 'खबरी' चोरों के राजा के टुकड़े खा कर अपना  श्वान धर्म निभा रहे हैं -'दुम' हिला कर.
बापू के भारत में लूट की परिभाषाएं ही बदल गईं हैं - सेंधमारी अब चोरी हो गई है और डाका महज़ घोटाले का कम्बल ओढ़े सरे बाज़ार इठला रहा है !   लुटेरे अब   'सफ़ेद पोश लीडर ' के रूप में   हमारे भारत भाग्य विधाता बने दिल्ली के मयूर सिंहासन पर शोभाएमान हैं.
चोरों का सरदार ! सिंह फिर भी अमानदार ?
क्या इमानदारी क़ी परिभाषा भी बदल गई है ?

रविवार, 21 नवंबर 2010

तोहमतें आंएगी नादिरशाह पर , आप दिल्ली रोज ही लूटा करें !!





तोहमतें आंएगी नादिरशाह  पर , 
आप दिल्ली रोज ही लूटा करें  !!
          एल.आर.गान्धी 

लुटना हमारा 'राष्ट्रिय व्यसन' है - हम लुट्ने को तैयार  बैठे हैं बस लूटने वाला चाहिए -इतिहास गवाह है ?
मुहम्मद गज्नी ने हमें १९ बार लूटा -नादिर शाह ने  दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह रंगिला से हिन्दुस्तान से लूटी  हुइ दौलत में से २५ लाख रुपये की मांग की और एवज़ में हीरे-मोति जडित मायूर सिंहासन और कोहेनूर हीरा  ले उडा . अह्मद्शाह दुरानी उर्फ अहमद शाह अब्दाली ने भी ८ हमले किए ...इन्सानियत का खून बहाया और लूटा भी. अब हमारे मिडिया के महारथी इस गलत फहमी में न रहें कि उस जमाने में 'खबरी 'कहाँ थे ? सिर्फ वे ही आज के 'राजा' के बिचौलिए हैं. उस वक्त की लूट में शोलापुरी बेगम और मुग्लानी बेगम ने शाह की दिल्ली लूट में 'खबरी' की भूमिका ब्खूबी निभाई और इनाम भी पाया. इन् खाब्रियों की निशान्देही पर शाह ने अमिर खान और कम्रुदीन खान की औरन्ग्ज़ेब के समय से हिन्दुस्तानियों से लूटी गइ ७० साल की कमाइ पर हाथ साफ कर दिया.शाह ने ३० करोड की लूट की जिसे २८००० हाथी, ऊँट , बैल गाड़ियो-छकड़ों आदि पर लाद अफगानिस्तान  ले गया.२०० ऊंटों पर तो दिल्ली दरबार से निकाह कर लाइ गइ बेगमात का ही समान था. मज़हब के नाम पर ७वि सदि से हिन्दुस्तान को लूटा गया और इस्लाम के नाम पर अनगिनत  काफिरों  (हिन्दुओ) की हत्या कर दी गइ और यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारि है. लूटा तो अन्ग्रेज़ों ने भी मगर आधुनिक भारत में वैज्ञानिक प्रगती में उनकी रेल ,डाकघर और शिक्षा की देन भी है,जिस से देश एक जुट हो कर आजादी के संघर्ष में कूद गया. 
आजादी के बाद भी लुट्ने का यह राष्ट्रिय 'व्यसन'  पूर्वतय जारी है.  पाक ने हमारे कश्मीर की  ३५% भूमि पर कब्जा कर लिया और सरकार ने पाक को देय ५० करोड रुपये पर रोक  लगा दी.  हमारे या फिर पाक के 'बापू'  की जिद के आगे सरकार हार गइ और ५० करोड पाक को दे कर हमने एक स्थाई  शत्रु पाल लिया( आज यह रकम १२ अरब ५० करोड़ बनती है)..... .आजाद भारत के पहले 'लुटेरे' होने का गौरव मिला- कृष्ण मेनन को जब जीप घोटाले में ८० लाख की लूट हुइ आज यह रकम २ अरब रुपये बनती है. और इसे अब तक देश का सबसे बड़ा घोटाला होने का श्रेय प्राप्त है. . तब भी संसद में हंगामा हुआ . मगर विपक्ष की आवाज में उतना दम नहीं था. नेहरु जी देश को अपने बाप दादा की जागीर मानते थे- कृष्ण मेनन को सजा तो क्या उल्टा देश का रक्षा मन्त्री बन डाला. नतिजा ? चीन से हमे शर्मनाक हार झेलनी पडी और हजारों मील हमारी भूमि आज भी चीन के कब्ज़े में है.एक भ्रष्ट मित्र की ब्दौलत नेहरु त्रासद अंत को प्राप्त हुए.
पिछ्ले ५ दशक से हमारे सत्ताधारी 'धृत राष्ट्र ' नेहरु जी की 'लुटो-लुटाओ' राष्ट्रिय नीति का अनुसरण करते आ रहे हैं . इन्दिरा जी ने पाक को दो फाड तो किया मगर उसकी कीमत आज की पीढी को अदा करनी पड रही है. देश की अर्थव्यवस्था तो चौपट हुइ सो हुइ मगर करोड़ों बंगला देशी भारत में घुस आए सो अलग . एक नया दुश्मन हमारे जी का जन्जाल और बन गया है. नेहरु जी के 'राज्दौत्र' राजीव जी को आखिर ज्ञान प्राप्त हुआ कि केन्द्र से 'पाँच वर्षीय योजनाओ के लिए भेजा गया रुपया आम आदमी तक पहुंचते  पहुंचते  मात्र १०-१५ पैसे ही रह जाता है.बाकी के पैसे तो 'भ्रष्ट तन्त्र' की जेब में ही पहुँच जाते हैं. बोफ़र काण्ड पर राजीव को हार का मुंह देखना पडा, मगर बोफ़र का दलाल कत्रोची आज भी कानून के लम्बे पर बंधे हाथों से दूर है. सुख राम के संचार घोटाले पर पर्देदारी का ही परिणाम है की आज ' राजा' का संचार घोटाला १,७६,६४५ करोड की उचाईयाँ  छू रहा है और नेहरु की पादुकाओं  में विराजमान मनमोहन जी - गान्धी जैसा मौन व्रत धारण किए बैठे हैं. देखो !  सर्वोच् न्यायालय सिंह साहेब का मौन व्रत तुड्वा पाता है या .......                
 देश का ६६००० अरब रुपया स्विस बैंकों में पहुँच गया. घोटालों की माँ २ जी  स्पेक्ट्रम १,७६,६४५ करोड गटक गइ. घोटालों का बाप योजना कार्यान्वन असफलता से अतिरिक्त खर्च १,१६,७२४ करोड की उचाईया छू रहा है और जवाब देही किसी की भी नहीं  ? खेल 

खेल में कल्माड़ी जी ७०० करोड के खेल को ७६ हजार करोड तक खेल गए . जांच जारि है मगर जनता को पूरा विश्वास है की आंच किसी पर नहीं अयेगी. आदर्श भ्रष्टाचार के प्रतीक अशोक चवन मुम्बई के सिंहासन से उतरे हैं तो दिल्ली के सिंहासन पर आरूढ़ हो जायेंगे. उनके अनुभव का फायदा अब केन्द्र सरकार उठाएगी .
जब तक कोइ नया घोटाला नहीं होता तब तक मिडिया इन् पुराने घोटालों पर लिपा पोती से अपनी टी. आर.पी  चमकायेगा और मिडिया के 'बिचौलिए' श्रीमान -सूश्रियाँ खाएंगी भी और बतियाएँगी  भी .. इसे कहते हैं बगुला भक्ति !!!!!!     

सोमवार, 15 नवंबर 2010

दोस्ती जब किसी से की जाए 
दुश्मनों की भी राय ली जाए
                       ............. उतिष्ठकौन्तेय

वहाँ 50 हज़ार बेरोज़गार,यहाँ 50 करोड़ निराहार ओबामा चिंताग्रस्त - मगर सिंह साहेब मस्त !!!



वहाँ 50 हज़ार बेरोज़गार,यहाँ 50 करोड़ निराहार
ओबामा चिंताग्रस्त - मगर सिंह साहेब मस्त !!!
एल. आर गान्धी

दुनिया के सबसे समृद्ध राष्ट्र का सबसे शक्ति सम्प्पन राष्ट्रपति दिवाली के अग्ले दिन जब इन्डिया की व्यापारिक राजधानी मुम्बई पहुँचे तो ' आम आदमी ' भी खास पशोपेश में पड गया कि भारत भी दुनिया की दूसरी बड़ी शक्ति के रुप में उभरते देशों की कतार में लग गया है. 'आम आदमी' और भी अचम्भित और हतप्रभ रह गया जब ओबामा ने अपनी भारत फेरी का मंतव्य व्यक्त करते हुए घोषणा की कि वे यहाँ मंदी के दौर से दो चार अमेरिकनों के लिए ५०,००० नौकरियां पैदा करने के उदेश्य से आए हैं. ओबामा अपने साथ अमेरिकन व्यवसाइयों की पूरी फौज ले कर आए थे ताकि भारतीय सरकार और बिग बिजनस हाउसिस से बात चीत कर अमेरिका के लिए इण्डिया में बिग बाज़ार की संभावनाओं को मूर्तरूप दिया जा सके.
बराक ओबामा को विश्व के सबसे अमीर अमेरिकनों की १०% बेरोज़गारी पर इतनी चिंता देख कर -अमेरिका के विश्व का सबसे बड़ा राष्ट्र होने का आधार समझ में आ गया. वह था वहां के राजनेताओं का अपने देश और जनता के प्रति इमानदार होना . उन्हें अपनी १०% बेरोजगार जनता की फ़िक्र है और हमारे नेताओं को देश की ५० करोड़ जनता जिसे दो जून की रोटी भी नहीं मुयस्सर,हर रोज़ १४,६०० बच्चे भूख से अकाल मृत्यु के आगोश में समा जाते हैं. १८.३ लाख बच्चे अपना ५व जन्म दिन नहीं मना पाते. विश्व के ९२.५ करोड़ भूख से बेहाल लोगों में भारत के ४५.६ करोड़ लोग हैं.
२००८ में आर्थिक संकट के बाद अंतर्राष्ट्रीय नेत्रित्व ने अमीरों और उद्योगपतियों को संकट से उबारने के लिए १० अरब डालर से अधिक राशी झोंक दी जबकि गरीबी मिटाने के लिए केवल एक अरब डालर
मुंबई में ओबामा ने ताज होटल में 'ठहर ' कर अपने मित्र पाक को एक सन्देश दिया कि वे इण्डिया के 'ताज में शहीद हुए ' हुए लोगों के साथ पूरी पूरी सहानुभूति व्यक्त करते है. मगर भारत में पाक प्रायोजित आतंक के चलते लाखों भारतीय और सुरक्षा कर्मी जो शहीद हुए उनसे उन्हें कोई सरोकार नहीं- पाक को आतक के खिलाफ लड़ाई में भी उन्होंने अपना 'साथी' घोषित कर दिया. जाहिर है ओबामा हो या बुश सभी अमेरिकियों को केवल और केवल अपने हित ही सर्वोपरि हैं.
मुंबई आगमन पर ओबामा के भारी भरकम जहाज़ को मेन रनवे के स्थान पर स्मालर रनवे पर उतरा गया ताकि वापसी उड़ान पर जहाज़ ऐअर पोर्ट की दिवार के साथ मीलों में फैली झुगी झोंपड- पट्टिओं के ऊपर से हो कर न गुज़रे, और भारत की दुर्दशा पर ओबामा की नज़र न पड़ जाए.इस के साथ् ही स्मलर रनवे के निकट हेलिकप्टर करियर सेवा उपलब्ध थी और ओबामा को मुम्बई भ्रमण के दौरान सडक मार्ग से दूर रखा जा सकता था- सडक मार्ग के दोनो ओर मुम्बई की बद्न्सीबी पसरी पडी है ऊंची अटालिकाओं के बीच जानवरों से भी बद्तर जीवन जी रहे झोपड पट्टि वासियों को देख दुनिया का सर्व सुख सम्म्प्पन 'महाराजा' क्या सोचता कि किन भिखारिओं से कुछ पाने की आस लगा बैठा.
वही मुंबई है जो देश को कुल इनकम टैक्स का ५०% देती है अर्थात यहाँ देश के 'धनकुबेर ' अपनी ऊंची ऊंची अत्ताल्लिकाओं में ऐश करते है. मुंबई की दूसरी सच्चाई यह भी है कि यहाँ की ६० % जनता झुग्गी झोपड़ियों में जानवरों से भी बदतर नारकीय जीवन जीने पर बाध्य है.
दिल्ली आगमन पर हमारे भारत भाग्य विधाताओं को ''अतिथि देवो भव् ' में मुम्बई जैसी दिक्कत नही आइ - क्योंकी कामन वेल्थ ने दिल्ली को पहले ही चका-चक किया हुआ था . खेलों से पहले करीब करीब ३ लाख झुगी वासी निर्वासित कर दिए गए थे और बाकि को बडे बडे साइन बोर्ड़ो के पीछे छुप दिया गया था. ६०००० भिखारिओं में से ५०००० को दिल्ली की गलियों से खदेड दिया गया था. दिल्ली को देख कर कोइ भी 'भारत' को दुनिया की उभर्ती महान्शक्ति का भ्रम आराम से पाल सकता है. इस लिए ओबामा को सडक मार्ग ही नहीं हुमयुं का मकबरा दिखा कर 'सच्चे लोक तन्त्र ' से भी रुबरू करवाया गया . ओबामा को इन्डिया की ऊंची- भव्य -विशाल और 'आदर्श भ्रष्ट तन्त्र की प्रतीक' अत्ताल्लिकाओं के दर्शन खूब करवाए गए मगर असली और बदनसीब भारत के पास भी फट्कने नहीं दिया.
वाह रे गालिब तेरी फाका मस्तियाँ
वो खाना सूखे टुकड भिगो कर शराब में

शनिवार, 30 अक्टूबर 2010

भारतीय लोकतंत्र अब ८७ वां आदर्श- भ्रष्ट तंत्र

भारतीय लोकतंत्र अब ८७ वां आदर्श- भ्रष्ट तंत्र
एल. आर. गाँधी

कलमाड़ी जी की असीम कृपा से - खेल खेल में कम से कम एक क्षेत्र में तो हमने अपने पडोसी चीन को पीछे छोड़ ही दिया- कठोर स्पर्धा के बाद 'भ्रष्टाचार की ऊंची कूद' में हमने यह सफलता अर्जित की. अब हम भ्रष्ट देशों की सूची में ८७ वी पायदान पर पहुँच गए हैं और हमारा प्रतिद्वान्धी चीन हमारे से ८ अंक पिछड़ कर ७९वे अंक पर लुढ़क गया . इस सफलता का एकांकी श्रेय हमारे खिलाडियों के खिलाडी कलमाड़ी जी को जाता है. विश्व के चोर-उच्चक्के देशों में देश का नाम रौशन करने के इस महान उपलब्धि के लिए कलमाड़ी जी को 'भारत रत्न' के साथ साथ आगामी ओलम्पिक खेलों का ठेका भी अभी से दे देना चाहिए ताकि शीघ्र से शीघ्र हम अपने चिर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान से आगे निकल सकें . कितनी शर्म की बात है कि हमारे से महज़ २४ घंटे पेहले पैदा हुआ दो कौड़ी का मुलुक भ्रष्टाचार के क्षेत्र में हम से मीलों आगे १४३ वे पायदान पर जा पहुंचा है. यह बात दीगर है कि पाकिस्तान को इस मुकाम तक पहुँचाने में अमेरिका से मिली भीख का बहुत बड़ा योग दान है. यदि हमें इतनी अमेरिकी मदद मिली होती तो हम आज अफगानिस्तान को प्राप्त श्रेष्ठ स्थान पर होते.
देश में भ्रष्टाचार एक रिले -रेस कि माफिक कभी न ख़त्म होने वाली दौड़ का रूप ले गया है. दिल्ली का खेल अभी ख़त्म नहीं हुआ कि 'रेस' देश कि आर्थिक राजधानी मुंबई में चालू हो गई. मुंबई में तो भ्रष्टाचार को 'आदर्श' सोसाईटी का नाम दिया गया और सीमां पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के नाम पर करोड़ों के फ़्लैट औने पौने दामों पर सफेदपोश नेता और उच्चाधिकारी हड़प गए. कल्मादिजी ने राहत की साँस ली -उनके पीछे पड़ा मिडिया अब 'आदर्श सोसाईटी' घोटाले पर पिल पड़ा है. मिडिया का भी इन घोटालों को उजागर कर और बीच में ही छोड़ नए घोटालों के पीछे पड़- इनके महत्त्व को न्गंन्य करने में विशेष योगदान रहा है. मिडिया भी व्यवसाए हो कर रह गया - सब कुछ महज़ टी.आर.पी की खातिर ?
१९९१ से २००९ के डेढ़ दशक में लगभग ७३ लाख करोड़ के बड़े घोटालों का अनुमान है. जिनमें स्विस बैंकों में देश का ७१ लाख करोड़ रूपया सबसे बड़ा घोटाला है. उसके बाद है २-जी स्पेक्ट्रम में ६० हजार करोड़ का घोटाला जिसे केंद्रीय मंत्री ए.राजा डी.एम्.के के दलित सांसद ने सरंजाम दिया. प्रधान मंत्री का इन्हें वरद हस्त प्राप्त है- हो भी क्यों न ...राजा की कृपा के बिना सरकार दो दिन की महमान है. सी. बी. आई को लगा रखा है केस को कछवा चाल पर लटकाए रखने को. यह बात अलग है कि सर्वोच्च न्यायालय ने सी.बी.आई को लताड़ लगाई है- साल भर से केस लटकाने पर और राजा को अभी तक मंत्री पद पर बनाए रखने पर ! अब देखो क्या होगा तेरा 'राजा' ? तीसरा घोटाला है - ५० हजार करोड़ - कर चोरी का, पूने के अरब पति हसन अली खान के नाम !!! अब इस से कम तो हम घोटाले को घोटाला ही नहीं मानते
भ्रष्टाचार का वटवृक्ष आज ८७ मीटर ऊंचा बरगद सा फ़ैल गया है यह जितना ऊंचा है उतनी ही इसकी जडें पाताल तक फैली हैं. इस बरगद का बीजारोपण भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु जी के करकमलो से ही हुआ था. उनका राज परिवार तो बस इसे आँखें मूँद पानी दिए चला जा रहा है. नेरुजी ने ५ वर्षीया योजनाओं की नीव रखी -बिना सोचे समझे योजनाओं पर केंद्र से धन लुटाया गया - यह किसी ने नहीं देखा कि जिन लोगों के लाभार्थ ये योजनायें बनी गई हैं उन तक इसका लाभ पहुंचा भी है. नेहरु जी के राज पौत्र 'राजीव गाँधी' ने भी माना की इन योजनाओं का महज़ १०-१५ % ही आम आदमी तक पहुँच पाता है.बाकि पैसा तो रास्ते में भ्रष्ट तंत्र ही हड़प जाता है. ६० साल से यह योजना - बध लूट बदस्तूर जारी है.
देश के प्रथम बड़े घोटाले का श्रेय भी हमारे नेहरु जी को ही जाता है. १९४८ का जीप घोटाला जिसमें भारतीय सेनाओं के लिए ८० लाख रूपए की जीपें खरीदी जानी थी . ब्रिटेन में भारतीय हाई कमिश्नर वी. के. कृष्ण मेनन पर जीप सप्लाई में घोटाले का दोष लगा . मेनन साहेब नेहरु जी के खासमखास थे. सज़ा तो क्या मेनन को देश का रक्षा मंत्री पद से नवाज़ा गया. हमारी सेनाएं चीन के हाथो परस्त हुईं और हजारों मील भूमि पर दुश्मन का कब्ज़ा हो गया. जिन लोगों के हाथ में देश को इमानदार प्रजातंत्र के रूप में विकसित करने की जिमेदारी थी उन्होंने ही उनकी नाक के नीचे फलफूल रहे भ्रष्ट - तंत्र से आँखें मूँद लीं और आज हम विश्व के सबसे बड़े भ्रष्ट तंत्र की दौड़ में नई नई बुलंदिओं को छूते जा रहे हैं. वह दिन दूर नहीं जब हम अफगानिस्तान को पछाड़ कर भ्रष्ट राष्ट्र तालिका के शिखर पर होंगे.